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जैविक खेती से किसान प्रेमसिंह की आय में बढ़ौत्री हुई "सफलता की कहानी"
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उज्जैन | 13-अक्तूबर-2021
    उज्जैन के खाचरौद विकास खण्ड के ग्राम पालकी निवासी प्रेमसिंह पिता गोवर्धनसिंह के पास तीन हेक्टेयर कृषि भूमि है। पूर्व में उनके द्वारा खेत पर सामान्य फसल गेहूं, चना एवं सोयाबीन बोई जाती थी, परन्तु जब से वे कृषि विभाग की आत्मा योजना के द्वारा आयोजित कृषि संगोष्ठी के माध्यम से कृषि अधिकारी के सम्पर्क में आये, तो उन्होंने जैविक खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अपने खेत में वर्मी कम्पोस्ट पिट बनाया और एक कच्चा गड्ढा खोदकर एजोला कल्चर का उत्पादन शुरू किया।
    पिछले दो सालों में उन्होंने अपने खेत में रासायनिक खाद का इस्तेमाल पूर्ण रूप से बन्द कर दिया है और वे फसल में जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग खेत में करने के साथ-साथ केंचुए को कृषकों एवं सरकारी संस्थाओं को 300 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम के मान से बेचकर दो लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं। पहले प्रतिवर्ष होने वाले रासायनिक खाद का खर्च सात हजार रुपये प्रति वर्ष बचने लगा है। साथ ही जो गेहूं सामान्यत: 1800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकता था वही गेहूं अब ढाई हजार रुपये प्रति क्विंटल घर बैठे बिक रहा है। प्रेमसिंह एजोला पिट में एजोला का उत्पादन कर उसका उपयोग पशुओं को खिलाने के लिये करते हैं, जिससे भैंस के दूध में फेट का प्रतिशत बढ़ा है। इससे भी उन्हें आर्थिक लाभ मिल रहा है।
    प्रेमसिंह द्वारा जैविक खाद को अपनाने पर सात हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की लागत कम हुई और वर्मी पिट प्राप्त वर्मी वॉश का उपयोग कीटनाशक के रूप में कर लागत को कम किया गया। साथ ही वर्ष 2020-21 में एक लाख 75 हजार के केंचुए विक्रय कर लाभ प्राप्त किया।
 
(8 days ago)
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