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भावांतर भुगतान योजना से कमल पाटीदार को अपनी फसल की मनमाफिक राशि मिली "सफलता की कहानी"
उड़द की फसल के बाजार भाव के अलावा भावांतर से मिले चालीस हजार रूपये
रतलाम | 06-दिसम्बर-2017
 
    
   रतलाम जिले के हजारो किसानों ने राज्य शासन की भावांतर भुगतान योजना का लाभ उठाकर अपने मन के मुताबिक संतुष्टीदायक भाव अपनी फसलों का प्राप्त किया है। इस जिले के कुल पांच हजार आठ सौ से ज्यादा किसानों को अब तक भावांतरण भुगतान योजना से पांच करोड़ बाईस लाख चौहत्तर हजार रूपये कर कुल भुगतान अन्तर की राशि के रूप में किया जा चुका है यह रकम किसानों के खातों में जमा हो चुकी है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम धामेडी के किसान कमल पाटीदार भी इस योजना के बदोलत अन्तर राशि के रूप में चालीस हजार रूपये प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने अपनी करीब पन्द्रह बीघा जमीन में उडद की फसल बोई थी कुल 43 क्विंटल उत्पादन हुआ था जब मण्डी में बेचने के लिये भाव मालूम किया तब पता चला कि उडद का बाजार भाव लगभग चौबीस सौ रूपया क्विंटल है तो मनमसोजकर रह गये। इसी दरमियान कमल ने फसल बेचना स्थगित रखकर भावांतर योजना में पंजीयन करवाया था। कमल द्वारा पंजीयन के पश्चात् 26 अक्टूबर को मजबूरीवश अपनी फसल जावरा मंडी ले जाकर करीब 2400 रूपये क्विंटल के दर से बेचदी। भवांतर भुगतान योजना जब शासन ने प्रारम्भ की तब समयावधि के अनुसार समर्थन मूल्य तथा मॉडल विक्रय दर के अन्तर के अनुसार सूचीबद्ध किये गये लाभार्थी किसानों में कमल भी सम्मिलित थे उन्हें भावांतरण भुगतान राशि के रूप में 40 हजार रूपये का लाभ श्षासन द्वारा प्रदान किया गया। इस फायदे को देखकर कमल की खुशी का ठिकाना न था उन्होने कभी यह नहीं सोचा था कि उनको बाजार भाव में नुकसान की पूर्ति इस प्रकार भी हो सकेगी। कमल नें इसके बाद बीते नवम्बर माह में अपनी बची हुई 18 क्विंटल उडद की फसल भी मण्डी में बेच दी है। इसके भी हजारों रूपये का लाभ उन्हें भावांतर योजना से शीघ्र मिलने वाला है। कमल ही नही बल्कि रतलाम जिले के धराड निवासी किसान ईश्वरलाल पाटीदार को उडद की फसल बेचने पर भावांतर भुगतान योजना द्वारा 85 हजार रूपये, ग्राम शिवपुर के किसान राजेन्द्र कुमार को अपनी सोयाबीन रतलाम मंडी में बेचने पर 52 हजार 920 रूपये, ग्राम बिलपांक के किसान शंकरलाल को 52 हजार रूपये का लाभ मिला है। इन सभी किसानों के खातों में राशि पहूंच चुकी है। भावांतर भुगतान योजना वास्तव में किसानों के लिये बडा सहारा बन कर सामने आई है अब उन्हें बाजार के कम दामों की चिन्ता नही है वे जब चाहें अपनी फसल बेच सकते है क्योंकि भावांतर भुगतान योजना संचालित है।
(229 days ago)
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