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सभी के संयुक्त प्रयासों से ही समाप्त होगा कुपोषण -संभागायुक्त
कोई भी बच्चा कुपोषित ना रहे, यह सभी का सामाजिक दायित्व- संभागायुक्त संभागायुक्त ने जिले का भ्रमण कर कुपोषित बच्चों के उन्नयन हेतु संचालित कार्यक्रमों का लिया जायजा
रायसेन | 04-अक्तूबर-2021
    भोपाल संभागायुक्त श्री कवीन्द्र कियावन ने महिला बाल विकास विभाग के तहत जिले की सभी परियोजनाओं का भ्रमण कर सेम एवं मेम बच्चों के उन्नयन हेतु संचालित कार्यक्रमों का जायजा लिया। महिला बाल विकास विभाग द्वारा जिले के ग्राम खरबई, गढ़ी, पलोहा तथा सिलवानी में आयोजित कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य जांच एवं माता-पिता और पोषण मित्र का उन्मुखीकरण शिविर का संभागायुक्त श्री कवीन्द्र कियावत द्वारा कन्या पूजन और दीप प्रज्जवलन कर शुभारंभ किया गया। संभागायुक्त श्री कियावत ने कहा कि कुपोषण की समस्या को समाप्त करने के लिए इसकी जड़ तक पहुंचना जरूरी है।
   संभागायुक्त श्री कियावत ने कहा कि मध्यप्रदेश को बाल कुपोषण से मुक्त प्रदेश बनाना है। इसके लिए कुपोषित बच्चों को 14 नवम्बर तक कुपोषण से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। कुपोषण की समस्या को समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। चाहे स्वास्थ्य विभाग का अमला हो, महिला बाल विकास विभाग का अमला हो, पंचायत विभाग का अमला हो, सभी को मिलकर काम करना होगा। समन्वित प्रयासों से ही कुपोषण को समाप्त किया जा सकता है।
पोषण मित्र बनकर कुपोषित बच्चे की लें जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पोषण मित्र सहित अन्य अमला संकल्प ले कि जब तक कुपोषित बच्चे स्वस्थ्य नहीं हो जाते प्रतिदिन उनकी देखभाल करेंगे, पोषण आहार उपलब्ध कराएंगे। पोषण मित्र अपने दायित्व को समझकर पूरी निष्ठा से प्रयास करें। पोषण मित्र, ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता कुपोषित बच्चे की उसी तरह देखभाल करें जिस तरह वह अपने बच्चों की देखभाल करते हैं। उनके पर्याप्त पोषण आहार का ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि अगर प्रत्येक सक्षम व्यक्ति पोषण मित्र बनकर एक-एक कुपोषित बच्चे की जिम्मेदारी ले, तो कुपोषण की समस्या को खत्म किया जा सकता है। ग्राम सेवक, सरपंच, सचिव सबका दायित्व है कि गॉव के भीतर किसी भी बच्चे को कुपोषित ना रहने दें।
नवजात शिशु के लिए मॉ का दूध अमृत समान
उन्होंने कहा कि नवजात शिशु के लिए मॉ का दूध अमृत समान होता है। शिशु का पहला आहार मॉ का दूध ही होना चाहिए, यह शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसी प्रकार कुपोषित बच्चों को प्रतिदिन प्रोटीन पाउडर, पोष्टिक भोजन, फल, दूध आदि उपलब्ध कराएं। कुपोषित बच्चों को प्रतिदिन ऑगनबाड़ी लाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। किशोरी, बालिकाओं को शिक्षा दें। गॉव में महिलाएं जागरूकता समूह बनाएं जिसमें वह बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण आहार पर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित आरोग्यम केन्द्रों, स्वास्थ्य केन्द्रों पर पदस्थ सीएचओ और अन्य स्वास्थ्य अमला अपने क्षेत्र के कुपोषित बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करें, अभिभावकों की काउंसलिंग करें, उन्हें पोषण आहार की जानकारी दें।  
हर परिवार को रोजगार का साधन दिलवाएं
संभागायुक्त ने कहा कि कुपोषित बच्चें के परिवार जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है उन्हें शासन की योजना स्ट्रीट वेण्डर, स्व-सहायता समूह सहित अन्य योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना होगा ताकि वह अपने बच्चे के समुचित पोषण आहर पर ध्यान दे सकें। पंचायत सचिव ऐसे परिवार के सदस्यों को मनरेगा के तहत गॉव में ही रोजगार उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि यदि परिवार का कोई सदस्य किसी व्यसन में लिप्त है, शराब पीते हैं तो उनकी यह आदत छुड़वाएं। इससे न सिर्फ उनका स्वास्थ्य ठीक होगा बल्कि अनावश्यक खर्च भी बचेगा। इस राशि का उपयोग बच्चे के पोषण आहार के लिए करें। उन्होंने कहा किमादक पदार्थो के सेवन से गंभीर बीमारियां होती हैं जिनके ईलाज में कई घर-परिवार तबाह हो जाते हैं।
विकासखण्ड स्तर पर स्थापित करें कॉल सेंटर
विकासखण्ड स्तर पर कॉल सेंटर स्थापित करें। जहां प्रत्येक कुपोषित बच्चे की जानकारी हो और परिवार के सदस्यों का नम्बर हो। कॉल सेंटर से कुपोषित बच्चों के परिजनों को प्रतिदिन फोन करें। स्वास्थ्य की जानकारी लें, समझाईश दें। पोषक मित्र से भी बात करें। यदि सभी संकल्प लें ले कि हम प्रत्येक बच्चे को कुपोषण से मुक्ति दिलाएंगे, गॉव में किसी को कुपोषित नहीं होने देंगे तो निश्चित ही 14 नवम्बर तक कोई बच्चा कुपोषित नहीं रहेगा। संभागायुक्त श्री कियावत द्वारा बच्चों को पोषण किट वितरित की गई। इस किट में जिसमें प्रोटीन पाउडर, प्रोटीन बार, खिलौने, मच्छरदानी, टॉबिल, साबुन तथा कपड़े शामिल हैं। इसके साथ ही आयुष विभाग की ओर से सुपुष्टि चूर्ण तथा बच्चों की मालिश के लिए तेल भी प्रदान किया गया।  
जिले को जल्द से जल्द कुपोषण मुक्त बनाना है- कलेक्टर
कलेक्टर श्री अरविन्द कुमार दुबे ने कहा कि जिले को कुपोषण मुक्त बनाने संभागायुक्त की व्यक्तिगत देखरेख में अभियान शुरू किया गया है। जिले को जल्द से जल्द कुपोषण मुक्त बनाने के लिए सभी विभाग समन्वित रूप से मिलकर काम करें। जो बच्चे अति कुपोषित और कुपोषित हैं उन पर विशेष ध्यान दिया जाए, उन्हें नियमित रूप से पोषण आहार, दवाईयां उपलब्ध कराएं। कलेक्टर श्री दुबे ने कहा कि कुपोषण को समाप्त करने के लिए लोगों को भी जागरूक किया जाएगा।  
कलेक्टर श्री दुबे ने कहा कि कुपोषण का मुख्य कारण कम उम्र में मॉ बनना, गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में पोषण आहार ना लेना, शिशु को मॉ का दूध ना मिलना, उचित देखभाल ना होना, शिक्षा की कमि, कमजोर आर्थिक स्थिति आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एएनएम, ऑगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिला तथा उसके परिजनों को बताएं कि अगर अभी देखभाल नहीं की, पोषण आहार का ध्यान नहीं रखा तो बच्चा कुपोषित हो सकता है। गर्भवती माताओं को भी स्वयं के खान-पान, दवाईयों का विशेष ध्यान रखना होगा जिससे उसका बच्चा कुपोषित ना हो।
पोषण मित्रों ने कहा, बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने वह संकल्पित हैं
संभागायुक्त श्री कियावत ने पोषण मित्रों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और अभिभावकों से भी चर्चा करते हुए बच्चों के संबंध में जानकारी ली। पोषण मित्र श्रीमती शारदा, आशा, रश्मि ने कहा कि सरकार की इस योजना से जुड़ कर उन्हें बच्चों के लिए कुछ करने का अवसर प्राप्त हुआ है। बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार को लेकर वह संकल्पित हैं और बच्चे को पूर्णता स्वस्थ करने में अपनी ओर से पूरा-पूरा योगदान देंगी।
अभिभावकों ने कहा, शासन के प्रयासों से उनके बच्चे स्वस्थ्य हो रहे
   संभागायुक्त को अवगत कराते हुए बच्चों के माता-पिता गुलाब सिंह तथा प्रीति, गनेश सिंह तथा आरती सहित अन्य अभिभावकों ने बताया कि शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों से उनके बच्चों को बहुत लाभ लाभ हुआ है। वो इस बात से खुश है की सरकार और समाज मिलकर बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए काम कर रहे हैं। आंगनवाड़ी में उन्हें स्वास्थ्य, पोषण आहार आदि अन्य बातों के बारे में बार-बार समझाया गया है। ऑगनवाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक और परियोजना अधिकारी उनसे मिलते है और बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण आहार और देखभाल के बारे में समझाते है। उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी से नियमित  पोषण आहार वितरण होता है।
   जिला महिला बाल विकास अधिकारी श्री दीपक संकट द्वारा जिले की सभी परियोजनाओं में सेम और मेम बच्चों की संख्या और उनके स्वास्थ्य के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि ऑगनवाड़ी केन्द्रों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम ये बच्चों के माता-पिता को पोषण आहार की महत्व बताया जाता है। साथ ही नियमित पोषण आहार भी वितरित कराया जा रहा है। कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ श्री पीसी शर्मा, महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त संचालक श्रीमती नकी जहां कुरैशी, सीएमएचओ डॉ दिनेश खत्री, जिला आयुष अधिकारी डॉ ओपी तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

 
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