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आयरन अल्पता एनीमिया दिवस आयोजित
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बैतूल | 26-नवम्बर-2021
    राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत एनीमिया की व्यापकता को प्रभावी रूप से कम करने हेतु एक बहुआयामी रणनीति एनीमिया मुक्त भारत संचालित की जा रही है। शुक्रवार 26 नवम्बर को आयरन अल्पता एनीमिया दिवस एवं 26 नवम्बर से 2 दिसम्बर 2021 के मध्य आयरन अल्पता एनीमिया सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों पर आयरन अल्पता एनीमिया दिवस का आयोजन किया गया।
   मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ए.के. तिवारी ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थाओं एवं विद्यालयों में एनीमिया से संबंधित जानकारी प्रदाय की जाकर आयरन युक्त आहार से संबंधित शपथ ग्रहण करवाई गयी। शुक्रवार 26 नवम्बर को शहरी क्षेत्र बैतूल में शासकीय प्राथमिक शाला मालवीय वार्ड (पटेल स्कूल) में जिला स्वास्थ्य सूचना शिक्षा संचार ब्यूरो के अधिकारियों द्वारा छात्र-छात्राओं को जानकारी प्रदाय की गई एवं शपथ दिलायी गई। उन्होंने बताया कि जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है तो इसे एनीमिया कहा जाता है। एनीमिया के लक्षणों में थकान, सांस फूलना, दैनिक कार्यों में थकावट, सिर में दर्द, पैरों में सूजन, ध्यान और एकाग्रता में कमी एवं आंखों के नीचे और जीभ का पीलापन दिखाई देते हैं। एनीमिया होने के प्रमुख कारणों में आयरन युक्त भोजन जैसे-दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां और गुड़ आदि का सेवन न करना, आयरन युक्त भोजन का सेवन न करने, पेट में कीड़े होना, आयु के अनुसार शरीर की आवश्यकता बढऩा, गर्भावस्था एवं मासिक रक्तस्राव अधिक होना सम्मिलित है।
   एनीमिया के बचाव के उपायों में 6 माह से 5 वर्ष के बच्चों को आयरन सिरप एक एम.एल. सप्ताह में दो बार, 5 से 10 वर्ष के बच्चों को आयरन की गुलाबी गोली सप्ताह में एक बार, 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियों को आयरन की नीली गोली सप्ताह में एक बार एवं सभी गर्भवती एवं धात्री माताओं को हीमोग्लोबिन के स्तर के अनुसार आयरन की लाल गोली लेना चाहिये। आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरण के लाभों में कार्यक्षमता एवं एकाग्रता में वृद्धि, बच्चों की आयु अनुसार वृद्धि एवं विकास में सहायता, मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन स्तर सही होने से स्वस्थ शिशु का जन्म, रोग प्रतिरोधक क्षमता का बढऩा एवं संक्रमण से बचाव सम्मिलित है।
 
(62 days ago)
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