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महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित
नारी की उन्नति और अवनति पर ही राष्ट्र की उन्नति एवं अवनति निर्भर है - जिला न्यायाधीश श्री सोनिया
सीधी | 12-नवम्बर-2021
    राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली तथा म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला न्यायाधीश श्री अमिताभ मिश्र के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत  12 नवंबर को जनपद पंचायत सभागार में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का विषय विधिक जागरूकता द्वारा महिलाओं का सशक्तिकरण रहा एवं यह कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला आयोग, महिला एवं बाल विकास कार्यालय तथा कन्या महाविद्यालय के संयुक्त समन्वय से आयोजित किया गया।
     कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री देवीलाल सोनिया ने  कहा कि नारी की उन्नति और अवनति पर ही राष्ट्र की उन्नति एवं अवनति निर्भर है। प्रत्येक महिला निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की पात्र है और यह सहायता जिला न्यायालय के साथ उच्च न्यायालय में उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति तथा उच्चतम न्यायालय में उच्चतम न्यायालय विधिक सेवा समिति के माध्यम से प्राप्त होती है। श्री सोनिया ने महिलाओं के विशेष अधिकारों के अंतर्गत लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे विरूद्ध लैंगिक उत्पीड़न या लैंगिक व्यवसाय में शोषण या लैंगिक शोषण करने के लिए उकसाना अथवा धमकी देना या लैंगिक शोषण के आशय से बच्चों को स्पर्श करना या बच्चे को सीधे अथवा इलेक्ट्रानिक माध्यम से देखना आदि अपराध की परिभाषा में सम्मिलित है एवं इस अधिनियम के अंतर्गत लैंगिक अपराध के लिए गंभीर दंड दिये जाते हैं। श्री सोनिया ने जन्म पूर्व निदान तकनीक का दुरूपयोग अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि कन्या भू्रण हत्या अपराध है जिसमें सहायता करने वाले भी सजा के पात्र होते हैं।
    अधिवक्ता श्रीमती निशा सक्सेना ने कोविड-19 के कारण ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता या संरक्षक का निधन कोविड-19 के कारण हो गया है, उनके लिए शासन द्वारा संचालित योजना की जानकारी दी। अधिवक्ता श्रीमती मनीषा सोनी ने दहेज प्रतिषेध अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दहेज एक अभिशाप है और दहेज लेना एवं देना दोनों अपराध की श्रेणी में आते हैं। कन्या महाविद्यालय सीधी की प्रोफेसर ज्योति अलूने ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि घर में महिलाओं के विरूद्ध शारीरिक हिंसा, मौखिक या भावनात्मक हिंसा, लैंगिक हिंसा, आर्थिक हिंसा से महिलाओं का संरक्षण होता है और इस अधिनियम में न्यायालय द्वारा महिलाओं के पक्ष में संरक्षण आदेश, निवास आदेश, अभिरक्षा आदेश, प्रतिकर आदेश आदि पारित किये जाते हैं।
      कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक अधिकारी अमित शर्मा के द्वारा किया गया। शिविर में कन्या महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार साहू, प्रोफेसर प्रतिमा कौल तथा महिला बाल विकास कार्यालय से सुपरवाईजर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समस्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं कन्या महाविद्यालय की छात्राओं  द्वारा सहभागिता की गई।
 
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