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कालीबाड़ी में दुर्गा विसर्जन पर हुई सिंदूर खेला की रस्म (दशहरा पर विशेष लेख)
49 वर्षो से चली आ रही परम्परा
सतना | 16-अक्तूबर-2021
 
     बंगाली समाज में पुरातन काल से ही दुर्गा पूजा का विशेष महत्व रहा है। सतना शहर में दुर्गा पूजा का प्रचलन लगभग 146 वर्ष पूर्व से प्रारंभ हुआ, जो अनवरत चला आ रहा है। सतना में नवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा बंगाली समाज के अंबिका चरण बनर्जी ने वर्ष 1875 में बिहारी चौक में बंगाल शैली में बरदा माता का मंदिर का निर्माण करने के साथ शुरू किया। मुख्तयारगंज में स्वामी चौराहा के पास सन 1972 में मां काली की प्रतिमा की स्थापना कर बंगाली समाज द्वारा दुर्गा पूजा की शुरुआत की गई, जो बाद में कालीबाड़ी मंदिर के नाम से विख्यात हो गया।
     कालीबाड़ी मंदिर संचालन के लिए गठित बंगाली समिति के सचिव सुभाष बनर्जी बताते हैं कि कालीबाड़ी मंदिर की स्थापना सन 1976 में की गई। जबकि यहां बंगाली समाज द्वारा सन् 1962 से निरंतर बंगाली परंपरा अनुसार देवी मां की पूजा-आराधना की जा रही है। कालीबाड़ी में प्रत्येक अमावस्या की रात यहां अनुष्ठान पूर्वक अमावस पूजन-हवन इत्यादि किए जाते हैं। बंगाली परंपरा के अनुसार कालीबाड़ी मंदिर में प्रत्येक नवरात्रि में मां दुर्गा की स्थापना की जाती है। जहां भक्तजन बड़े-बड़े ढोल और जलते हुए खप्पर लेकर नृत्य कर आराधना करते हैं। महाअष्टमी को विशेष पूजा की जाती है। माता रानी को बलि के प्रतीक रूप में फल और सब्जियों की दी जाती है।
    समिति के कोषाध्यक्ष विमल मित्रा बताते हैं कि कालीबाड़ी मंदिर की नवरात्रि का बंगाली समुदाय में विशेष महत्व है। सतना शहर में रहने वाले बंगाली समाज से जुड़ा हर व्यक्ति इन नवरात्रि में कालीबाड़ी मंदिर में पहुंचकर देवी पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं। नवरात्रि का विसर्जन दशहरे को महिलाओं द्वारा किए जाने वाले सिंदूर खेला रस्म के साथ किया जाता है। 9 दिनों के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन उनके ललाट और चरणों में सिंदूर अर्पण से होता है। बाद में यही सिंदूर बंगाली समाज की सुहागिनी महिलाएं अपने मांग में लगाकर परंपरा अनुसार सिंदूर खेला का नृत्य करते हैं।
कलेक्टर दंपत्ति भी पहुंचे कालीबाड़ी
    कालीबाड़ी में दुर्गा विसर्जन के दौरान आयोजित सिंदूर खेला की रस्म में शामिल होने कलेक्टर अजय कटेसरिया सपत्नीक पहुंचे। बंगाली समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने देवी पूजा आराधना की। इस मौके पर श्रीमती शुभम प्रिया कटेसरिया ने सिंदूर खेला की रस्म में शामिल होकर समूह की महिलाओं के साथ नृत्य भी किया।
(54 days ago)
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