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रबी फसलों में संतुलित उर्वरको के पोषक तत्वों का उचित प्रबंधन हेतु कृषको को सलाह दे - कलेक्टर श्री पुष्प
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अलिराजपुर | 16-नवम्बर-2021
   जिले के कृषकों को उचित पोषक प्रबंधन हेतु सलाह देने के निर्देश  कलेक्टर श्री मनोज पुष्प ने कृषि अधिकारी को दिए। कृषि विज्ञान केन्द्र एवं किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा बताया की गेहूँ में 120 किलोगा्रम नत्रजन, 60 किलोगा्रम फास्फोरस एवं 40 किलोगा्रम पोटाष प्रति हेक्टेयर होना चाहिए। इनकी पूर्ति हेतु एनपीके 12:32:16 के 03 बेग एवं 30 किलोगा्रम(कुल 180 किलोगा्रम), एमओपी 17 किलोगा्रम, यूरिया 5 बेग एवं 16 किलोगा्रम (कुल 166 किलोगा्रम यूरिया )से की जा सकती  है। गेहूँ के बीज को 10 गा्रम एजोटोबैक्टर प्रति किलों बीज से बीजो को उपचार करके बुवाई करने से नाइट्रोजन की पूर्ति होती है।
   इस तरह  चना मसूर एवं अन्य दलहनी फसलों में 20 किलो नत्रजन, 60 किलो फास्फोरस एवं 20 किलो पोटाष प्रति हेक्टेयर चाहिए इसकी पूर्ति एन.पी.के 12:32:16 के 4 बेग से की जा सकती है। दलहनी फसलों को फसल विशेष को ध्याना में रखते हुए राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना चाहिए। सरसों, अलसी,तारामीरा जैसी तिलहनी फसलों में एस.एस.पी. के 05 बेग एवं 30 किलोग्राम खाद देने पर फास्फोरस के साथ ही सल्फर तत्व की पूर्ति होती है। नत्रजन की पूर्ति यूरिया के 4 बेग एवं पोटाष की पूर्ति म्यूरेट ऑफ पोटाष के 01 बैग से की जा सकती है। सभी फसलों में फास्फोरस की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु 10 ग्राम पी.एस.बी. कल्चर प्रति किलो बीज को उपचारित करके बुवाई करनी चाहिए। सरसों की बुवाई में डी.ए.पी की बजाय एस.एस.पी (उर्वरक) का उपयोग करें। क्योकि डी.ए.पी. के 01 बैग में फसस्फोरस 23 किलो व नाइट्रोजन 09 किलोग्राम होता है तथा किमत 1200 रूपये, जबकि 03 बैग एस.एस.पी व 01 बैग यूरिया की किमत 1166 आती है एवं 24 किलो फास्फोरस,24 किलो नाइट्रोजन तथा 16.5 किलो सल्फर होता है जो सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने का काम करता है। अत: तत्वों की मात्रा व रूपये में दोनो में ही फायदा का सौदा है।
   कृषि अधिकारी ने सभी कृषकों से आग्रह किया कि मृदा परीक्षण के आधार पर एवं वैज्ञानिक अनुशंसा अनुसार संतुलित तत्वों को उपयोग करें तथा रबी सीजन में लगने वाली यूरिया खाद की पूरी मात्रा एक साथ न खरीद कर फसलों में समय समय पर लगने वाली आवश्यकता अनुसार खाद खरीदें।
 
(68 days ago)
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