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कड़कनाथ से मिलेगा पोषण और खुशहाली आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में दी जा रही कुक्कुट इकाई (जनजातीय गौरव दिवस पर विशेष)
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सतना | 12-नवम्बर-2021
 
    राज्य सरकार विकास की मुख्यधारा में पिछड़े जनजाति वर्ग के लोगों के जीवन स्तर में सुधार, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं स्व-रोजगार के अवसर मुहैया कराने कृत-संकल्पित है। सतना जिले के उचेहरा विकासखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में कड़कनाथ कुकुट योजना के तहत नवाचार किया जा रहा है।
    कड़कनाथ कुक्कुट पालन योजना के नवाचार के तहत उचेहरा विकासखंड के आदिवासी बाहुल्य ग्रामों गोबरांव खुर्द, गोबरांव कला, पिथौराबाद, धनेह, जिगनहट, बांधी, मौहार और नरहटी में आदिवासी वर्ग की महिलाओं को 30 कड़कनाथ कुक्कुट इकाई वितरित की गई हैं। उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ प्रमोद शर्मा बताते हैं कि आदिवासी वर्ग की महिलाएं सुरक्षित रूप से मुर्गी पालन कर सकती हैं। इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए आदिवासी बाहुल्य ग्रामों की महिलाओं को प्रति हितग्राही 28 दिनों के 40-40 कड़कनाथ मुर्गी के चूजे प्रदाय किए गए हैं। एक इकाई में इन 40 चूजों को खिलाने के लिए 30 दिवस का उच्च गुणवत्ता युक्त कड़कनाथ कुक्कुट आहार (58 किलोग्राम) भी दिया गया है। आमतौर पर माना जाता है कि आदिवासी परिवारों में बहुधा पोषण की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देने से छोटे बच्चे कुपोषण का भी शिकार हो जाते हैं। कड़कनाथ कुक्कुट पालन से कुपोषण भी दूर करने में मदद मिलेगी और आदिवासी परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।
    योजना की लाभान्वित धनेह ग्राम की रुमी कोल बताती है कि इनका परिवार पहले भी मुर्गी और बकरियां पालता रहा है। लेकिन इस बार सरकार की तरफ से कड़कनाथ के चूजें और 30 दिन का कुक्कुट आहार भी मुफ्त मिला है। अपने दैनिक जीवन के कामकाज के साथ ही मुर्गी पालन व्यवसाय करना कोई मुश्किल का काम नहीं है।
     डॉक्टर शर्मा ने बताया कि कड़कनाथ मुर्गे को काला मासी भी कहते हैं। इसकी त्वचा और पंखों से लेकर मांस तक का रंग काला होता है। सफेद चिकन के मुकाबले इसमें कॉलेस्ट्रॉल का स्तर काफी कम होता है। फैट की मात्रा कम होने से हृदय और डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है।
महंगा बिकता है अण्डा और मांस
   इस प्रजाति के मुर्गी के अंडे अन्य मुर्गियों के अंडों की तुलना में काफी महंगे होते हैं। इसका एक अंडा लगभग 30 रूपये तक बिकता है और एक कड़कनाथ मुर्गे की कीमत बाजार में 900 से 1100 रूपये प्रति किलो के लगभग होती है। जबकि मुर्गी की कीमत इससे भी तीन गुना से अधिक होती है। कड़कनाथ का एक चूजा तीने महीने की अवधि में लगभग डेढ़ किलोग्राम वजन का हो जाता है।
प्रस्तुति
राजेश सिंह
सहायक सूचना अधिकारी
(17 days ago)
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