समाचार
|| महाअभियान के तहत 16 हजार 806 लोगों ने लगवाया कोविड टीका || महाविद्यालय में वैक्सीनेशन कार्यक्रम आयोजित || मुख्यमंत्री श्री चौहान का दौरा कार्यक्रम || हेलिकॉप्टर क्रेश में जिले के जवान श्री जितेंद्र कुमार वर्मा का दुखद निधन || मंत्री गोपाल भार्गव आज जिले के भ्रमण पर || “भारत ने खो दिया एक हीरो” मुख्यमंत्री श्री चौहान ने हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सीडीएस श्री बिपिन रावत और अन्य लोगों के निधन पर दु:ख व्यक्त || केन्द्रीय मंत्री-मंडल ने केन-बेतवा नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजना को दी मंजूरी || राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक सर्वेक्षण में पीएचसी वीरपुरडेम प्रथम || एक दिवसीय लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम विषयक || जिले में आज कोई भी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला
अन्य ख़बरें
मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जरूरी- न्यायाधीश
ग्राम मदाना में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन
शाजापुर | 24-अक्तूबर-2021
"आजादी का अमृत महोत्सव” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में एवं सचिव श्री राजेन्द्र देवड़ा की अध्यक्षता में ग्राम मदाना में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम की शुरूआत प्राधिकरण सचिव श्री राजेन्द्र देवड़ा द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर की गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव श्री देवड़ा ने कहा कि हर नागरिक को देश के प्रतीक चिन्ह और राष्ट्रगान का आदर व सम्मान करना चाहिए। मौलिक अधिकारों के हनन पर कानून की मदद लें, देश की सम्पत्ति को अपनी संपत्ति समझना एवं उसके रखरखाव तथा उसकी सुरक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इस जागरूकता शिविर का उद्देश्य लोगों को संविधान द्वारा प्रदत्त उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए नारा व निबंध लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। सभी नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों कर्तव्यों जानकारी होनी चाहिए। सभी पढ़े-लिखे लोगों को भारतीय संविधान की प्रस्तावना की जान का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाल श्रम एक गंभीर अपराध है। बाल श्रम करवाने के दोषी को हो सकती है कैद। साथ ही उन्होंने बाल श्रम प्रतिबंध एवं विनियमन अधिनियम 1986, बच्चों कानूनी सेवाएं नालसा योजना 2015 पास्को अधिनियम 2012 तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि 14 वर्ष तक के बच्चों से बाल श्रम करवाना कानूनी अपराध है। संशोधन के बाद यह कानून 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों द्वारा खानों तथा जोखिम भरे काम करने पर पाबंदी लगाता है। बाल श्रम करवाने के दोषी को छह माह से दो वर्ष तक की कैद व 20 हजार से 50 हजार रूपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। बच्चों का कल्याण, मुफ्त कानूनी सहायता पाने का, गरिमा का समानता का शोषण के विरुद्ध सुनवाई का सुरक्षा का, पुनर्वास योजनाओं का लाभ पाने का अधिकार प्राप्त है। बच्चों को बाल श्रम के साथ-साथ बाल विवाह व यौन अपराधों के खिलाफ भी कार्यवाही कराने का अधिकार प्राप्त है।
शिविर में उपस्थित न्यायाधीश श्री प्रवीण शिवहरे द्वारा अपने उद्बोधन में मानसिक रूप से व्यथित व्यक्तियों को सामान्य व्यक्तियों के समान विधिक अधिकार पर प्रकाश डाला तथा कहा कि यह एक बीमारी होती है, जो उपचार योग्य है। मानसिक रूप से व्यथित व्यक्तियों के परिवारीजन को उनके प्रति सद्भावना और सेवा की भावना रखते हुए उनका ध्यान रखना चाहिए। योग्य चिकित्सकों के मार्गदर्शन में उपचार कराने से उनकी व्यथा निवादित हो सकती है। मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों को सभ्य समाज में अलग-थलग न करके उन्हें पूरा स्नेह और सम्मान देने पर बल देते हुए युवाओं और बुजुर्गों को सामंजस्यपूर्वक मानसिक अस्वस्थ व्यक्तियों की सेवा करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों को स्नेह की दृष्टि से देखने तथा उनकी जान माल और संपत्ति की रक्षा के लिए विधिक अधिकारों का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। आगे उन्होंने मध्यस्थता के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य प्रकरणों का निराकरण करवा सकते हैं। मध्यस्थता में दोनों पक्षों को समानता के आधार पर सुना जाता है एवं उनके मतभेदों को दूर कर आपसी सामंजस्य से प्रकरण का निराकरण करवाया जाता है। मध्यस्थता में न किसी व्यक्ति की हार होती है और न जीत होती है क्योंकि मध्यस्थता विवादों के निराकरण का अच्छा माध्यम है, जिसमें दोनों पक्षों को समान रूप से सुलभ न्याय की प्राप्ति होती है। अंत में उनके द्वारा नेशनल लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों के निराकरण करवाने पर होने वाले लाभों से अवगत कराया एवं लोक अदालत के सफल आयोजन में पूर्ण सहयोग एवं अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के प्रयास करने हेतु आवश्स्त किया।
इस अवसर पर ग्राम के सरपंच, सचिव, पैरालीगल वॉलेंटियर्स सहित 60 से अधिक ग्रामीणजन उपस्थित थे।
(45 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
नवम्बरदिसम्बर 2021जनवरी
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
293012345
6789101112
13141516171819
20212223242526
272829303112
3456789

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer