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आत्मनिर्भरता एवं भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा आवश्यक है
अनूपपुर शहर की छात्राओं ने दण्ड संहिता में किए गए सुधारों की सराहना की
अनुपपुर | 28-नवम्बर-2017
 
   
   महिलाओं को यौन उत्पीड़न एवं छेड़छाड़ जैसे अपराधों में न्याय दिलाने एवं असामाजिक तत्वों में इन अपराधों के प्रति दण्ड के भय से प्रतिकारात्मकता लाने हेतु मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भारतीय दण्ड संहिता एवं भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता में लाए गए संशोधन की अनूपपुर शहर की छात्राओं ने सराहना की है। इस संशोधन के बाद 12 वर्ष की कम आयु की बालिकाओं के साथ बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के अपराधों के लिए भारतीय दण्ड संहिता में दो नई धारायें क्रमशः 376 एए एवं 376 डीए अंतःस्थापित कर मृत्युदंड का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही विवाह का प्रलोभन देकर यौन शोषण के कृत्य को संज्ञेय अपराध बनाकर न्याय मिलने की प्रक्रिया को और सुविधाजनक बनाया गया है। आदतन यौन उत्पीड़न एवं छेड़छाड़ जैसे अपराध करने वाले व्यक्तियों को दण्ड प्रक्रिया की धारा 110 की परिधि में लाकर कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को उनमें सदाचार की प्रतिभूति लेने के लिए सशक्त किया गया है। उपरोक्त संशोधनों के द्वारा निश्चित रूप से शोषणकर्ता में डर पैदा होगा। ऐसे विचार बी.एस.सी. की छात्रा रोशनी केवट ने रखे।
देर आए दुरुस्त आए
   तुलसी कॉलेज की छात्रा दिव्या राठौर ने कहा कि दिल्ली की जघन्य घटना के बाद ही ये  प्रावधान आ जाने चाहिए थे। इन प्रावधानों के आने से निःसंदेह महिलाओं, युवतियों एवं छात्राओं में आत्मविश्वास का संचार होगा और वे अब स्वतंत्र रूप से देश के विकास में भाग ले सकेंगी।
चुप नहीं रहें, हिम्मत से सामने आएं
अब असामाजिक तत्व छुपाएंगे अपना चेहरा
   अनूपपुर जिले के क्षेत्रीय कॉलेज की छात्रा दुर्गा पनिका ने कहा कि इन अधिनियमों का वास्तविक फायदा तभी होगा, जब इस वर्ग के सभी सदस्य अपनी चुप्पी तोड़ेंगे व समस्त समाज उनका इस कार्य में समर्थन करेगा। छात्रा ने कहा कि इस संशोधन से उचित, उपयुक्त न्याय लक्षित होता दिख रहा है। जो महिला वर्ग को चुप्पी तोड़कर अपनी गतिविधियों को सुचारू रूप से करने एवं असामाजिक तत्वों को छुपे रहने के लिए बाध्य करेगा।
अब उच्च शिक्षा प्राप्त करना, बाहर जाकर नौकरी करना होगा आसान
बेटियों के आगमन पर माता-पिता अब नहीं होंगे चिंतित
   कॉलेज की ही अन्य छात्राओं किरण सिंह, मोहनी प्रजापति, देवकी देवी, दिव्यारानी कंवल, रितिका सोनी एवं चांदनी मांझी ने संशोधन पर खुशी जाहिर की एवं कहा कि ऐसे नियम आने से अभिभावक भी अब बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने एवं नए क्षेत्रों में जाकर कार्य करने में सहयोग कर पाएंगे। अगर संबंधित नियमों का क्रियान्वयन भी सोच के आधार पर हो जाय तो महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में वृद्धि होगी। जो कि न केवल संबंधित परिवार को, बल्कि समस्त राष्ट्र को आगे ले जाने में सहायक होगी। इस आत्मनिर्भरता से महिलाएं सशक्त होंगी। अपनी बातें स्पष्ट रूप से कह पाएंगी व अभिभावक भी बेटियों के आगमन पर इन अपराधों के डर से मुक्त होकर प्रसन्नता से हमारा स्वागत कर पाएंगे।
(235 days ago)
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