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भगवान ही कर रहे हैं रमाबाई की मदद (कहानी सच्ची है)
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ग्वालियर | 09-अगस्त-2018
 
   
   गरीब का सहारा भगवान होता है। भगवान ही लगायेगा नैय्या पार। यह कहते हुए कई बार कई लोगों को सुना भी है। ग्वालियर की रमाबाई ने भगवान के सहारे ही अपनी जिंदगी को बेहतर बनाया। आज रमाबाई सभी भगवानों की प्रतिमायें बनाकर अपने घर-परिवार का जीवन-यापन खुशी-खुशी कर रही हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना के माध्यम से उनको यह अवसर प्राप्त हुआ।
    अपने पति के देहांत के बाद रमाबाई को अपना जीवन यापन करने में कठिनाई महसूस हो रही थी। ऐसे में स्थानीय लोगों ने उसे मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं दीनदयाल अंत्योदय योजना की जानकारी दी। नगर निगम में संपर्क करने के पश्चात उसे स्वयं का रोजगार करने हेतु 2 लाख रूपए की सहायता उपलब्ध हुई, जिसमें 40 हजार रूपए का अनुदान था। रमाबाई ने भगवान की प्रतिमायें बनाने का कार्य प्रारंभ किया। घर पर रहकर ही प्रतिमायें तैयार करना और उसे विक्रय करने के कार्य से रमाबाई को अच्छी आमदनी भी होने लगी। नियमित बैंक की किस्त देने के बाद भी उसे एक अच्छी-खासी राशि अपने जीवन यापन के लिए प्राप्त हो रही है।
   रमाबाई का कहना है कि मूर्ति बनाने का कार्य वह पूर्व से जानती थी। परंतु आर्थिक परेशानियों के कारण संभव नहीं हो रहा था। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से 2 लाख रूपए की राशि प्राप्त होते ही उसने अपना स्वयं का मूर्ति निर्माण का काम प्रारंभ किया। आज उसका व्यवसाय अच्छा चल रहा है और भगवान की कृपा से उसके जीवन में खुशियां लौटी हैं। रमाबाई आज स्वयं का व्यवसाय कर ही रही हैं बल्कि आसपास की कुछ महिलाओं को भी अपने यहां काम पर लगाए हुए हैं। रमाबाई अपनी जैसी सभी महिलाओं को भी मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के संबंध में बताती हैं और उन्हें प्रोत्साहित करती हैं कि वे भी सरकार से सहयोग लेकर अपना व्यवसाय प्रारंभ करें।

सहायक संचालक, मधु सोलापुरकर
(7 days ago)
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