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नाबालिगों से रेप की सजा फांसी के निर्णय पर प्रतिक्रियाऐं
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उमरिया | 27-नवम्बर-2017
 
 
      मप्र शासन के कैबिनेट द्वारा 12 वर्ष या इससे कम उम्र की नाबालिगों से रेप करने पर फांसी देने के निर्णय के प्रति अधिवक्ता, पत्रकार, डाक्टर एवं आम जनों ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जहां एक ओर उल्लेखनीय निर्णय बताया है वहीं कतिपय लोगों ने मात्र सामूहिक गैंगरेप मे ही फांसी देने की सजा होने की बात कही है।
    जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री पुष्पराज सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि फांसी का निर्णय स्वागत योग्य है इससे जहां एक ओर ऐसे अपराध के प्रति भय व्याप्त होगा जिसके फलस्वरूप इस तरह के अपराधों में अंकुष लगेगा और लोगों मे कानून के प्रति भय भी बना रहेगा।  इस निर्णय को आजीवन कारावास मे बदलने का विचार भी किया जा सकता है।     
    नाबालिगों के साथ रेप के प्रकरणों में फांसी देने के निर्णय के लिए 28 वर्ष से लगातार वकालत कर रही 52 वर्षीय अधिवक्ता सुषमा अग्रवाल निवासी चंदिया ने कहा कि मप्र शासन का यह एक ऐतिहासिक फैसला पूरे देष के लिए संदेश देगा। उन्होंने कहा कि मासूम बेटियां जिनको दूर दूर तक रेप के सबंध में कोई ज्ञान नही है उनके लिए वह काला दिन होता है और बहुत सी बेटियां काल के गाल में समां जाती है। ऐसे दरिंदगों के लिए इससे अच्छा निर्णय और कुछ नही हो सकता।
    जिले के ताला बडखेरा निवासी 61 वर्षीय उमाशंकर मिश्रा ने इस निर्णय को तहे दिल से स्वागत करते हुए कहा है कि इसे जन जन तक पहुचाने के लिए विषेष अभियान की आवश्यकता है, ताकि इस कठोर निर्णय के प्रति सभी लोग जागरूक होकर रेप जैसे घृणित कृत्य कोई भी व्यक्ति सोच न सके।
    जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती शषि गौतम ने कहा कि 27 नवंबर को दैनिक उमरिया खबर मे प्रकाषित शीर्षक ''''नाबालिगों से रेप पर मिलेगी फांसी की सजा'''' मप्र कैबिनेट का फैसला जैसे ही पढ़ा उनके चेहरो में खुषी का ठिकाना नही रहा। इस बात की जानकारी अपने संगिनियो को भी दिया। उन्होंने मप्र सरकार के इस बडे एवं दूर दर्षी फैसले के लिए भूरि भूरि प्रषंसा की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से मनचलो के मंसूबे ध्वस्त होंगे और ऐसे कृत्य के प्रति बेसक लगाम लगेगा।
    इसी प्रकार 33 वर्षीय अधिवक्ता श्रीमती अर्चना भट्ट ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि रेप जैसे जघण्य अपराध के लिए किया गया निर्णय प्रदेश ही नही पूरे देश के लिए स्वीकार योग्य है। उन्होंने कहा कि समझकर जब ऐसा कृत्य किया जाता है वह  पशुवत श्रेणी का है। ऐसी ही प्रतिक्रिया कल्लू चौधरी, डाक्टर विनोद गुप्ता, दिव्य प्रकाश गौतम, नरेंद्र देव बगाड़िया, कुदरा निवासी सियाराम गोंड, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी सुश्री दिव्या गुप्ता सहित अन्य लोगों ने दिया है।
(236 days ago)
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