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किसान की जुबानी उसकी सफलता की कहानी "सफलता की कहानी"
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भिण्ड | 11-अक्तूबर-2021
   जहां चाह होती है वहां राह निकल ही आती है। व्यक्ति मन में कुछ नया करने की ठान ले तो उसे सफलता निश्चित रूप से मिलती है। ऐसा ही कुछ कृषक श्री रामगोपाल सिंह ने कर दिखाया है। श्री रामगोपाल ने रासायनिक खाद को छोड़कर जैविक खेती को अपना लिया है। जैविक खेती से उन्हें अच्छा खासा लाभ भी हो रहा है। जैविक खेती से प्रभावित होकर श्री रामगोपाल अपने गांव के किसानों के लिए प्रेरणा का श्रोत बने जो केवल जैविक खाद से ही खेती करना चाहते हैं।
   श्री रामगोपाल भिण्ड जिले के अनुभाग गोहद ग्राम सिरसोदा के रहने वाले हैं। श्री रामगोपाल अपनी खेतों में पारम्परिक तरीके से खेती कर खरीफ में ज्वार, बाजरा, तिल एवम रवी में सरसों, गेहूं सामान्य उत्पादन ही ले पाते थे। वर्षभर में एक ही फसल एक खेत में होती थी। जिसके लिए वो पूर्ण रूप से वर्षा पर निर्भर थे, जिस कारण इस फसल से सिर्फ परिवार का भरण पोषण ही हो पता था।
   उन्होंने बताया कि पढ़ाई लिखाई के बाद खेती में बदलाव लाने के लिए अपनी कुल जमीन के कुछ हिस्से लगभग 1 हेक्टेयर में उद्यानिकी फसल लेने हेतु कुंआ खुदवाया और आलू की खेती करना प्रारंभ की। कृषि एवं उद्यानिकी खेती में बदलाव लाकर तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने के लिए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर खेती की तकनीकी प्राप्त की और अब मैं जैविक खेती के लिए वर्मी कंपोस्ट, जीवाणु खाद का उपयोग कर रहा हूं। जिससे मुझे जैविक उत्पादन बहुत अच्छा मिल रहा है इस प्रकार से मैं स्वयं के संसाधन से बना हुआ खाद एवं कीट नियंत्रण के लिए गौमूत्र, अन्य जैविक रसायन का उपयोग करके खेती में कम लागत से अच्छा उत्पादन ले रहा हूं। जिससे मुझे दोगुनी आय अर्जित हो रही है। और अब एक खेत में चार फसल कर पा रहा हूं। श्री रामगोपाल ने बताया कि जैविक पद्धति से तैयार खाद के उपयोग से संतुष्ट हूं। और मैं अन्य किसानों भाईयों को जैविक खेती हेतु प्रोत्साहित करने का कार्य निरंतर कर रहा हूं। जिससे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का सपना साकार हो सके।
 
(53 days ago)
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