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सिलाई से सुदृढ़ होती आजीविका "सफलता की कहानी"
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अनुपपुर | 06-जनवरी-2018
 
 
   ग्राम लीलाटोला निवासी मानवती बाई पति श्री खटबदन सिंह के परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत ही दयनीय थी। परिवार की आय का साधन सिर्फ मजदूरी ही था। इस कार्य से परिवार को मजदूरी के रूप में 50-60 रु. प्रतिदिन ही प्राप्त होता था, यह आय भी उस परिवार की अनियमित ही थी।
   नारी शक्ति ग्राम संगठन के माध्यम से संचालित समूह पूजा स्वसहायता समूह से अप्रैल 2014 में जुड़ी। समूह से जुडनें के पश्चात् मानमती के परिवार में तेजी से बदलाव आना प्रारंभ हुआ। पूर्व में इस परिवार को पूर्णरूपेण मजदूरी पर ही निर्भर रहना पड़ता था परंतु समूह से जुडनें के पश्चात् उसनें स्वयं की छोटी सी किराने की दुकान खोली, मॉग के अनुसार उसनें उसी दुकान में मनिहारी का कार्य भी प्रारंभ कर दिया, धीरे-धीरे उसका व्यवसाय चलने लगा।
   मानमती को कपडे सिलाई का कार्य भी आता था, तो उसनें सिलाई का कार्य भी प्रारंभ कर दिया। उसके पति नें भी परिवार की आय बढ़ानें में सहयोग दिया और मजदूरी छोड़कर समीपस्थ ग्रामों में लगनें वाले हाट बाजार में जाकर किराना एवं मनिहारी का व्यवसाय प्रारंभ कर दिया। जिससे परिवार की आय बढ़नें लगी। कच्चे मकान के स्थान पर इस परिवार नें पक्का मकान बनवा लिया। आनें जानें की सुविधा के लिए मोटर साईकल भी खरीदी गई। पूर्व में जहॉ कृषि परंपरागत तरीके से करनें के कारण आय कम होती थी, आय बढ़ने के साथ आधुनिक तरीके से कृषि कार्य किया, जिससे कृषि से भी आय प्राप्त होनें लगी। बच्चे स्थानीय स्कूल में पढ़ते थे, परंतु आय बढ़ने के कारण आज इस परिवार के तीनों बच्चे प्राईवेट स्कूल में अध्ययन कर रहे हैं।
 
(169 days ago)
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