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स्वच्छता के लिए साधन नहीं सोच आवश्यक "सफलता की कहानी"
हर्रा टोला की "कल्याणी" बिरजी बाई ने निगरानी समिति के आह्वान पर समझी अपनी जिम्मेदारी, शौचालय निर्माण का कार्य किया प्रारम्भ
अनुपपुर | 18-जून-2018
 
   शौचालय का निर्माण एवं उसका उपयोग साधनो की उपलब्धता से कहीं ज्यादा व्यक्ति की सोच पर अवलंबित है। अगर व्यक्ति मे स्वच्छता की समझ है, वह समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझता है साथ ही उसमे इन दायित्वों के निर्वहन करने की भावना है तो वह निश्चित ही शौचालय बनाएगा और उसका उपयोग भी करेगा।
   विपत्तियाँ एवं समस्याएँ मानव जीवन का अंग है। शायद ही ऐसा कोई होगा जिसके जीवन मे कोई समस्या न हो कोई परेशानी न हो। इन समस्याओ का सामना कर आगे बढ़ते रहना ही मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। अनूपपुर अंतर्गत जनपद पुष्पराजगढ़ के ग्राम हर्रा टोला की कल्याणी बिरजी बाई अपने पति को खो चुकी हैं। इतना ही नहीं उनका एकलौता बेटा भी विधुर हो चुका है। नियति इनकी कठिन परीक्षा ले रही है। मजदूरी कर अपना जीवन यापन करने वाली बिरजी को जब स्वच्छता का बिगुल बजा रही ग्राम की निगरानी समिति के द्वारा शौचालय के महत्व एवं खुले मे शौच से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे मे बताकर उन्हे उनकी सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास दिलाया गया तो बिरजी को अपनी भूल का अहसास हुआ और शौचालय निर्माण को अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए आपने तुरंत कार्य प्रारम्भ कर दिया।बिरजी कहती हैं समाज के प्रति अपने कर्तव्यो का निर्वहन व्यक्ति विशेष की जिम्मेदारी है। इसके लिए शासन के सहयोग का इंतजार करना, महज  एक बहाना है, अपने कर्तव्यो से मुह मोड़ना है।
    कलेक्टर श्रीमती अनुग्रह पी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ सलोनी सिडाना ने बिरजी बाई एवं निगरानी समिति द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है एवं अन्यों को समाज के प्रति अपनी इस जिम्मेदारी  को समझकर जिले के ऊपर लगा अस्वच्छता का दाग मिटाने मे सहयोग देने के लिए कहा है। जिले के समस्त नागरिकों के सामने बिरजी की यह पहल एक उदाहरण है जो यह बताती है कि स्वच्छता के लिए संसाधन नहीं सोच आवश्यक है।
(98 days ago)
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