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सार्थक प्रयत्नों से दुनिया के श्रेष्ठतम विश्वविद्यालयों में सम्मिलित हो विक्रम विश्वविद्यालय
विक्रम विश्वविद्यालय का आधारशिला दिवस सोल्लास मनाया गया
उज्जैन | 24-अक्तूबर-2021
     विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन का आधारशिला दिवस कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, रविवार, विक्रम संवत् 2078 तदनुसार दिनांक 24 अक्टूबर 2021 को प्रातः 11 बजे सोल्लास मनाया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में सम्राट विक्रमादित्य के मूर्ति शिल्प पर स्वस्ति वाचन के साथ जलाभिषेक एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। तत्पश्चात कार्यपरिषद कक्ष में सम्राट विक्रमादित्य और उनके नवरत्नों एवं शलाका दीर्घा सभागार में विश्वविद्यालय के शलाका पुरुषों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
शलाका दीर्घा सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने की। आयोजन के मुख्य अतिथि सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी थे। आयोजन में कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर, एडवोकेट सुश्री ममता बैंडवाल, कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक, कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि श्रीराम तिवारी ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के नाम से जुड़े होने का गौरव विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों को होना चाहिए। यह विश्वविद्यालय दुनिया के श्रेष्ठतम विश्वविद्यालयों में सम्मिलित हो, इसके लिए सभी के सार्थक प्रयास जरूरी हैं। विक्रम विश्वविद्यालय के सहयोग से मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के अंतर्गत कार्यरत सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा प्राचीन उज्जैन का पुरातात्विक उत्खनन करवाया जाएगा। अनेक दशकों पहले हिंदी, मराठी और अंग्रेजी में प्रकाशित तीनों विक्रम स्मृति ग्रंथों का पुनर्प्रकाशन मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से किया जाएगा। 
कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि युवाओं को इस देश और विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास जानना चाहिए। आधारशिला दिवस हमें इस विश्वविद्यालय की स्थापना में योगदान देने वाले शलाका पुरुषों का स्मरण कराता है। कृषि, फॉरेंसिक साइंस, फूड टेक्नोलॉजी, क्रीडा, मैनेजमेंट, विधि आदि से जुड़े अनेक नवीन पाठ्यक्रम विक्रम विश्वविद्यालय में इसी वर्ष से प्रारंभ किए गए हैं। विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े युवाओं द्वारा कोविड-19 के दौर में अविस्मरणीय सेवा कार्य किए गए। वर्तमान दौर में माननीय प्रधानमंत्री जी की संकल्पना के अनुरूप स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य चेतना एवं कोविड-19 की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन जागरूकता की दिशा में रासेयो के युवा कार्य करें। 
कार्यपरिषद सदस्य श्री संजय नाहर एवं सुश्री ममता बैंडवाल ने उपस्थित जनों को बधाई देते हुए कहा कि हम विश्वविद्यालय को नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध हों।
कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक ने कहा कि देश के प्राचीनतम विश्वविद्यालय के रूप में उज्जयिनी का विश्वविद्यालय रहा है। आधारशिला दिवस से प्रारंभ हो रहे राष्ट्रीय सेवा योजना के अभिमुखीकरण कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को स्वच्छता जागरूकता के साथ व्यक्तित्व विकास एवं नेतृत्व का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
     कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने विक्रम विश्वविद्यालय की स्थापना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनेक सहस्राब्दियों से उज्जैन शिक्षा प्राप्त करने के लिए उत्कंठित विद्यार्थियों को आकर्षित करता आ रहा है। आजादी के आंदोलन के समानांतर उज्जैन में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये वातावरण बनने लगा था, जिसमें पद्मभूषण पं सूर्यनारायण व्यास जैसे मनीषियों और गणमान्यजनों की महनीय भूमिका रही है। आजादी मिलने के बाद यह सपना साकार हुआ और कार्तिक कृष्ण चतुर्थी विक्रम संवत 2013 तदनुसार 23 अक्टूबर, 1956 को विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गई थी। छात्र श्री हर्ष थानी ने विश्वविद्यालय की गौरव गाथा गीत की प्रस्तुति की।
आयोजन में प्रो एचपी सिंह, डीसीडीसी प्रो डी एम कुमावत प्रो प्रेमलता चुटैल, पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ दिलीप सोनी, उप कुलसचिव डॉ डी के बग्गा, प्रो एसएन शर्मा, प्रो के एन सिंह, राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक डॉ प्रदीप लाखरे, डॉ राजेश टेलर, डॉ धर्मेंद्र मेहता, डॉ डी डी बेदिया, डॉ बी के आंजना, डॉ संदीप तिवारी, डॉ राज बोरिया, डॉ संग्राम भूषण, डॉ वीरेंद्र चावरे, श्री कमल जोशी, श्री राजू यादव, श्री जसवंत आंजना, श्री दीपक दुबे, श्री योगेश शर्मा, श्री शरद दुबे, श्री विपुल मईवाल, श्री संजीव सिंह आदि सहित अनेक शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।
संचालन विक्रम विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ सत्येंद्र किशोर मिश्रा ने किया और आभार प्रदर्शन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ रमण सोलंकी ने किया। सम्राट विक्रमादित्य के मूर्ति शिल्प के समक्ष स्वस्तिवाचन डॉ महेंद्र पंड्या एवं डॉ गोपाल शुक्ल ने किया। आयोजन में शिक्षाविद, शोधार्थियों एवं राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
 
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