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लोक अदालत में पक्षकारों को हर तरह से फायदा जिला एवं सत्र न्यायाधीश
नेशनल लोक अदालत में 284 मामलों का हुआ निराकरण, 1 करोड़ 62 लाख 68 हजार 945 के अवार्ड पारित
दतिया | 08-जुलाई-2017
 
  
   मिलजुल कर हो मामलों का अन्त यही है लोक अदालत का मूल मंत्र की परिकल्पना को सकार करते हुए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर क आदेशानुसार जिला न्यायाधीश श्रीमती सुनीता यादव के मार्गदर्शन में दतिया जिले में भी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। नेशनल लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ ए.डी.आर. भवन जिला न्यायालय के सभाकक्ष में सादेसमारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती सुनीता यादव द्वारा मॉ सरस्वती की प्रतिमा एवं राष्ट्रपिता महात्मागांधी के चित्र पर मल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती सुनीता यादव ने कहा कि मानव का स्वभाव है कि वह फायदा देखता है। अतः हमें चाहिए कि पक्षकारों को लोक अदालत के फायदे बताए ताकि वह अधिक से अधिक संख्या में प्रकरणों का निराकरण इसके माध्यम से कराये। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में हार जीत नहीं होती बल्कि श्रम और समय की बचत होती है। बैमनष्ता समाप्त हो जाती है किसी प्रकार की कटुता नहीं रहती है। यह बात उन्होंने लोक अदालत के शुभारंभ अवसर पर कही।
   कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश, श्री डी.के. श्रीवास्तव, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्री अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, प्रथम अपर जिला जज श्री हितेन्द्र द्विवेदी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटश्री निसार अहमद, रजिस्ट्रार/ सचिव श्री राकेश बंसल, न्यायिक मजिस्ट्रेटश्री राजीव राव गौतम, न्यायिक मजिस्ट्रेटश्रीमती रेखा मरकाम, न्यायिक मजिस्ट्रेट कु. मीनाक्षी शर्मा अध्यक्ष अधिवक्ता संघ श्री रामसहाय छिरौल्या सचिव अधिवक्ता श्री अनिल पालीवाल, विधिक सहायता अधिकारी श्री दीपक शर्मा, पूर्व अध्यक्ष कु श्री महिपाल सिंह, श्री राघवेन्द्र समाधिया अधिवक्ता श्री श्रीराम शर्मा, श्री मनोज सिंह चौहान, श्री मुकेश गुप्ता, श्री सलीम खान सहित विद्युत, बैंक, बीमा, नगरपालिका, एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी/ कर्मचारी, अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
   नेशनल लोक अदालात के समक्ष निराकरण हेतु लगभग 3000 प्रकरण प्रस्तुत किए गए जिनमें से कुल 284 प्रकरणों को निराकरण कर 1 करोड़ 62 लाख 68 हजार 945  की अवार्ड राशि द्वारा 429 व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया। नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना के 12 मामलों में 7025000 का अवार्ड पारित किया गया। न्यायालीन प्रकरणों में 04 सिविल मामलें 44 आपराधिक 32 मामले विद्युत विभाग के  लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया। विद्युत विभाग के 76 नगर पालिका के 57 बैंक के 18 प्रिलिटिगेंश मामलों का निराकरण किया गया। नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन में न्यायालय के सभी न्यायाधिकारियों, कर्मचारियों का सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआ तथा न्याय सबके लिए की अवधारण को भलिभॉति चरितार्थ करते हुए दतिया जिले में नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन मामलों को कम करने की दिशा में सार्थक रहा।
   राजकुमार कमरिया निवासी बुंदेला कॉलोनी के द्वारा भूपेन्द्र सिंह यादव निवासी ग्वालियर के विरूद्ध एक लाख पचास हजार राशि की वसूली हेतु एन.आई. एक्ट के अंतर्गत चैक बाउंस का मामला दिनांक 16.11.2016 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जिसमें आज उभयपक्ष को लोक अदालत खण्डपीठ क्रमांक 06 के पीठासीन अधिकारी श्री राकेश बंसल, सुलहकर्ता सदस्य श्री अनिल पालीवाल एवं श्री पंकज श्रीवास्तव तथा परिवादी अधिवक्ता श्री मुकेश गुप्ता द्वारा समझाईश दी जाने पर दोनों पक्षकारों के बीच समझौता करवाकर समझौता राशि परिवादी को प्रदाय की गई।  
   जिला मुख्यालय दतिया पर एसबीआई जनरल इंशोरेंश कंपनी लिमिलेड द्वारा मोटर दुर्घटना क्लेम दावा प्रकरणों में विशेष सहयोग प्रदान करते हुए 50 लाख रूपये के राजीनामा किए गए। बीमा कंपनियों के अभिभाषक श्री आर.के. सेठ द्वारा मोटर दुर्घटना के 10 क्लेम प्रकरणों में राजीनामा कराए जाकर लगभग 70 लाख रूपये की क्षतिपूर्ति दिलवाए जाने में सहयोग प्रदान किया गया।
   औरीना निवासी आरती ने छता के लोकेन्द्र अहिरवार के विरूद्ध वर्ष 2017 में, दतिया निवासी निशा ने झॉसी निवासी मुवीन के विरूद्ध वर्ष 2012 में एवं बिठाई दुरसड़ा निवासी रिंकी ने दुर्गापुर के जसवंत के विरूद्ध घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के अंतर्गत न्यायालय में मामलें प्रस्तुत किए थे। उपरोक्त तीनों मामलों में पीठासीन अधिकारी श्रीमती रेखा मरकाम, न्यायाधीश कु. मीनाक्षी शर्मा, सुलहकर्ता सदस्य श्री शाकिर खान एवं श्री इतरत अली जैदी व ए.डी.पी.ओ. श्री जितेन्द्र द्विवेदी की समझाइश पर आपसी समझौते से राजीनामा हुआ तथा उपरोक्त तीनों दम्पत्तियों को माननीय जिला न्यायाधीश श्रीमती सुनीता यादव द्वारा आपस में माला पहनवाकर न्यायालय से  सुखी दांपत्य जीवन की शुभकामनाओं के साथ विदा किया गया।
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