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जनजाति गौरव दिवस पर गौशाला का संचालन कर आत्मनिर्भर बनी स्व सहायता समूह की आदिवासी महिलाएं"(खुशियों की दास्तां)"
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सतना | 12-नवम्बर-2021
    प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं सभी वर्ग के हितग्राहियों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। विकासखंड रामपुर बघेलान अंतर्गत ग्राम पंचायत गाडा की वैष्णवी आजीविका स्व-सहायता समूह की आदिवासी महिलायें गौ सेवा एवं गौ संवर्धन तथा आत्म निर्भरता के अनूठे प्रयोंगो से स्वाबलंबी बनने की दिशा में अग्रसर हैं। समूह की सदस्य शीला ने बताया कि 14 आदिवासी महिलाओं ने मिलकर वैष्णवी आजीविका स्व-सहायता समूह बनाया, जो मध्यप्रदेश आजीविका मिशन से पंजीकृत है। वैष्णवी आजीविका स्व-सहायता समूह को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायत गाडा में निर्मित 100 गौवंश की क्षमता का सर्व-सुविधा युक्त गौशाला संचालन हेतु दिया गया। साथ ही 11 एकड़ क्षेत्रफल का तालाब एवं चारागाह के लिए जमीन भी दी गई। जिसमें वैष्णवी आजीविका स्व-सहायता समूह द्वारा शासन से मिलने वाली राशि की मदद से गौ सेवा का कार्य किया जा रहा है।
  मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गौ माता के भोजन के लिए प्रतिदिन प्रति गोवंश 20 रूपये दिये जाते है। जिसमें बेसहारा गौवंश को आश्रय दिया जाता है तथा समूह द्वारा गौ संवर्धन हेतु गिर, साहिवाल नस्ल के नंदी बाहर से मंगवाए गए हैं। जिनसे किसानों के गौ तथा गौशाला में नस्ल सुधार का कार्य भी किया जाता है। वैष्णवी आजीविका स्व-सहायता समूह नें आत्मनिर्भर बनने का आधार गौ वंश का गोबर एवं गौमूत्र को बनाया है। गौशाला में जहां गौ सेवा का कार्य होता है, वहीं गोबर से आदिवासी समूह की महिलाओं द्वारा केंचुआ खाद तथा गौ मूत्र से अर्क एवं खेती की दवाईयां बनाने का कार्य होता है।
    वैष्णवी आजीविका स्व-सहायता समूह की आदिवासी महिलाओं द्वारा गौ सेवा, नस्ल सुधार के साथ-साथ गौ वंश को बढ़ावा देने के लिए आजीविका गौ वंश गोबर खरीदी केंद्र स्थापित किया गया है। जहां डेढ़ रुपए प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जाता है। गौशाला के गोबर एवं खरीदे गए गोबर में जैव कचरा, सूखे पत्ते, बचा हुआ भूसा तथा धान का पैरा मिलाकर केंचुआ खाद बनाने का कार्य किया जाता है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गौ शाला में निर्मित केचुआ खाद 450 रूपये प्रति क्विंटल की दर से कृषकों को बेचा जाता है।
    गौ शाला के संचालन से समूह की आदिवासी महिलाएं पर्याप्त आय अर्जित कर रही हैं। दैनिक जीवन के खर्च अच्छी तरह से चलाने के बाद बचत के पैसों से समूह द्वारा गौशाला के चारागाह की भूमि पर में तार-बाड़ी का कार्य भी कराया गया है। साथ ही चारागाह की सिंचाई के लिए मोटर पंप तथा चारा काटने के लिए कटिया मशीन खरीदी गई है। स्व-सहायता समूह की आदिवासी महिलाओं ने गौशाला में मशरूम (बटन एवं ओयस्टर) की खेती की तैयारी पूरी कर ली है।
   स्व-सहायता समूह की मार्गदर्शिका श्रीमती साधना तिवारी बताती हैं कि बाजार में बटन मशरूम 250 रूपये एवं ओयस्टर मशरूम 150 रूपये प्रति किलोग्राम बिकता है। इससे स्व-सहायता की समूह की महिलाओं को 50 से 60 हजार रूपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त होगा एवं अन्य किसानो को भी जागरुक कर मशरुम खरीदी केन्द्र स्थापित करने में मदद मिलेगी। वैष्णवी आजीविका स्व-सहायता समूह की आदिवासी महिलाओं ने गौ शाला संचालन के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा प्रदेश सरकार को हृदय से कोटि-कोटि धन्यवाद दिया है।
प्रस्तुतिः-समयलाल पाण्डेय
सोशल मीडिया हैंडलर
सतना
(17 days ago)
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