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टीबी मुक्त करने की दिशा मे राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम का किया जा रहा है बेहतर तरीके से क्रियान्वयन
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उज्जैन | 14-अक्तूबर-2021
      राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत उज्जैन में एक अप्रैल 2018 से आज दिनांक 12/10/2021 तक 16006 क्षय रोगियों की पहचान कर 13104 व्यक्तियों को रोग मुक्त किया जा चुका है। एवं वर्तमान में 1848 टीबी रोगी उपचाररत हैं। एनटीईपी कार्यक्रम जिले में कुल 10 टीबी यूनिट हैं एवं 20 डीएमसी क्रियाशील हैं। क्षय रोगियों की पहचान करने हेतु संस्थागत ओपीडी, एक्टिव केस फाईडिंग सर्वे, (समुदाय में घर-घर जाकर) हेल्थ कैम्प (संवेदनशील जनसंख्या एवं अन्य स्थानों पर) आयोजित किये जाते हैं। टीबी की पहचान होने के उपरांत मरीजों को उनके घर पर ही डॉट प्रोवाइडर द्वारा दवा खिलाई जाती है। जिसकी सतत मॉनिटरिंग एसटीएस द्वारा की जाती है। एवं समय समय पर जांच एवं फालोअप एसटीएलएस के माध्यम से किया जाता है।
   टीबी रोगी के उपचार हेतु महिला बाल विकास की आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्वास्थ्य विभाग की आशा कार्यकर्ताओं का सहयोग मरीज को दवा खिलाने एवं सर्वे द्वारा मरीज चिन्हित करने हेतु लिया जाता है। साथ ही ऐसे लोगों को जो कि टीबी का ईलाज लेकर पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हो चुके हैं, उनमें से प्रत्येक विकासखण्ड में टीबी चेम्पियन बनाये गये हैं जो कि टीबी के विषय में समुदाय को जागृत कर रोगियों के ईलाज में सहयोग करते हैं।
   एनटीईपी कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसे रोगी चिन्हें 18 माह से 24 माह तक ईलाज दिया जाता है उन्हें बिडाक्युलीन नामक औषधी जिसका बाजार मूल्य लगभग 13 लाख है मरीज को छः माह तक निःशुल्क खिलाई जाती है। 1 अपै्रल 2018 से 114 मरीजों को बिडाक्युलीन दवा दी जा चुकी है जिसका कुल खर्च लगभग 148200000/- (चैदह करोड़ बयासी लाख) हुआ है।
   टीबी रोगी निक्क्षय पोषण योजना के तहत उसके संपूर्ण उपचारकाल में 500/-प्रतिमाह पोषण हेतु दिया जाता है। टीबी उपचार रोगी के परिवार में यदि कोई 5 वर्ष से कम उम्र का बच्चा होता है तो उसे टीबी से बचाव हेतु टीबी प्रीवेन्टिव थैरेपी दी जाती है। 1 अप्रैल 2018 से आज दिनांक तक निक्क्षय पोषण योजना के तहत 35596500/- (तीन करोड पचपन लाख छियान्वे हजार पांच सो) का लाभ हितग्राहियों को दिया जा चुका है।
   एक अक्टूबर 2021 से एनटीईपी में नया घटक जुड़ गया है जिसे पीएमटीपीटी (प्रोगामेटिक मैनेजमेंट ऑफ टीबी प्रेन्विेन्टिव ट्रीटमेंट) के नाम से जाना जायेगा। जिसके अंतर्गत टीबी मरीज जिन्हें लंग्स की टीबी है उनके परिवार जनों को इग्रा टेस्ट के उपरांत टीबी प्रीवेन्टिव ट्रीटमेंट दिया जाना है जिससे की परिवारजनों को भविष्य में टीबी की बीमारी होने से बचाया जा सके।
    समस्त स्वास्थ्य संस्थाओं पर माईक्रोस्कोप द्वारा टीबी की जांच निःशुल्क की जाती है एवं जिले में 3 सीबीनाट एवं एक ट्रूनॉट मशीन हैं जिसमें मरीज के उपचार पूर्व दवा की संवेदनशीलता देखी जाती है। इसके उपरांत मरीज के सेंपल अन्य दवाइयों की संवेदनशीलता जांचने के लिये ग्वालियर भेजा जाता है। तद्नुसार उपचार निर्धारित किया जाता है।
 
(13 days ago)
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