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पहले दूसरे के यहां मजदूरी करती थी, अब दुकान चला रही है संतोष बाई (सफलता की कहानी)
संतोष बाई के जीवन में स्वसहायता समूह ने बदलाव लाया
शाजापुर | 10-अगस्त-2018
 
 
  शाजापुर जिले के मो.बड़ोदिया जनपद पंचायत के ग्राम गाडराखेड़ी की रहने वाली संतोष बाई एवं उसका पति घर परिवार चलाने के लिए दूसरों के यहां मजदूरी करते थे और बकरियां चराते थे। अब स्वसहायता समूह की बदौलत संतोष बाई ने खुद के लिए एक दुकान खोल ली है और पति के लिए भी सेन्ट्रींग के काम के लिए उपकरण खरीदे। इससे उन्हे 18 से 20 हजार रूपए प्रतिमाह की आमदनी होने लगी है।  
    संतोष बाई बताती हैं कि वह पहले मजदूरी करती थी। एक दिन उसके गांव में एन.आर.एल.एम. की टीम आई, उन्होने स्वसहायता समूह गठित करने के लिए प्रेरित किया। टीम ने बताया कि स्वसहायता समूह गठित करने से उन्हे आर्थिक लाभ होगा और अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे। टीम द्वारा दी गई प्रेरणा से वहं प्रभावित हुई और गांव की 15 महिलाओं के साथ मिलकर स्वसहायता समूह का गठन किया और समूह का नाम कैलादेवी स्वसहायता समूह रखा। संतोष बाई इस समूह की अध्यक्ष बनी। समूह ने बचत का काम शुरू किया। परफारमेन्स देखने के बाद समूह को गतिविधियां संचालित करने के लिए उन्हे 15 हजार रूपये का रिवाल्विंग फण्ड प्राप्त हुआ। रिवाल्विंग फण्ड को समूह की महिला सदस्यों को जरूरत के हिसाब से वितरित किया गया। संतोष बाई ने रिवाल्विंग फण्ड से 5 हजार रूपये का ऋण लेकर मनिहारी की दुकान प्रारंभ की। दुकान अच्छी चलने लगी तो इससे प्राप्त आय से पुराना कर्ज चुका दिया। इसके बाद पुनः 10 हजार रूपये का ऋण लेकर दुकान को और बड़ी की। साथ ही पति जो कि मजदूरी करते थे और बकरी चराते थे, उन्हे भी रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से 20 हजार रूपये का ऋण समूह से लिया। प्राप्त ऋण से पति के लिए सेन्ट्रींग के उपकरण क्रय किये गए। आज संतोष बाई और उसका पति मिलकर माह में 18 से 20 हजार रूपये की कमाई कर रहे हैं। इस प्रकार संतोष बाई ने स्वसहायता समूह के माध्यम से अपने जीवन में बदलाव लाया। जहां वह पहले मजदूरी करती थी, आज उसने स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर लिया।
(10 days ago)
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