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अब समायरा भी हंसने-खेलने लगी है "सफलता की कहानी"
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पन्ना | 29-जून-2018
 
  
  बच्चे हंसते-खेलते ही अच्छे लगते हैं। पर कभी-कभी उनकी इस हंसी को किसी की नजर लग जाती है। इन बच्चों को लगने वाली सबसे बुरी नजर कुपोषण की है। कुपोषण की इस बुरी नजर से बच्चों को बचाने में माता-पिता के साथ-साथ आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्निप का अमला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिनकी सतत निगरानी एवं प्रयासों के कारण ही समायरा जैसे कई बच्चे स्वस्थ जीवन जीने लगे हैं।
    समायरा खान का जन्म जुलाई 2015 में पन्ना जिले के सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र अमानगंज में हुआ। जिसे आंगनवाडी केन्द्र में कार्यकर्ता श्रीमती रेखा खरे द्वारा पंजीकृत किया गया। कार्यकर्ता द्वारा हर माह समायरा का वजन लेकर उसे वृद्धि चार्ट में अंकित किया जाता था। इसी दौरान आंगनवाडी कार्यकर्ता ने वजन और एमयूएसी माप लेने के बाद पाया कि समायरा वृद्धि चार्ट की लाल रेखा में आ गयी है। यह लाल रेखा कुछ और नही कुपोषण के खतरे का इशारा थी। समायरा कुपोषण का शिकार हो चुकी थी।
    आंगनवाडी कार्यकर्ता और स्निप का अमला तत्काल समायरा के माता-पिता श्रीमती आशिया बेगम और श्री अजीर खान से मिले। उन्होंने माता-पिता को समझाईस देकर बच्ची को 16 मार्च 2018 को एनआरसी भर्ती कराया। जिसके बाद समायरा वहां 29 मार्च 2018 तक भर्ती रही। एनआरसी में समायरा का समुचित ध्यान रखा गया। आंगनवाडी कार्यकर्ता द्वारा समायरा का 4 फालोअप 15 एवं 30 अप्रैल, 15 मई एवं 30 मई को पूर्ण कराया गया है। इसके अलावा आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्निप के अमले द्वारा समायरा के माता-पिता को समय समय पर घर की साफ-सफाई, भोजन पूर्व हांथ धुलाई, बच्चे को रोज आंगनवाडी केन्द्र भेजने और नियमित वजन कराने की समझाईस दी जाती रही है। आज 3 वर्ष की समायरा कुपोषण के चक्र से बाहर आकर एक स्वस्थ जीवन जीने लगी है। उसका वजन बढ़कर 10 किलो 100 ग्राम एवं एमयूएसी माप 12 से.मी. हो चुका है। पहले जहां उनके माता-पिता समायरा को एनआरसी में भर्ती करने से खबरा रहे थे। वहीं आज वे आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्निप अमले का शुक्रिया अदा करते हैं कि उनकी सतत निगरानी तथा प्रयासों से उनकी बेटी कुपोषण चक्र से बाहर आकर सामान्य बच्चों की तरह हंसने-खेलने लगी है।   
(85 days ago)
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