समाचार
|| उर्दू पाण्डुलिपि और पुस्तकों के लिये आवेदन आमंत्रित || खेल दिवस 29 अगस्त को स्कूलों में होंगी प्रतियोगिताएँ || जिले में 536.9 मि.मी. औसत वर्षा || किसानों की सुविधा के लिए एमपी किसान एप || डिजिटल जाति प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश || मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना में आंशिक संशोधन || विधानसभा निर्वाचन के लिए मीडिया सेल गठित जानकारी भिजवाने के निर्देश || मतदान केन्द्रों की निरीक्षण रिपोर्ट दस दिवस में दें || जिले में “मिल बांचे मध्यप्रदेश” कार्यक्रम आज || कल होगा मिल-बाँचे का आयोजन
अन्य ख़बरें
"गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही जीवन में सफलता मिलती है" - मंत्री श्री जैन
गुरू अच्युतानंद अखाड़े में हुई गुरु वंदना, मंत्री श्री जैन ने गुरुजनों से आशीर्वाद लेकर चरण वंदना की
उज्जैन | 27-जुलाई-2018
 
   
  
     शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु अच्युतानंद अखाड़े में गुरु वंदना की गई। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन ने गुरुजनों से आशीर्वाद लेकर उनकी वंदना की। इस दौरान मंत्री श्री जैन ने गुरु अखाड़े में पहली बार आए गच्छाधिपति श्री विजय नित्य सेन सूरीश्वरजी महाराज और मुनि श्री विद्वरत्न विजय जी महाराज का अभिनंदन किया  और उनसे आशीर्वाद लिया।
     इसके पश्चात मंत्री श्री जैन ने गुरु अखाड़े के संस्थापक श्री अच्युतानंद और श्री काशीनाथ डकारे की प्रतिमाओं के समक्ष पुष्प अर्पित कर पूजा अर्चना की।
     मंत्री श्री जैन ने इस अवसर पर कहा कि गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलकर ही जीवन में सफलता प्राप्त की जा सकती है। गुरु अच्युतानंद अखाड़ा स्थापित हुए काफी वर्ष बीत चुके हैं। यहां प्रतिदिन 300 बालक व्यायाम और कुश्ती के लिए आते हैं। मात्र ₹100 प्रतिमाह का शुल्क उनसे लिया जाता है। गुरु अच्युतानंद अखाड़े में प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु महोत्सव आयोजित किया जाता है।यहां मलखम्ब और कुश्ती का आयोजन किया जाता है। मंत्री श्री जैन ने कहा कि योग और व्यायाम शरीर के लिए उतने ही जरूरी हैं जितने कि जल और भोजन।
     गच्छाधिपति श्री विजय नित्य सेन सूरीश्वरजी म.सा ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि वे गुरु ही हैं जो हमें पहचानते हैं और हमारे अंदर की योग्यता का परिचय हम से करवाते हैं। जीवन जीने की कला हमें हमारे गुरु से ही प्राप्त होती है। यदि हमें जीवन को स्वस्थ बनाना है,निरोगी बनाना है तो हमें नित्य व्यायाम करना चाहिए। जो लोग रोज सुबह उठकर योग करते हैं उनके शरीर में रक्त का प्रवाह भी अच्छा रहता है।गुरुजनों द्वारा व्यायाम करने की जो विधि बताई गई है उस विधि से यदि हम व्यायाम करें तो हमें किसी भी तरह की शारीरिक और मानसिक समस्या नहीं होगी। सभी लोग अपने जीवन को स्वच्छ और स्वस्थ बनाकर आगे बढ़ें।
    मुनि श्री विद्वरत्न विजय जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि सद्गुरु के बताए हुए मार्ग का सदैव हमें अनुसरण करना चाहिए। गुरु हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। स्वामी अच्युतानंद जब 8 वर्ष के थे, तब उन्होंने ग्वालियर से वाराणसी की ओर प्रस्थान किया था। इसके पश्चात अपने गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने देश, समाज और युवाओं के जीवन में उत्थान लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उज्जैन मैं गुरु अच्युतानंद यदि नहीं आए होते तो यह व्यायामशाला भी स्थापित नहीं हो पाती।
     अच्युतानंद ने उज्जैन नगरी को इसलिए चुना क्योंकि यह एक ऊर्जावान नगरी है, यह एक शक्ति संपन्न नगरी है| व्यायामशाला की स्थापना कर गुरु अच्युतानंद ने युवाओं को शक्ति संपन्न बनाया। हमारे अंदर जो शक्ति है उसे गुरु ही जानते हैं और उसका सदुपयोग करना भी हमें गुरु ही सिखाते हैं।
     कार्यक्रम का संचालन श्री हेमंत व्यास ने किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सिद्धू मित्तल ने की। इस दौरान गुरु काशीनाथ डकारे के वंशज श्री वासुदेव डकारे, श्री रमेश टेलर श्री अमित वैष्णव श्री रितेश दुश्यानी एवं अन्य गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। कार्यक्रम के समापन  पर सभी अतिथियों द्वारा गुरुजनों से आशीर्वाद लिया गया। आभार प्रदर्शन श्री रवि लंगर ने किया।
(20 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
जुलाईअगस्त 2018सितम्बर
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
303112345
6789101112
13141516171819
20212223242526
272829303112
3456789

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer