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मुर्गी, मछली, मधुमक्खी, बकरी पालन बढ़ा रहा है ग्रामीणों की आय

शहडोल | 14-मार्च-2018
 
   
 
   राज्य शासन द्वारा कमजोर वर्गों की आय में वृद्धि के लिये संचालित योजनाओं से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार दिखने लगा है। रीवा जिले के ग्राम गेरूआर की अनुसूचित जाति की महिला राजकली साकेत ने ग्रामीण आजीविका मिशन की सहायता से मुर्गी पालन शुरू किया है। उन्होंने आजीविका के लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़कर मुर्गी पालन को अपना व्यवसाय बनाया। राजकली कहती हैं कि मुर्गी पालन के पहले दोनों वक्त का खाना जुटाना ही मुश्किल था। अब मेरे बच्चे न केवल अच्छा जीवन-यापन कर रहे हैं बल्कि, उन्हें बेहतर शिक्षा भी मिल रही है। पहले पति राजेश को गांव में कभी मजदूरी मिलती थी, कभी नहीं। कई बार मजदूरी की तलाश में गांव के बाहर भी जाना पड़ता था। अब मेरे पति भी मुर्गी पालन में सहायता कर रहे हैं। मुझे स्कूल में मध्यान्ह भोजन बनाने का काम भी मिल गया है। पहले हम महिने में 2 से 3 हजार रुपये ही कमा पाते थे। अब मुर्गी पालन से 12 हजार, मध्यान्ह भोजन बनाने के काम से एक हजार और पति की आय से 7 हजार मिला कर आसानी  से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। बैतूल जिले के ग्राम तिरमहू की संतोषी पाटने भी ग्रामीण आजीविका मिशन के  दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़कर प्रति माह मुर्गी पालन से 8 से 11 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं। संतोषी 13 सदस्यीय समूह की अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने रिवाल्विंग फंड की राशि से 13 हजार और समूह बचत से 2 हजार कुल 15 हजार रुपये की राशि एकत्रित कर 1500 चूजे खरीदे और कच्चे शेड का निर्माण किया। इनकी लगन को देखते हुए मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में इनके पति नीरज पाटने को पक्के मुर्गी शेड निर्माण के लिये एक लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इनके पास अब 23 सौ से अधिक चूजे हो गये हैं। पाटने दम्पत्ति मुर्गी पालन व्यवसाय को और बढ़ा रहे हैं। छिन्दवाड़ा के पास सोनपुर में हर्षित साहू ने उद्यानिकी विभाग के सहयोग से लगभग आधा एकड़ में मधुमक्खी पालन शुरू किया है। हर्षित को मधुमक्खी पालन के लिये 10 लाख रूपये का ऋण स्वीकृत हुआ है। उन्होंने इससे 20 बॉक्स (मधुमक्खी कॉलोनी) बनाए। गत दिवस कलेक्टर श्री जे.के. जैन ने भी हर्षित के कार्यो को देखा और सराहा। मौके पर मौजूद उद्यानिकी विभाग के सलाहकार श्री राजबीर सिंह के मुताबिक इस यूनिट से हर्षित को सालाना 5 से 6 लाख रुपये का मुनाफा होगा। साथ ही, मधुमक्खी द्वारा परागण से आस-पास की फसलों में 40 से 200 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी भी होगी।
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