समाचार
|| ऑनलाईन प्रवेश के लिए सी.एल.सी. का द्वितीय चरण || प्रदेश के 4 जिलों में सामान्य से अधिक, 33 में सामान्य वर्षा दर्ज || जनजातीय विभाग की योजनाओं का कम्प्यूटरीकरण || शासकीय महाविद्यालयों निर्धारित सीट संख्या में वृद्धि के निर्देश || विकास रथ पहुँचाएंगे विभिन्न योजनाओं की जानकारी || इनोवेटिव आइडिया के लिए आवेदन आमंत्रित || विमुक्त जनजाति वर्ग के समाज सेवियों को मिलेगा पुरस्कार || आज मनाया जायेगा सद्भावना दिवस || मजदूरों के बच्चों को नहीं लगेगा परीक्षा शुल्क || ग्रामीण क्षेत्रों का होगा स्वच्छता सर्वेक्षण 31 अगस्त तक
अन्य ख़बरें
जल स्त्रोतो के पुनर्जीवन के लिए युवाओं ने श्रमदान कर जलसंरक्षण के लिए दिया संदेश "कहानी सच्ची है"
-
शाजापुर | 17-मई-2018
 
 
    बिगड़ते पर्यावरण, वर्षा की अनिश्चितता और भू-जल के अत्यधिक दोहन से भूमिगत जल स्तर में आ रही निरन्तर गिरावट के कारण दिन-प्रतिदिन जल संकट गहराता जा रहा है। जल संकट से निपटने के लिए आवश्यक है कि हम वर्षा के जल को अत्यधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाकर भूमिगत जलस्तर में वृद्वि करें। यह काम जलसंरचनाओं के निर्माण और पुरानी जल संरचनाओं को जलसंग्रहण लायक बनाने से संभव हो सकेगा। जिले में जन अभियान परिषद द्वारा पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्जीवन के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
    शाजापुर जिले का ग्राम रंथभंवर यू तो इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां पुरानी बावड़िया और कुण्डियां भी है जो रख रखाव के अभाव में कचरे और मलबे से भर गई थी। शाजापुर के बीएसडब्ल्यू के छात्रों ने इन बावड़ियों और कुण्डियों को पुनर्जीवित करने का काम हाथ में लिया। ग्राम के युवाओं ने भी इस काम में उन्हे सहयोग दिया। बीएसडब्ल्यू के छात्रों और युवाओं ने मिलकर रणनीति तैयार की। सबसे पहले युवाओं ने प्राचीन ओंकारेश्वर मंदीर की बावड़ी की सफाई का निश्चय किया। इस बावड़ी में ग्रामीण कई सालों से प्रतिमाओं का विसर्जन करते थे और पूजन सामग्री डालते थे, जिससे बावड़ी भर गई थी। युवा गैती, फावड़े और तगारी लेकर एकत्रित हुए और मानव श्रृखंला बनाकर सफाई का काम शुरू कियां। युवाओं को काम करता देख गांव के अन्य लोग भी काम के लिए प्रेरित हुए। सबके सहयोंग से इस बावड़ी से पांच दिन में कई ट्राली मलबा निकाला गया जिसे ग्रामीणों ने अपने खेतों में खाद के रूप में उपयोग किया। पहले यहां का पानी सड़ा हुआ बदबूदार था जो किसी काम में नही आता था। बावड़ी में अब प्राकृतिक जल स्त्रोत से पानी आने लगा है और इसका उपयोग पशुओं के पेयजल में होने लगा। वर्षा उपरान्त इस पानी का उपयोग पेयजल के लिए भी हो सकेगा।
    युवाओं ने इस बावड़ी की सफाई के बाद खोड़िया बाबा के पास स्थित कुंडी, कनेरिया खेड़ी के गोपाल कृष्ण मंदीर के पास की कुंडी की भी सफाई कर उपयोगी बनाया। इस कार्य में दिलीप चौधरी, अभिषेक नागर, महेश पाटीदार, कपील अग्रवाल, विनोद चौधरी, अशोक पाटीदार, जुगल पाटीदार, हेमराज, कुंदन चौधरी, गोविंद चौधरी, सलमान पठान, दीपक बारोलिया, प्रीतम पांचाल, अरविंद वर्मा, अर्जुन चौधरी, सुनील वर्मा, विनोद अमर्तीयां, सुनील भानेज, प्रकाश, पवन डडानिया, धर्मेन्द्र सोनी, प्रवीण मेहता, विष्णु अस्तेय, मंगल अग्रवाल, भोलेनाथ चौधरी, दीपक चौधरी, विजेन्द्र गोस्वामी, आदि युवाओं ने भरपुर सहयोग दिया।
 
(94 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
जुलाईअगस्त 2018सितम्बर
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
303112345
6789101112
13141516171819
20212223242526
272829303112
3456789

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer