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मुख्यमंत्री श्री चौहान ने महात्मा फुले को पुण्य-तिथि पर किया नमन
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उमरिया | 29-नवम्बर-2021
    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास सभा कक्ष में महात्मा फुले की पुण्य-तिथि पर उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले के योगदान का स्मरण किया।
महात्मा फुले का परिचय
    महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए फूलों के काम में लगे ये लोग श्फुलेश् के नाम से जाने जाते थे। महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले भारतीय समाज-सुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें महात्मा फुले एवं ज्योतिबा या जोतिबा फुले के नाम से भी जाना जाता है। निर्धन तथा निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए ज्योतिबा ने श्सत्यशोधक समाजश् वर्ष 1873 में स्थापित किया था। उनकी समाजसेवा देखकर वर्ष 1888 में मुंबई की एक विशाल सभा में उन्हें श्महात्माश् की उपाधि दी गई। महात्मा फुले ने महिलाओं और दलितों के उत्थान के लिये अनेक कार्य किए। वे समाज के सभी वर्गों को शिक्षा प्रदान करने के प्रबल समर्थक थे। वे भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और भेदभाव के विरुद्ध थे।
    महात्मा ज्योतिराव फुले बाल विवाह के विरोधी थे। जबकि विधवा विवाह को उन्होंने समर्थन दिया। वे समाज को कुप्रथाओं और अंधश्रद्धा के जाल से मुक्त करना चाहते थे। अपना सम्पूर्ण जीवन उन्होंने स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में व्यतीत किया। महात्मा फुले महिलाओं को स्त्री-पुरुष भेदभाव से बचाना चाहते थे। उन्होंने कन्याओं के लिए भारत में पहली पाठशाला पुणे में स्थापित की। स्त्रियों की तत्कालीन दयनीय स्थिति से फुले बहुत व्याकुल और दुखी होते थे। इसीलिए उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि वे समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाकर ही रहेंगे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्री बाई फुले को स्वयं शिक्षा प्रदान की। सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका थीं। ज्योतिराव फुले का निधन 28 नवम्बर 1890 को पुणे में हुआ।

 
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