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भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के स्वाभिमान, सम्मान और अभिमान की परिचायक - मंत्री डॉ.यादव
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.यादव राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए
उज्जैन | 04-अक्तूबर-2021
      प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव सोमवार को कालिदास अकादमी के पं.सूर्यनारायण संकुल सभागृह में प्रदेश में लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संभाग स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने की। पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.सत्यनारायण जटिया बतौर प्रमुख अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुए।
    मंत्री डॉ.यादव ने इस अवसर पर कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के स्वाभिमान, सम्मान और अभिमान की परिचायक है। हम शिक्षा को देश के अनुकूल बनाना चाह रहे हैं1 शिक्षा प्रापत करने के बाद व्यक्ति योग्य नागरिक बने तथा उसके सामने आजीविका का संकट खड़ा न हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है। मंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आजादी के बाद दो बार हमारे देश में शिक्षा नीति लागू की गई, किन्तु दोनों ही बार इसके विपरीत परिणाम दिखाई दिये। अत: सन 2020 में देश में गहन विचार-विमर्श करके हमारी ऋषि परम्परा को प्रकट करने वाली शिक्षा नीति लागू की गई है। मंत्री डॉ.यादव ने कहा कि सन 1835 में अंग्रेज सरकार के दौरान लॉर्ड मैकाले के नेतृत्व में हमारे देश में स्कूलों का पाठ्यक्रम तैयार किया गया था और हमारी प्राचीन शिक्षा नीति को बदलने का प्रयास किया गया, लेकिन वर्तमान में प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में पुन: हमारी संस्कृति से जुड़ी शिक्षा नीति लाने का प्रयास किया गया है। कई सुझाव और लम्बे चिन्तन के बाद नई शिक्षा नीति लागू की गई है। नई शिक्षा नीति लागू कर मध्य प्रदेश का मॉडल पूरे देश के लिये प्रेरणा बनेगा।
    कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.सत्यनारायण जटिया ने कहा कि उज्जैन नगरी देवादिदेव महादेव की नगरी है। महादेव के मस्तक पर विराजमान चन्द्रमा सम्पूर्ण विश्व को प्रकाशित करता है। यह अत्यन्त प्रसन्नता का विषय है कि शिक्षा का प्रकाश भी अवन्तिका नगरी से सम्पूर्ण देश में प्रसारित होगा। नई शिक्षा नीति पर आधारित संभाग स्तरीय पहली कार्यशाला उज्जैन में आयोजित की जा रही है। शिक्षक जब शिक्षा देता है तो उनका भी प्रशिक्षण होता है। क्या, क्यों और कैसे का समाधान है शिक्षा में। वर्तमान में इनोवेटिव शिक्षा को लागू करने की आवश्यकता थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति लागू की गई। सामाजिक न्याय के लिये शिक्षा बहुत जरूरी है। भारत युवाओं का देश है। बहुआयामी प्रतिभाओं का विकास करना बेहद जरूरी है। नई शिक्षा नीति निश्चित रूप से नये भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
    सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने कहा कि हमारे देश में तीन बार शिक्षा नीति लागू की गई। पहली बार सन 1968 में, दूसरी बार 1986 में और तीसरी बार सन 2020 में। मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति की पहली कार्यशाला उज्जैन में हो रही है। यह नीति अत्यन्त सार्थक सिद्ध होगी। हमारे देश की प्राचीन शिक्षा पद्धति पूरे विश्व में प्रख्यात है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति लागू की गई है। निश्चित रूप से नई शिक्षा नीति एक नये भारत का निर्माण करेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई इबारत लिखी जायेगी।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन श्री अनुपम राजन ने दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति जब 2020 में लागू की गई, तब कोविड चरम पर था। मध्य प्रदेश उन अग्रणीराज्यों में है, जिन्होंने शिक्षा नीति अपने यहां लागू की है। विगत 26 अगस्त को मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति को हमने अंगीकार किया। प्रदेश के प्रत्येक महाविद्यालय में हैल्पडेस्क का गठन किया गया है, जो विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति से अवगत करा रहे हैं तथा उनकी शंकाओं का समाधान कर रहे हैं। पूरे सिलेबस को रि-डिझाईन किया गया है। विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख कोर्सेस भी पढ़ाये जायेंगे। समय-समय पर दूसरे संभागों और जिलों में भी इस तरह की कार्यशाला आयोजित की जायेगी।
    श्री विवेक जोशी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण में वहां की शिक्षा व्यवस्था अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा समय-समय पर हमारे देश की गुरूकुल शिक्षा पद्धति को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया। नई शिक्षा नीति रोजगारोन्मुख होने के साथ-साथ भारत की संस्कृति को भी अपने अन्दर समाहित कर लागू की गई है। इस नीति के प्रभाव से भविष्य में जो विद्यार्थी निकलेंगे वे भारत को प्रगति दिलाने में नई भूमिका अदा करेंगे।
    अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला के प्रथम सत्र का शुभारम्भ किया गया और द्वितीय सत्र में विषय विशेषज्ञों द्वारा शिक्षा नीति के तकनीकी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया और चर्चा की गई। कार्यशाला में संभाग के लगभग 180 महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थाओं के प्रोफेसर्स तथा विद्यार्थी शामिल हुए। व्यावसायिक शिक्षा, इंटर्नशिप, सामाजिक सेवा और अन्य सम-सामयिक पहलुओं पर व्याख्यान आयोजित किये गये। इस दौरान श्री दिवाकर नातू, श्री अशोक प्रजापत, उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव श्री अनुपम राजन, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार पाण्डेय, कुल सचिव डॉ.प्रशांत पौराणिक, प्रो.सीजे राजेन्द्र कुमार, श्री विवेक जोशी, एडिशनल डायरेक्टर उच्च शिक्षा विभाग डॉ.आरसी जाटवा, डॉ.वन्दना गुप्ता, डॉ.अर्पण भारद्वाज, डॉ.गोविन्द गंधे तथा उज्जैन संभाग के सातों जिलों के लीड कॉलेज के प्राचार्य एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
    शुभारम्भ सत्र का संचालन विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ.शैलेंद्र कुमार शर्मा ने किया और आभार प्रदर्शन कुल सचिव डॉ.प्रशांत पौराणिक ने किया।
 
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