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कृषि महाविद्यालय मुरझड़ में विकसित धान की चार प्रजातियों को भारत सरकार से मिली मान्यता
जिले में विकसित धान की प्रजातियों का सम्पूर्ण भारत के किसान कर सकेगें उपयोग
बालाघाट | 13-मार्च-2018
 
   
 
   बालाघाट जिले के मुरझड़ में कुछ वर्ष पहले प्रारंभ किये गये कृषि महाविद्यालय ने कम समय में ही किसानों के लिए अपनी उपयोगिता साबित करना चालू कर दिया है। अपने कम समय में ही मुरझड़ के कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने धान की चार प्रजातियां विकसित की है, जिन्हें भारत सरकार से मान्यता मिल गई है। मुरझड़ कृषि महाविद्यालय में विकसित धान की ये प्रजातियां हैं- जवाहर राईस बालाघाट-1, इम्प्रुव्ड चिन्नोर, इम्प्रुव्ड जीराशंकर, व जे. आर. 81 । धान की इन विकसित प्रजातियों का उपयोग सम्पूर्ण भारत के किसान कर सकेंगें।
    सन् 1915 में अंग्रेज वनस्पति शास्त्री द्वारा वारासिवनी के पास मुरझड़ गांव में धान फसल जो कि बालाघाट व आसपास के जिले की प्रमुख फसल होने के कारण धान के अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गई थी। जिसे वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री, श्री गौरीशंकर बिसेन के अथक प्रयासों से कृषि महाविद्यालय, बालाघाट, मुरझड़ फार्म, वारासिवनी, के रूप में जाना जाता है। जिसमें कृषि शिक्षा, कृषि प्रसार व कृषि वैज्ञानिको द्वारा प्रदेश ही नही अपितु देश-विदेश की धान की किस्मों की अनुकूलता का परीक्षण करते हुए धान की नई किस्में पादप प्रजनन की विधियों का उपयोग कर निकालने का प्रयास किया जाता है।
    अपनी स्थापना के मात्र पांच वर्षो के अन्दर प्रोत्साहन एवं अभिरूची के चलते कृषि महाविद्यालय मुरझड़ के कृषि वैज्ञानिको डॉ. उत्तम बिसेन, डॉ. बी.एन. तिवारी व डॉ. शिवरतन द्वारा धान की जे. आर. बी.-1 (जवाहर राईस बालाघाट-1) का विकास किया गया है, जो कि 118 से 123 दिन की मध्यम दाने की प्रजाति हैं।
   बालाघाट जिले की विश्व प्रसिद्ध किस्में चिन्नौर व जीरा शंकर को भी कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन के विशेष प्रोत्साहन एवं डॉ. जी. के. कोतु, डॉ. उत्तम बिसेन डॉ. नरेश बिसेन एवं डॉ. अमित शर्मा के प्रयासों के कारण आवश्यक परिक्षण उपरान्त किसानों के आर्थिक विकास के लिए भारत सरकार द्वारा अधिसूचित कर लिया गया है। जिसके चलते अब किसानों को इन किस्मों का उन्नत व शुद्ध बीज कृषि महाविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, भविष्य में बीज निगम, सहकारी संस्थाओं व प्रायवेट दुकानों के माध्यम से उपलब्ध हो सकेगा।  डॉ. जी. के. कोतु, डॉ. उत्तम बिसेन, तथा डॉ. नरेश बिसेन द्वारा जवाहर लाल नेहरू, कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से जिले में सबसे बड़े रकबे में लगाई जाने वाली किस्म एमटीयू-1010 के समान अवधि, दाने, व उत्पादन देने वाली इससे बेहतर किस्म जे. आर.-81 का विकास किया गया है।
    कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने मुरझड़ कालेज के वैज्ञानिकों द्वारा हासिल की गई उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि चिन्नौर व जीराशंकर हमारे क्षेत्र की विश्व प्रसिद्ध किस्म है, जिसका भारत सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाना जरूरी था। कृषि महाविद्यालय, मुरझड व जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के कृषि वैज्ञानिक उपरोक्त किस्मों में गुणवत्ता बनाये रखते हुये उपज बढ़ाने का प्रयास करें। कृषि महाविद्यालय, बालाघाट के खुलने से भविष्य में क्षेत्र के किसानों को और लाभ होगा।
    जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति डॉ. पी.के. बिसेन ने मुरझड़ कालेज की इस उपलब्धि के लिए  यहां के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा है कि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से विकसित चना व सोयाबीन की किस्में पूरे भारत में सबसे ज्यादा उगाई जाती है, बालाघाट में कृषि महाविद्यालय बनने से यहां की धान की किस्मे किसानों का धान का उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय दोगुनी करने मे सहायक होंगी।
(100 days ago)
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