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राज्यपाल ने जबलपुर के रानी दुर्गावती महिला चिकित्सालय को दिया एक्सीलेंस अवार्ड
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जबलपुर | 11-अप्रैल-2018
 
 
    केन्द्र सरकार के काया-कल्प अभियान के मापदण्डों और मूल्यांकन के आधार पर जबलपुर का रानी दुर्गावती महिला चिकित्सालय (लेडी एल्गिन हॉस्पिटल) प्रदेश के सभी 110 सिविल अस्पतालों में लगातार दूसरे वर्ष उत्कृष्ट पाया गया। सिविल अस्पताल श्रेणी में अर्जित इस उपलब्धि के लिए प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने हाल ही में को विधानसभा के मानसरोवर हॉल में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में अस्पताल की अधीक्षक डॉ नीता साहू, आर.एम.ओ. डॉ संजय मिश्रा को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह कन्टीन्यूड एक्सीलेंस अवार्ड और दस लाख रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की। इस मौके पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रूस्तम सिंह भी मौजूद थे।
    इस अवसर पर श्रीमती गौरीसिंह प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, श्रीमती पल्लवी जैन गोविल स्वास्थ्य आयुक्त, डॉ. रंजना गुप्ता क्षेत्रीय संचालक जबलपुर तथा डॉ. एम.एम. अग्रवाल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जबलपुर उपस्थित थे।
    स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, जैव अपशिष्ट प्रबंधन, सहायक सेवाओं, सफाई उन्नयन और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के मामले में रानी दुर्गावती महिला चिकित्सालय पिछले दो वर्षों से प्रदेश में अव्वल बना हुआ है। काया-कल्प अभियान के तहत 6 क्षेत्रों के 250 बिंदुओं के मानकों के आधार पर क्वालिटी एंश्योर्ड कौंसिल की टीम द्वारा किए गए मूल्यांकन में जबलपुर के अस्पताल ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक 80.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट स्थान हासिल किया है।
    रानी दुर्गावती चिकित्सालय की अधीक्षक डॉ निशा साहू ने बताया कि किसी बड़े निजी अस्पताल की तर्ज पर यहां हाईजीन प्रमोशन के लिए पेस्ट कंट्रोल, जैव अपशिष्ट प्रबंधन, द्रव अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्लांट लगाए, साफ पेयजल के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था की गई। नया सीवेज सिस्टम, नया फर्नीचर के अलावा थ्री बफेट सिस्टम से दिन में चार बार अस्पताल के फर्श की सफाई होती है। स्टाफ को ग्लब्स, मास्क जैसे व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपयोग का कड़ाई से पालन कराया जाता है। सफाई व सुरक्षा कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई गई है। डॉ साहू ने बताया कि पिछले दो वर्ष में एक लाख 11 हजार 616 महिला मरीजों को आउटडोर परीक्षण कर चिकित्सा मुहैया कराई गई। इसी अवधि के दौरान 29 हजार से अधिक मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया गया। इस दौरान 19 हजार से अधिक संस्थागत प्रसव हुए। जिसमें करीब 13 हजार प्रसव सामान्य और 6 हजार सीजेरियन ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराए गए, जो अपने आप में चिकित्सालय के बेहतर रिकार्ड की ओर इंगित करता है। जहां सीजेरियन आपरेशन की तुलना में नार्मल डिलेवरी की संख्या कहीं ज्यादा है। डॉ साहू बताती हैं कि आलोच्य अवधि के दौरान करीब तीन हजार महिलाओं का टी.टी.ऑपरेशन किया गया। जबकि करीब 13 हजार महिलाओं को गर्भ निरोधक उपाय से सम्बन्धित कॉपर टी जैसे पोस्टपारटम इन्ट्राटेरीन कन्ट्रासेप्टिव डिवाइस लगाए गए।
    केन्द्र सरकार द्वारा 2015 से प्रारंभ किये गये स्वच्छता अभियान के अंतर्गत शासकीय चिकित्सालयों के उन्नयन हेतु कायाकल्प अभियान प्रारंभ किया गया। इसके अंतर्गत जिला चिकित्सालय, सिविल अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं एम्स इस प्रकार चार श्रेणियां बनाई गयी हैं। प्रत्येक चिकित्सालय में 6 क्षेत्र निर्धारित किये गये एवं उन पर अंक निर्धारित किये गये हैं। चिकित्सालय उन्नयन (100 अंक), स्वच्छता (100 अंक), संक्रमण नियंत्रण (100 अंक), जैव अपशिष्ट नियंत्रण (100 अंक), सहायक सेवायें (50 अंक), सफाई उन्नयन (50 अंक), इस तरह कुल 500 अंक निर्धारित हैं।  चिकित्सालयों का निरीक्षण तीन चरणों में होता है-इंटर्नल असेसमेंट, पियर असेसमेंट एवं फाइनल असेसमेंट। जिन चिकित्सालयों को 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त होते हैं उनमें अंकों के आधार पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार दिये जाते हैं।  प्रदेश के 110 सिविल हास्पिटल एवं 257 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में रानी दुर्गावती (लेडी एल्गिन) चिकित्सालय को 80.2 प्रतिशत अंकों के साथ प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
 
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