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विद्यार्थियों की आंखों की चमक कर्मभूमि का मार्ग प्रशस्त कर रही है -राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन
23वां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न
उज्जैन | 30-जून-2018
 
 
   विक्रम विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयन्ती हॉल में 23वां दीक्षान्त समारोह आयोजित किया गया। दीक्षान्त समारोह में विभिन्न विद्यार्थियों को उपाधियां वितरित की गईं तथा 2014 से 2017 तक के विभिन्न संकायों में मैरिट में प्रथम स्थान पर आये 48 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक वितरित किये गये। दीक्षान्त समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल ने कहा कि उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की आंखों में मुझे वह चमक दिखाई दे रही है, जिससे कर्मभूमि की ओर उनका मार्ग प्रशस्त होगा।
   राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन ने कहा कि विद्या और ज्ञान के अर्जन में नारी शक्ति नित-नई ऊंचाईयों पर अपनी विजय पताका फहरा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की गौरव गाथा का प्रमाण वैदिक काल से निरन्तर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में समावर्तन संस्कार के समय जो दीक्षान्त उपदेश दिया जाता था, उसमें अनेक आदर्शों का समावेश है। तैत्रेय उपनिषद के इस दीक्षान्त उपदेश में कहा गया है कि सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो, स्वाध्याय में लापरवाही न करो, माता, पिता और आचार्य को देवता मानो, यह सभी बातें मनन करने योग्य हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारा देश प्रगति के नये सोपानों पर बढ़ रहा है। इस उन्नति में शिक्षित युवक-युवतियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्यपाल ने कहा कि उज्जैन की भूमि ने विक्रमादित्य जैसे प्रतापी और न्यायशील राजा को यशस्वी बनाया है। उनके द्वारा चलाया गया संवत आज तक कालगणना का पारम्परिक आधार है।
   राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री के "मेक इन इंडिया", "डिजिटल इंडिया", "स्टार्टअप इंडिया", पर्यावरण, स्वच्छता अभियान, "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" आदि योजनाएं प्रमुख हैं। स्टार्टअप योजना का उद्देश्य युवाओं को रोजगार देने का है। आज आवश्यकता है कि इन योजनाओं को हर समाज के लोग अपनायें। विद्यार्थियों को देखना है कि इन योजनाओं से समाज का कोई भी व्यक्ति वंचित न रहे। राज्यपाल ने कहा कि हमारे छात्र-छात्राएं भारत के विकास में अपने योगदान के लिये अनेक दिशाएं खोज सकते हैं। विश्वविद्यालय, एनएसएस जैसे सशक्त प्रकल्पों के माध्यम से विद्यार्थियों की इस विकास यात्रा को सुगम बना सकते हैं। हमारे देश में ग्रामों की बड़ी संख्या है, मुझे विश्वास है कि विश्वविद्यालयों द्वारा एक-एक गांव गोद लेने से वहां के निवासियों, छात्र-छात्राओं, महिलाओं, बालिकाओं के जीवन में एक नये युग, नई आशा की किरण जागृत हो सकती है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी इन ग्रामों के बहुमुखी विकास के लिये स्वयं को समर्पित करेंगे तो तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने कहा कि गांवों की छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित न रहे, इसके लिये हमें वहां जाकर ऐसा वातावरण बनाना है, जिससे हर छात्रा महाविद्यालय में प्रवेश प्राप्त करे।
    इसके पूर्व महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभानसिंह पवैया, ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन, विधायक डॉ.मोहन यादव, कुलपति डॉ.एसएस पाण्डेय ने वाग्देवी के चित्र के संमुख दीप प्रज्वलन कर दीक्षान्त समारोह का शुभारम्भ किया। मंच तक कुलाधिपति राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल दीक्षान्त शोभायात्रा के साथ पहुंची एवं दीक्षान्त समारोह प्रारम्भ करने की घोषणा की।
    इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभानसिंह पवैया ने अपने उद्बोधन में कहा कि पहले दीक्षान्त समारोह में विदेशी गाऊन पहनकर विद्यार्थी उपाधि ग्रहण करते थे। ऐसा लगता था जैसे जादूगरों का जमावड़ा हो गया है, किन्तु आज विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा नई परम्परा की शुरूआत करते हुए मारवाड़ी पगड़ी एवं देशी परिधान में उपाधियां वितरित की गईं एवं छात्रों द्वारा स्वदेशी पोशाक पहनकर उपाधि ग्रहण की गई। यह अत्यधिक हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि उज्जैन का नाम लेते ही मन में गुरू सान्दीपनि की शिक्षास्थली का ध्यान आता है। दीक्षान्त समारोह में उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि देश ने आपको अब तक दिया ही दिया है, अब उपाधि ग्रहण करने के बाद जीवन का दूसरा काल शुरू होता है। अब आपको देश को देना ही देना है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षा छात्रों द्वारा ग्रहण की गई है, उसमें वृद्धि कर समाज को देने पर ही इसकी सार्थकता सिद्ध होगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यार्थी आत्म विश्वासी एवं नवाचारी बनें। शोध पर चिन्तन की आवश्यकता है। श्री पवैया ने कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय निरन्तर प्रगति कर रहा है। विश्वविद्यालयों को यह देखना होगा कि उनकी ख्याति कितनी है और उनके यहां से निकलने वाले विद्यार्थियों का कितना मान देश में होता है। अकादमिक प्रतिष्ठा अर्जित करने के लिये कड़ी मेहनत की आवश्यकता है। राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा और संस्कारों से अपने व्यक्तित्व को निखारने वाले विद्यार्थी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि विद्यार्थियों ने अपने परिश्रम से जो शिक्षा प्राप्त की है वह उनकी अक्षय निधि बनेगी।
   दीक्षान्त समारोह में स्वागत भाषण देते हुए कुलपति डॉ.एसएस पाण्डेय ने कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय की गौरवमयी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में निरन्तर प्रगति कर रहा है। अधोसंरचना के विकास में विक्रम विश्वविद्यालय में निरन्तर कार्य हो रहे हैं। विश्वविद्यालय को नैक द्वारा "ए" ग्रेड प्रदान की गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की भावना के अनुरूप यहां पर शोध कार्यों को और अधिक महत्व दिया जायेगा। कार्यक्रम का संचालन रजिस्ट्रार डॉ.परीक्षित सिंह ने किया।
विक्रमादित्य की प्रतिमा का पूजन-अर्चन
    राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल ने कार्यक्रम के पूर्व विश्वविद्यालय परिसर में महाराजा विक्रमादित्य की प्रतिमा का पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात वे अन्य अतिथियों एवं विश्वविद्यालय के कुलपति, प्राध्यापकों के साथ पारम्परिक रूप से शोभायात्रा में शामिल हुईं तथा कार्यक्रम स्थल पर पहुंची।
अनूठा स्वागत
    कार्यक्रम में राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल एवं अन्य अतिथियों का अनूठी विधि से स्वागत किया गया, जिसमें उन्हें फूलमाला के स्थान पर तुलसी का पौधा एवं फलों की टोकनी भेंट की गई। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल फलों को बच्चों में बांट देती हैं।
 
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