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मां तुझे प्रणाम अनुभव यात्रा ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को और अधिक बढ़ाया ''''सफलता की कहानी''''
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हरदा | 11-मार्च-2018
 
 
      प्रकृति का हरेक प्राणी जन्म लेते ही जिस रिश्ते से प्रथम परिचित होता है, वह है माँ-बच्चे का रिश्ता। मां तुझे प्रणाम अनुभव यात्रा युवाओ को अपनी मातृभूमी से जोड़ते हुए कमोबेश वैसे ही रिश्ते का एहसास कराने में सफल हुई है। अंडमान निकोबार में सेल्यूलर जेल के दर्शन के समय हुए अनुभव को साझा करते ग्यारहवी में अध्ययनरत 17 वर्षीय सलोनी की आंखे डबडबा जाती हैं। सलोनी अपने मेलजोल के लोगों से वार्तालाप करते ये बताना नहीं भूलती कि अंग्रेजों ने भारतीयों के स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में एक ऐसी जेल बनाई थी, जहां भारतीयों पर भयानक जुल्म ढाए जाते थे। अंग्रेजों ने हिंद महासागर के इस द्वीप में 1857 की क्रांति के तुरंत बाद भारतीयों की स्वतंत्रता की भावना कुचलने के लिए इस जेल का निर्माण किया था। इस जेल का नाम सेलुलर जेल रखा गया था। इसे सेलुलर इसलिए नाम दिया गया था, क्योंकि यहां एक कैदी से दूसरे से बिलकुल अलग रखा जाता था। जेल में हर कैदी के लिए एक अलग सेल होती थी। यहां का अकेलापन कैदी के लिए सबसे भयावह होता था। लोग इस जेल को कालापानी कहते थे। यहां कितने भारतीयों को फांसी की सजा दी गई और कितने मर गए इसका रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। लेकिन आज भी बुजुर्गों के जेहन में कालापानी शब्द भयावह जगह के रूप में बसा है। यह शब्द भारत में सबसे बड़ी और बुरी सजा के लिए एक मुहावरा बना हुआ है। भारत जब आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था तब बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों जैसे बटुकेश्वर दत्त, योगेश्वर शुक्ला और विनायक दामोदर सावरकर को इस जेल में रखा गया था। आज जेल के परिसर को राष्ट्रिय स्मारक की उपाधि दी गयी है। हमको इसे देखने और उस समय इसकी भयावहता को समझाने का मौका मां तुझे प्रणाम यात्रा के कारण ही हो सका है। सही भी है कि युवाओं में देश प्रेम, सदविचार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का बोध हो, इसके लिये माँ तुझे सलाम योजना प्रारम्भ की गई है। योजना का उद्देश्य युवाओं को सीमाओं पर भेजकर देश-भक्ति के विचारों से ओत-प्रोत करना है, जिससे युवा देश के लिये कर्म, वचन, संस्कारों के साथ समाज में बेहतर योगदान दे सके।सलोनी ने जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए 22 जनवरी से 29 जनवरी तक अण्डमान निकोबार द्वीप के प्राकृतिक सौंदर्य स्थल, समुद्र, संस्कृति, सैन्य गतिविधियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। सलोनी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा की यात्रा के लिए उन्होंने पहली बार चेन्नई से पोर्टब्लेयर तक 2 घण्टे की यात्रा हवाई जहाज से की। इस अनुभव को वह अपने जीवन में हमेशा स्मरण रखेंगी। मां तुझे प्रणाम अनुभव यात्रा ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को और अधिक बढाया है।
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