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सोयाबीन फसल के लिए कृषकों का उपयोगी सलाह
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अशोकनगर | 11-अगस्त-2017
 
   उप संचालक किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास श्री एस.एस.मरावी ने कृषकों को सलाह दी है कि वे अपने खेत में सोयाबीन की फसल का नियमित रूप से निरीक्षण करें एवं इल्लियां, कीट तथा बीमारी का प्रकोप होने पर संबंधित दवाओं का छिड़काव आवश्‍यक रूप से करें। उन्‍होंने सेमीलूपर इल्‍ली के नियंत्रण हेतु क्विनालफॉस (1.5ली/हे) अथवा इन्‍डोक्‍साकार्ब (500 मि.ली./हे)अथवा क्‍लोरएन्‍ट्रानिलिप्रोल (100 मि.ली./हे) की दर से 500 लीटर पानी के साथ छिडकाव करें। तम्‍बाकू की इल्‍ली का प्रकोप होने पर प्रारंभिक अवस्‍था में ही स्‍पाइनेटोरम 11.7 एस.सी. का 450 मि.ली./हेक्‍टेयर की दर से छिडकाव करें। पत्‍ती खाने वाली इल्लियो के साथ साथ रस चूसने वाले कीट( सफेद मक्‍खी) एवं गर्डल बीटल के नियंत्रण्‍हेतु पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासाफ्लूथ्रीन + इमिडाक्‍लोप्रीड का 350 मि.ली./हेक्‍टेयर की दर से छिडकाव करें। चक्रभृंग (गर्डल बीटल) के नियंत्रण हेतु ट्रायझोफॉस (800मि.ली/हे.) अथवा थायक्‍लोप्रीड (650मि.ली./हे) का छिडकाव करें तथा ग्रसित पौध अवशेषों को प्रारंभिक अवस्‍था में ही तोडकर निष्‍कासित करें। सोयाबीन की फसल पर पत्‍ती धब्‍बा नामक बीमारी दिखाई दें या पत्तियों की नोक की तरफ से झुलसी हुई प्रतीत होने पर कार्बेन्‍डाजिम (250ग्रा./हे) या थायोफिनेट मिथाईल(500ग्रा./हे.) का 500 लीटर पानी के साथ छिडकाव करें। सोयाबीन पौधो के तनों/डंठलों पर काले रंग के अनि‍यमित आकार के धब्‍बे दिखाई देने एवं पौधों के सबसे ऊपर वाली तीसरी पत्‍ती उलटकर पटली हुई दिखाई देने पर (एन्‍थ्रेकनोज/स्‍टेम ब्‍लाईट बीमारी) पर बीनोमिल(500ग्रा./हे.) या थायोफिनेट मिथाईल(500ग्रा./हे.) या टेब्‍युकोनाजोल 250 ई.सी.(625मि.ली./हे.) का छिडकाव करें। सोयाबीन की फसल में पीला मोजाइक बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए हेतु ग्रसित पौधे दिखने पर उन्‍हें तुरंत उखाड़कर नष्‍ट करें। अधिक वर्षा की स्थिति में अपने खेतों से अतिरिक्‍त पानी के निकासी की व्‍यवस्‍था  करें।
(345 days ago)
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