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समूह ने बदली भावी पीढ़ी की किस्मत (सफलता की कहानी)
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पन्ना | 24-जून-2018
 
   जिले के शाहनगर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत अरथाई के ग्राम महिलवारा निवासी श्रीमती सुन्नी बाई के जीवन में स्व-सहायता समूह से ऐसा बदलाव आया जिससे उसकी आगे आने वाली पीढि़यों की भी किस्मत बदल गयी। श्रीमती सुन्नी बाई एक जरूरतमंद यादव परिवार की महिला हैं। इनके पति अपनी छोटी सी जमीन पर परम्परागत तरीके से खेती करके परिवार का भरण पोषण करते थे। परिवार की जरूरतें पूरी न होने के कारण सुन्नी बाई मजदूरी करती थी। इसके बाद भी परिवार की जरूरतें पूरी नही हो पा रही थी। इन्ही दिनों गांव में डीपीआईपी परियोजना के स्व-सहायता समूहों के गठन की प्रक्रिया चल रही थी। श्रीमती सुन्नी बाई भी गांव के चन्दा स्वसहायता समूह की सदस्य बन गयी। समूह के माध्यम से आजीविका राशि के रूप में 20 हजार रूपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि से उन्होंने अपने बेटे को जबलपुर से बी-फार्मा का कोर्स करवाया। जब बेटे का कोर्स पूरा हो गया तो बैंक के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण स्वीकृत कराकर शाहनगर में मेडिकल स्टोर खुलवा दिया। श्रीमती सुन्नी बाई के बेटे मनोज यादव ने मेडिकल स्टोर चलाकर बैंक ऋण की वापसी कर अपना मेडिकल स्टोर सुचारू रूप से चला रहे हैं। मेडिकल स्टोर से प्रतिमाह 11 से 12 हजार रूपये कमा लेते हैं।
   इस तरह स्व-सहायता समूह ने सुन्नी बाई की तकदीर बदल दी है। अब वे कहती हैं कि जिस तरह मैंने अपने बेटे को पढ़ा लिखाकर अपने पैरों पर खडा किया है इसी तरह वह आगे की पीढि़यों को भी पढा लिखाकर उनके जीवन स्तर को सुधारेगा। इससे मेरी और मेरे आगे की पीढि़यों का परिवारिक, सामाजिक एवं आर्थिक स्तर बहुत अच्छा होगा। वे कहती हैं कि मैं चाहती हूँ कि इसी तरह सभी गरीब परिवार स्व-सहायता समूह बनाकर आगे बढें। अपने और बच्चों के जीवन स्तर में सुधार लाएं। जिससे समाज से गरीबी, अशिक्षा, असामनता के कलंक को समाप्त किया जा सके।
(21 days ago)
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