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आजीविका मिशन से राबिया की बदली तकदीर और तस्‍वीर (सफलता की कहानी) कहानी सच्‍ची है
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अशोकनगर | 30-जुलाई-2018
 
   
   
       आजीविका मिशन जिले के ग्रामीण अंचलों में घरेलू और जरूरतमंद महिलाओं को सफल उद्यमी बनाने में मददगार साबित हो रहा है। मिशन में महिलाओं को उनकी रूचि के कारोबार के लिये प्रशिक्षण की अच्छी व्यवस्था है। साथ ही, कारोबार स्थापित करने के लिये वित्तीय मदद भी मुहैया करवायी जाती है।
   अशोनगर जिले के विकासखण्‍ड  चंदेरी  के ग्राम प्राणपुर निवासी राविया मनिहार ने  आजीविका मिशन की मदद से साड़ी बुनाई का कार्य शुरू कर बेहतर मुनाफा कमा रही हैं। राविया वर्ष 2012-13 में कलापथक आजीविका स्व-सहायता समूह से जुड़ी। राविया ने बताया कि मैंने अपने पति के साथ हथकरघा से चंदेरी साड़ी बनाने का कार्य सीखा। हमने अपने समूह को एन.आर.एल. एम से जोडकर सक्रिय किया है। लागत पूंजी ग्राम संगठन व बैंक से प्राप्‍त हो जाने पर साड़ी निर्माण कार्य को और ज्‍यादा गाति प्रदान की गई और हमारे समूह सदस्‍यों द्वारा साड़ी उत्‍पादन में बढ़ोतरी की गई।  समूह निरंतर रीजनल मेले एवं हाट में सहभागी करने लगे जिससे चंदेरी साड़ी को उचित दाम मिलने लगे।  हमारे परिवार की आमदनी 2200 से 2400 रूपये तक साप्‍ताहिक एवं 9000 से 9500 रूपये मासिक हो गई है। बर्ष 2015-16 मे हमारे परिवार की आमदनी एक सप्‍ताह 1000 से 1100 रूपये तक सप्‍ताहिक एवं 5000 रूपये मासिक आय हो पाती थी। वर्तमान में परिवार की आय दोगुनी हो जाने से बच्‍चों की शिक्षा दीक्षा अच्‍छे स्‍कूलों में हो रही है।
        राबिया ने बताया कि हमारे ग्राम प्राणपुर में एन.आर.एल.एम की टीम आई और ग्राम मे महिला स्‍वसहायता समूह बनाने की बात बताई तथा समूह के फायदे भी बताये। हमने अपने समूह के सभी सदस्‍यों की बैठक कर समूह के पुनरगठन कर साड़ी बनाने का कार्य संचालित किया। इसके पश्‍चात एन. आर. एल. एम द्वारा मुझे सेनेट्री नेपकिन के उपयोग एवं महत्‍व पर प्रशिक्षण हेतु जिला सागर भेजा गया। मेरे मन में सेनेट्री नेपकिन पर में कार्य करने की ललक जागी। मैं अपने घर पर मनहारी की दुकान भी संचा‍लित करती हूं। जिसमें सेनेट्री नेपकिन की का भी व्रिकय किया जा रहा है । समूह की आगामी योजना है कि सेनेट्री नेपकिन रीपेकजिंन एवं निर्माण का कार्य कर स्वयं उपयोग करेगें और गांव की समस्‍त महिलाओं को प्रेरित करेगें।       
(17 days ago)
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