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ओम की बाल सुलभ मस्ती अब शबाब पर (सफलता)
"चालावकी वनकी, मुडाझोबा"
हरदा | 07-जनवरी-2018
 
   
    "मस्ती नहीं वरना पिटोगे" भाषा चाहे कोई भी हो दुनिया भर की माताएं अपने बच्चों को यह बात कह फूली नहीं समाती हैं। माया कोरकू के कंठ से जब अपने पुत्र ओम के लिए इस आशय के शब्द निकले तो साथ में सरकार और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के लिए दुआएं भी निकली।
 
   हरदा जिले के अजनास रैयत में रहने वाली माया भी तो मां है,हर मां की तरह उसके मन में भी अपने बच्चे की बाल सुलभ मस्ती देखने की इच्छा थी,जो धीरे धीरे दम तोड़ रही थी। बचपन से ही गंभीर हृदय रोग से पीडित ओम का व्यवहार सामान्य बच्चे की तरह नहीं था। लेकिन अब बारह साल के ओम कोरकू की बाल सुलभ मस्ती शबाब पर है। पिछले साल तक चलने फिरने में ही हॉफने वाले ओम की जिन्दगी मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना की बदौलत सरपट दौड़ने लगी है। पिछले साल की शुरुआत तक की बात करें तो ओम के माता पिता माया और बुझराम ने इस जन्मजात कमजोरी को उसकी नियति मान लिया था। बुझराम अपनी इकलौती संतान की ऐसी हालत देख किस्मत को कोसता रहता था। इस बीच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम द्वारा ग्राम अजनास रैयत के भ्रमण के दौरान ओम की जांच की गई। उसे जिला स्तर के कैम्प में बुलवाया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बताया गया कि ऑपरेशन के बाद ओम पूरी तरह ठीक हो जाएगा। चिकित्सक बतलाते है कि ओम के हृदय की एमव्हीआर (माइट्रल वाल्व सर्जरी) जरूरी थी। खेतीहर मजदूरी करने वाले बुझराम कहते है इतना सारा रुपया लगेगा। मुझे तो यह भी नहीं पता था कि आपरेशन पर होने वाले खर्च एक लाख 60 हजार रूपए में कितने शून्य लगते है। जब उसे बताया गया कि ऑपरेशन का कोई खर्चा नहीं लगेगा और तुम्हारा बेटा ठीक होकर सामान्य जिन्दगी जी सकेगा। बुझराम की माने तो उसके लिये यह सब किसी ईश्वरीय चमत्कार से कम नहीं लग रहा था। अन्धे को क्या चाहिये, दो आँखे। बुझराम ने तत्काल बेटे के ऑपरेशन के लिये हामी भर दी। गत मई माह में भोपाल के एलबीएस हॉस्पीटल में हृदय की सफल सर्जरी हुई। आज जब क्रिकेट खेलते समय  गेंद जब खाना बनाती माया को छू गई तब कोरकू भाषा में ओम को "चालावकी वनकी, मुडाझोबा"(मस्ती नहीं वरना पिटोगे) कह डॉटने के अंदाज में झलकता प्यार देखते ही बनता है। कहाँ एक समय चार कदम चलने में हाफने वाला ओम अब सरपट भागने लगा है। अब 12 साल की उम्र में ही ओम की लम्बाई उसकी माँ के बराबर होने को है। माया कहती है कि इस योजना के कारण ही मेरा ओम हाथ में है नहीं तो उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। हरदा जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत स्कूल और आगनवाड़ी केंद्र में जन्मजात विकृति की जांच कर निजी अस्पतालों में गत अप्रेल से अब तक बीस बच्चों के इस तरह के ऑपरेशन करवाए जा चुके हैं।
(169 days ago)
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