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अनुकूल माहौल बनाकर कर रहे बारह मासी खेती (सफलता की कहानी)
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शहडोल | 14-मार्च-2018
   
   
   शहडोल जिले में बारह मासी खेती के प्रति किसानो का रूझान बढ़ रहा है। पाली हाउस में अनुकूल माहौल बनाकर अब यहॉ के किसान भी बारह मासी सब्जी की खेती करके दोगुना उत्पादन कर रहे है। पिछले 2016 से इसकी शुरूआत हो गई है। अब हर ब्लाक में दो-तीन किसान इस खेती को अपना रहे है तथा बारह मासी खेती साधारण किसानो के लिए मंहगी है,लेकिन इसमें लागत का 50 प्रतिशत अनुदान भी मिलता है जिससे कई छोटे किसान भी इस पर काम कर रहे है। इसका उदाहरण गोहपारू विकासखण्ड के उमारिया गांव का देवीदीन अहिरवार है। प्रदेश के नौ जिलो में पोली हाउस के माध्यम से शामिल हो गया है। लगभग एक एकड़ भूमि मे यह खेती में 50 हजार तक की सालाना पुंजी लगती है। जिसमें डेढ़ लाख तक का फायदा किसान को मिलता है। गोहपारू, सोहागपुर, बुढ़ार, ब्यौहारी एवं जयसिंहनगर विकासखण्ड के किसान 12 मासी खेती शुरू कर दिये है। पोली हाउस को शुरू करने मे बड़ी पूंजी लगती है। 15 दिन के भीतर पोली हाउस तैयार हो जाता है। जिसमें 28 लाख तक की लागत लगती है। यह एक एकड़ की लागत है। भूमि मे चारो तरफ लोहे के खंभे और पाइपो से स्टेक्चर खड़ा करने के बाद मच्छरदानी जैसी जाली चारो तरफ ऐसे लगाई जाती है। जिससे कि हर मौसम में सब्जी की खेती हो सके। इसके बाद फिर हर साल 50 से 60 हजार रूपये की पूंजी लगाकर किसान डेढ़ लाख तक की पूंजी लगाकर किसान डेढ़ लाख तक की कमाई कर सकता है। देवीदीन अहिरवार ने बताया उसने उमारिया गांव मे पोली हाउस मे सब्जी का काम शुरू कर दिया गया है जिससे अच्छा मुनाफा हो रहा है। देवीदान ने कहा कि अन्य किसानो को भी ऐसी खेती करनी चाहिए। अभी तक जिले के लगभग एक दर्जन किसान इस खेती से जुड़ गये है।
(96 days ago)
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