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किसान भाईनरवाई बिल्कुल न जलाएं नरवाई का उपयोग खाद एवं भूसा बनाने में करें
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राजगढ़ | 29-नवम्बर-2021
 
    वर्तमान समय में भारतीय कृषि की प्रमुख समस्या बढ़ती हुई जनसंख्या की उदर पूर्ति के साथ-साथ पर्यावरण सुरक्षा भी एक प्रमुख बिन्दु है। गेहूं को मुख्य फसल के रूप में उगाया जाता है। वर्तमान परिस्थितियों में जबकि कृषि में श्रमिकों की कमी एक प्रमुख समस्या है। कृषकों द्वारा कटाई के लिए मशीनों (कम्बाईन हार्वेस्टर एवं रीपर आदि) का प्रयोग बहुतायत में किया जाने लगा है। परिणाम स्वरूप कटाई के उपरांत खेतों में दाने के अतिरिक्त काफी मात्रा में फसल अवशेष रह जाते है। किसान भाई गेहूं की फसल काटने के पश्चात जो तने के अवशेष बचे रहते है। उन्हें नरवाई कहते है। यह देखा गया है कि किसान फसल काटने के पश्चात इस नरवाई में आग लगाकर उसे नष्ट करते है।
   उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री हरीष मालवीय ने बताया कि पर्यावरण विभाग द्वारा नरवाई में आग लगाने की घटनाओं को प्रतिबंधित करने दंड अधिरोपित करने का प्रावधान किया है।कृषक भाई उपलब्ध फसल अवशेषों को जलाने की बजाए उनको वापस भूमि में मिला देते है तो निम्न लाभ प्राप्त होते है। जैसे कि कार्बनिक पदार्थ की उपलब्धता में वृद्धि, पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि, मृदा भौतिक गुणों के सुधार होते है, फसल उत्पादकता में वृद्धि अतः किसानों से अपील है कि खेतो में नरवाई बिल्कुल न जलाएं नरवाई का उपयोग खाद एवं भूसा बनाने में करें।
   उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य पर्यावरण एवं फसल उत्पादकता को दृष्टिगत रखते हुए फसल अवशेषें को जलाने के बजाए भूमि में मिला देने से काफी लाभ होता है। फसल अवशेंषो से प्राप्त कार्बनिक पदार्थ भूमि में जाकर मृदा पर्यावरण में सुधार कर सूक्ष्मजीवी अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करता है। जिससे कृषि टिकाऊ रहने के साथ-साथ उत्पादन में वृद्धि प्राप्त की जा सकती है। कंबाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मेनेजमेंट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर प्रयोग अनिवार्य रूप से करे स्ट्रा रीपर यंत्र डंठलों को काटकर भूसे में बदले देता है। अतः डंठलों को जलाने की जरूरत नही रह जाती है। इस प्रकार भूसे का उपयोग कृषक स्वयं के पषुओं को खिलाने के लिए तथा अतिरिक्त आय के साधन के रूप में भी कर सकता है।
 
(59 days ago)
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