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किशोरावस्था पोषण की दृष्टि से एक संवेदनशील समय होता है
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मुरैना | 11-अक्तूबर-2021
    किशोरबास्था में पोषण जीवनभर का निबेश है। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर मुरैना यूथ अकादमी द्वारा एनआई के मार्गदर्शन में किशोरी बालिका एवं पोषण विषय पर एक बैचारिक संगोष्टी का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के डीएचओ डॉ. पदमेश उपाध्याय, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री शंकर प्रसाद श्रीवास्तव, शहरी परियोजना अधिकारी श्री मनीष सिंह, विद्यालय के प्राचार्य श्री एके जैन, न्यूट्रिशन इंटरनेशनल के संभागीय समन्वयक मिजऱ्ा रफीक बेग एवं यूथ अकादमी के सचिव श्री संदीप सेंगर मौजूद थे।     
    यूट्रिशन इंटरनेशनल के संभागीय समन्वयक मिर्जा रफीक बेग ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा है कि किशोरावस्था पोषण की दृष्टि से एक संवेदनशील समय होता है, जब तेज शारीरिक विकास के कारण पौष्टिक आहार की माँग में वृद्धि होती है। किशोरावस्था के दौरान लिए गए आहार सम्बन्धी आचरण पोषण सम्बन्धी समस्याओं में योगदान कर सकते हैं, जिसका स्वास्थ्य एवं शारीरिक क्षमता पर आजीवन असर रहता है। डीएचओ डॉ पदमेश उपाध्याय ने कहा की भारत में किशोरों का एक बड़ा भाग, 40 प्रतिशत लड़कियाँ और 18 प्रतिशत लड़के, एनीमिया (रक्त की कमी) से पीडि़त है। किशोरों में एनीमिया, उनके विकास, संक्रमणों के विरुद्ध प्रतिरोध-शक्ति तथा ज्ञानात्मक विकास और कार्य की उत्पादकता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।
    शहरी परियोजना अधिकारी मनीष सिंह ने कहा कि यह दिवस बालिकाओं को समाज में डिजिटल रूप से विभाजित करने के अंतर को समाप्त करने पर आधारित है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए कि लड़कियों को डिजिटल उपकरणों, तकनीक से संबंधित कौशल और नौकरियों तक समान पहुंच और बढ़ने का समान अवसर मिले। जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री शंकर प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करना है।  यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लिंग-आधारित चुनौतियों को समाप्त करता है। जिसका सामना दुनिया भर में लड़कियां करती हैं, जिसमें बाल विवाह, उनके प्रति भेदभाव और हिंसा शामिल है।

 
(54 days ago)
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