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कलेक्टर श्री खान ने जिले वासियों से नरवाई नहीं जलाने की अपील की
नरवाई जलाने से स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर पड़ते हैं दुष्प्रभाव
सीधी | 15-नवम्बर-2021
    फसल काटने के उपरांत खेत में बचे ठुंठे एवं डंठल जिसे सामान्य भाषा में नरवाई कहते है, को सीधी जिले में जलाये जाने की सूचनाएं प्राप्त हो रही है, जिसके कारण वायु प्रदूषण एवं पर्यावरणीय असंतुलन की समस्याएं परिलक्षित हो रही है। धानध्गेहॅू की कटाई के पश्चात् नरवाई को जलाने से मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिसमें आंखों में खुजली, श्वास संबंधी बीमारी, ब्रोनकाइटिस, अस्थमा होने का कारण बनती है। साथ ही नरवाई जलाने से पर्यावरणीय पारिस्थितिक तंत्र जिसमें पशु-पक्षी एवं भूमि में रहने वाले अतिसूक्ष्म जीव जो कि कृषि के लिए भूमि को उर्वरा शक्ति प्रदान करने में सहायक होते हैं उनका नुकसान होता है एवं धुंआ उत्पन्न होने के कारण सड़क पर अदृश्यता की स्थिति निर्मित होने से दुर्घटना का कारण बन सकती है। नरवाई जलाने से निकट के आबादी के क्षेत्र में आग लगने से सम्पत्ति को नुकसान होन की घटनाएं भी होती है। 
     उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर एवं मुजीबुर्रहमान खान द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 30  में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जन सामान्य के हित, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, पर्यावरण की हानि को रोकने एवं लोक व्यवस्था बनायें रखने हेतु दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत जिले की सीमा में गेंहूध्धान एवं अन्य फसलों के डंठलो (नरवाई) में आग लगाये जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश शासन, पर्यावरण विभाग के पत्र दिनांक 15 मई 2017 एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 19(1) के अन्तर्गत जारी अधिसूचना दिनांक 09 मार्च 1988 के माध्यम से वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिसूचना 1981 के प्रावधानों के अनुपालन हेतु सम्पूर्ण जिले को वायु प्रदूषण नियंत्रण हेतु अधिसूचित किया गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जुर्माने का किया है प्रावधान

   राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशानुसार किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था को उपरोक्त निर्देशों का उल्लंघन करते पाये जाने पर पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई करनी होगी। छोटे भूमि मालिक जिनकी भूमि का क्षेत्र 2 एकड़ से कम है, पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में 2 हजार 5 सौ रूपये प्रति घटना देना होगें। छोटे भूमि मालिक जिनकी भूमि का क्षेत्र 2 एकड़ से अधिक व 5 एकड़ से कम है, को पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में 5 हजार रूपये प्रति घटना देना होगें। छोटे भूमि मालिक जिनकी भूमि का क्षेत्र 5 एकड़ से अधिक है, को पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में 15 हजार रूपये प्रति घटना देना होगें।  
   कलेक्टर द्वारा नरवाई न जलाने हेतु आमजन से सहयोग की अपील की गई है।
(64 days ago)
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