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हम अपने उसूलों पर दृण रहे ताकि हम अपने जीवन के चरण और परम उपलब्धि को प्राप्त कर सकें -पूज्य मुनि प्रमाण सागर जी महाराज
केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री पटेल ने आचार्य श्री के दर्शन कर आर्शीवाद प्राप्त किया
दमोह | 21-नवम्बर-2021
            केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं जलशक्ति राज्यमंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटैल ने कहा  कुण्डलपुर में परम पूज्य आचार्य श्री के आदेश से फरवरी मे मंगल कार्यक्रम होने वाला है, पूज्य मुनि प्रमाण सागर जी से वहा का सांसद होने के नाते दोनो हाथ जोड़ कर आप से प्रार्थना करता हुँ, आप सभी के साथ कुण्डलपुर पधारे ताकि आप के चरण धोने का अवसर प्राप्त हो। उन्होंने कहा आप एक बहुत लंबी यात्रा कर के जबलपुर से यहां पहुचे है, मेरी यही प्रार्थना होगी और ये प्राथना आर्चाय श्री के चरणों मे भी हैं कि वो आप को आदेशित करे जिससे की आप कुण्डलपुर पधारे। बहुत जल्द आप ने शंका समाधान मे फिर से प्रश्न पूछने का अवसर दिया, जबलपुर मे शंका समाधान मे प्रश्न पूछने का अवसर मिला था। ज्ञात हो कि मंत्री श्री पटेल संवेद शिखर जी दर्शन हेतु पहुँचे थे।
            उन्होने कहा ऐसे अवसर देवीय कृपा या आप लोगो की कृपा के बिना संभव नही है, जीवन मे मैने कभी सोचा नहीं था कि दमोह का सांसद बनूगां, लेकिन दूसरी बार में दमोह से सांसद और केन्द्रीय मंत्री हूँ। इसी समय कुण्डलपुर के उस महान कार्य की पूर्णाहूती हुई है जिसे हम सब भी आकर उसे देखेंगे। महाराज जी की दृश्यता होगी, उनका स्नेह और आशीर्वाद भी रहा है। श्री पटेल ने कहा उन्हें थोड़ा समय नहीं बल्कि लगभग 32 से 33 वर्ष हो गए हैं, तब वे भी नौजवान थे, उनकी उम्र भी साडे़ 28 साल की थी, जब मैने महाराज जी के पहली बार सिवनी में महराज जी के दर्शन किए और उन्हें प्रणाम किया था, उस दिन से लेकर लगातार हमसे ज्यादा आप लोगों को सत्संग का अवसर मिला है।
            केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा महराज जी ने जब भी प्रवचन में जो भी बातें कहीं उन बातों ने नौजवान को भी आंदोलित किया, जो परम गृहस्तता थे उनको भी ताकत दी और जो बैराग्य के रास्ते पर जा रहा था वह भी गतिमान हुआ। उन्होंने कहा वे 28 साल से 62 साल का हो गया हूँ लेकिन यह कह सकता हूं यदि यह धर्म का आलम्बन ना हो, तो पथ छूटने में बहुत देर ही नहीं लगती।
            केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री पटैल ने कहा राजनीति के क्षेत्र में दो दुविधाएं बड़ी होती है, दोनों के बीच में तालमेल बिठाने की जरूरत नहीं है, अगर हम समाज की दृष्टि से और नैतिक मूल्यों की दृष्टि से देखते हैं तो यह समाज की व्यवस्था है। हमारी अपनी व्यवस्था सदाचार की व्यवस्था है, अगर वो सध जाएगी तो अपने जीवन में नैतिक बने रह सकते हो कोई कठिन कार्य नहीं है। महाराज जी से प्रश्न करते हुए केन्द्रीय राज्यमंत्री ने कहा लोग जो भटकाव में आते हैं, इन भटकाओं को रोकने के तरीके आप हमको बार-बार बताते हैं और उसके बाद भी व्यक्ति भटकता जरूर है, अब हम उसको अपना प्रारब्ध माने या हम अपने विधियों की कमी माने इसलिए मेरा प्रश्न आपसे यही है, इसको प्रारब्ध मानकर लापरवाही करें या विधियों को कढ़ाई के साथ आहार के संयोजन के साथ पूरा करें, आपका मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिले यही मेरा प्रश्न है।
            आचार्य श्री ने थोड़े ही समय में प्रहलाद जी ने अपना निवेदन, भाव और प्रश्न सब प्रकट कर दिए यह इनकी प्रतिभा का परिचय है और इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि ये अपने काम कितनी कुशलता से संपादित कर सकते हैं। आचार्य श्री ने कहा यह प्रहलाद जी की भी शुरुआत थी और हमारी भी शुरूआत थी, वह अपनी दिशा में आगे बढ़ते रहें और हम अपनी दिशा में आगे बढ़ते रहे।
             उन्होने कहा प्रहलाद जी एक राजनेता नहीं बल्कि एक राजनीतिक संत के रूप में जीने वाले व्यक्ति हैं। इन्होंने कई बातें मुझसे शेयर भी की है, कभी अपने सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं किया, उसके लिए इनको कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन वे दृणता के साथ उन समस्या में जूझते रहे, थोड़ा भी समझौता नहीं किया। आचार्य श्री ने कहा उनका मानना है जो मनुष्य अपने उसूलों पर दृण रहता है, वही उपलब्धियों के मुकाम तक पहुंचता है। हमें चाहिए कि हम अपने उसूलों पर दृण रहे ताकि हम अपने जीवन के चरण और परम उपलब्धि को प्राप्त कर सकें।
 
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