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बन के एक हादसा बाजार में आ जायेगा, जो नही होगा वह अखबार में आ जायेगा - राहत इंदौरी
रहो न रहो नर्मदा बहो, नर्मदा प्रलय नही रहे बाधा प्रवाह में - कैलाश जमनानी, पचमढ़ी में कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी कविताओं से देर रात तक दर्शको को किया आल्हादित
होशंगाबाद | 29-दिसम्बर-2018
 
  
    पचमढ़ी उत्सव अब अपनी चरम सीमा में पहुँच गया है। कृष्ण लीला, मलखम, कार्निवाल एवं सुगम संगीत की प्रस्तुतियों के बाद आयोजित कवि सम्मेलन में प्रदेश एवं देश के विभिन्न कोनों से आये ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी काव्य रस के माध्यम से दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया। देर रात तक चले कवि सम्मेलन में देश के मशहूर शायर श्री राहत इंदौरी ने अपने चुटेले अंदाज में आज की वर्तमान राजनैतिक परिस्थिति पर करारा व्यंग्य किया। उन्होंने अपनी कविता के माध्मय से बताया कि आज के युग में एक छोटी सी बात भी जो होती नही है वह मीडिया के माध्यम से खबर बन जाती है। उन्होंने आज के समसामयिक माहौल को इंगित करते हुए कहा कि आज बन के एक हादसा बाजार में आ जायेंगे जो नही होगा वह अखबार में आ जायेगा। राहत इंदौरी ने फिल्मो के लिए भी गीत लिखे हैं। आज के माहौल पर सटीक टिप्पणी करते हुए शहर एवं गांव के बीच होने वाले फर्क को इंगित करते हुए कहा कि शहरों में तो बारूदों का मौसम है गांव चलो यह अमरूदों का मौसम है। ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई माँगे जो परदेश में है वो किस्से रजाई माँगे। वर्तमान हालातो पर सटीक टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अपने हाकिम की फकीरी पर तरस आता है जो अपनी जनता से पसीने की कमाई माँगे। श्री राहत इंदौरी ने देर तक दर्शको को अपने काव्य के माध्यम से चमत्कृत किया। उन्होंने पचमढ़ी में काफी देर से आने पर अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि वे मध्यप्रदेश के निवासी है और पचमढ़ी मध्यप्रदेश में ही है लेकिन उन्हें पचमढ़ी आने में 50 वर्ष लग गये।
    होशंगाबाद की माटी के पुत्र साहित्यकार और कवि श्री अशोक जमनानी ने भी अपनी कविताओं से लोगो को सोचने पर मजबूर कर दिया। उनका कहना था कि हर मंच पर एक साहित्यकार को बुलाना चाहिए। क्योकि यदि हम मंच पर साहित्यकार को नही बुलायेंगे तो साहित्य से तुलसी एवं कबीर निकल जायेंगे। उन्होंने श्रृंगार और प्रेम की कविता सुनाई। उन्होंने कहा कि वे हमेशा प्रेम की बाते करते हैं। उनका कहना था कि हमारे कवि सम्मेलन से नफरतों की कविता खत्म होना चाहिए और प्रेम की रसधार हमेशा बहनी चाहिए। उन्होंने माँ नर्मदा नदी पर आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि रहो न रहो नर्मदा बहो नर्मदा प्रलय न रहे बाधा प्रवाह में। नैनीताल से आयी हुई कवियत्री गौरी मिश्रा ने श्रृंगार एवं प्रकृति प्रेम तथा वीर रस की कविताएं सुनाई। उन्होंने कहा कि सभी त्यौहार हैं कुर्बान सरहद के सैनिको पर जो अपने खून के छीटों से हिन्दुस्तान लिखता है। मंदसौर से आये हास्यरस के कवि श्री मुन्ना बेटरी ने खुले में शौच की प्रवृत्ति और उस पर होने वाली राजनैतिक कार्यवाहियों पर करारा व्यंग्य किया। उन्होंने इशारो ही इशारो में कहा कि यदि हम ठान ले तो देश स्वच्छ हो जायेगा। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में हँसने के लिए कही बाहर जाने की जरूरत नही है। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश को बदनाम करने वाले तत्वों पर उन्होंने करारी चोट की।
    इसके पूर्व उर्दू की कवियत्री ममता वाजपेई ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुती दी। नर्मदापुरम् संभाग कमिश्नर श्री उमाकांत उमराव ने सभी कवियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये। कवि श्री दिनेश बाबरा, सुमित ओरझा, संजीव शर्मा, ममता वाजपेई ने देर रात तक दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया। कवि सम्मेलन में केंट सीईओ श्री सत्यम मोहन, अपर आयुक्त श्री आशकृत तिवारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पीसी शर्मा सहित अधिकारीगण, बड़ी संख्या में पर्यटक गण मौजूद थे।
(205 days ago)
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