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मध्यप्रदेश की पारेषण क्षमता 3890 से बढ़कर 15,100 मेगावॉट हुई
पारेषण क्षमता में 258 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि
जबलपुर | 13-फरवरी-2018
 
 
    मध्यप्रदेश में पारेषण क्षमता 15100 मेगावाट हो गई है, जो कि एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के गठन के समय 3890 मेगावाट थी। इस प्रकार पारेषण क्षमता में 258 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश में अति उच्च दाब उपकेन्द्रों की ट्रांसफार्मेशन क्षमता 55087.5 एमवीए, अति उच्च दाब लाईनों की कुल लंबाई 32900.1 सर्किट किलोमीटर एवं अति उच्च दाब उपकेन्द्रों की कुल संख्या 339 हो गई है। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 17 नए उपकेन्द्रों का निर्माण कर उन्हें ऊजीकृत किया गया एवं कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता में 4067 एमवीए की वृद्धि की गई।
    राज्य शासन द्वारा वर्ष 2017-18 के लिए कुल 2396.5 एमवीए ट्रांसफार्मेशन क्षमता, जिसमें 1083 एमवीए के 12 नए उपकेन्द्रों का ऊर्जीकरण, वर्तमान उपकेन्द्रों में 1313.5 एमवीए की क्षमता वृद्धि एवं 1311 सर्किट किलोमीटर लाइनों का निर्माण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से गत माह तक कुल 531.32 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाइन एवं 8 नए उपकेन्द्रों को स्थापित कर क्षमता में 1671.5 एमवीए की वृद्धि हुई है। दिसम्बर 2017 तक 22 अति उच्चदाब उपकेन्द्रों में स्थापित पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का कार्य हुआ, जिससे कुल 1032.5 एमवीए की क्षमता वृद्धि हुई। इसके अतिरिक्त 36 केवी 12 एमवीआर क्षमता के 25 केपेसिटर बैंकों को ऊर्जित किया गया। साथ ही 9 नग 132 केवी रेल्वे ट्रेक्शन फीडरों को भी ऊर्जित कर एनटीपीसी गाड़रवारा के सुपर थर्मल पावरस्टेशन के लिए लाईनों का कार्य भी समय से पूर्व किया गया।
   एडीबी योजना में विभिन्न उच्चदाब उपकेन्द्रों एवं पारेषण लाईन के निर्माण के लिए टर्न-की कार्यादेश जारी किए गए हैं, जिनका कार्य प्रगति पर है। कंपनी के गठन के पश्चात पारेषण हानि 7.93 प्रतिशत से लगातार घटकर वर्ष 2016-17 में 2.71 प्रतिशत अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। वर्ष 2017-18 के दौरान 28 दिसम्बर को पारेषण प्रणाली क्षमता 12240 मेगावाट की अधिकतम मांग की आपूर्ति की गई। वर्ष 2016-17 में पारेषण प्रणाली की उपलब्धता मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के 98 प्रतिशत के निर्धारित मापदण्ड से अधिक 98.39 प्रतिशत तक प्राप्त की गई।
   नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन की स्थापित क्षमता में निरंतर वृद्धि के अनुकूल नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन केन्द्रों को प्रणाली में संयोजित किया गया। वर्तमान में पवन ऊर्जा 2427.91 मेगावाट तथा सौर ऊर्जा 1274.085 मेगावाट की स्थापित क्षमता है। सिंक्रोफेसर तकनीक पर आधारित यूनिफाइड रियल टाइम डायनामिक स्टेट मेजरमेंट परियोजना की स्थापना का कार्य सफलतापूर्वक किया जा चुका है।  
 
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