समाचार
|| मुख्य परीक्षाओं एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रशिक्षण हेतु अतिथि विद्वानों हेतु आवेदन आमंत्रित || शासकीय शालाओ एवं छात्रावासों का औचक निरीक्षण कर कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा || किशोर न्याय बोर्ड तथा बालकल्याण समिति हेतु आवेदन आमंत्रित || ई.पी.एफ.ओ. पेंशनर्स हेतु डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जमा कराया जाना अनिवार्य || शासकीय महाविद्यालय में रोजगार मेला आयोजित || प्रचार रथ गांव-गांव जाकर दे रहे जय किसान फसल ऋण माफी योजना की जानकारी || चना, मसूर और सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीदी 25 मार्च से || प्रदेश हित और नागरिकों की सुविधाओं के लिए नई संचार नीति लागू || इलाज से मना करने वाले हॉस्पिटल की मान्यता रद्द होगी : स्वास्थ्य मंत्री श्री सिलावट || मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ को प्रदेश पुलिस द्वारा पुलवामा के शहीदों के परिवारों के लिये 7.50 करोड़ का चेक भेंट
अन्य ख़बरें
नवजात बच्चों की नेत्र ज्योति के साथ जिंदगी भी होगी रौशन
हमीदिया अस्पताल में शुरू हुए लेजर ट्रीटमेंट से बच्चों को मिलेगी अंधत्व की समस्या से मुक्ति
शहडोल | 12-फरवरी-2019
 
   भोपाल के शासकीय हमीदिया अस्पताल में नवजात शिशुओं को अंधत्व से बचाने के लिये रेटिनोपैथी ऑफ प्री-मेच्योरिटी नेत्र जाँच और लेजर ट्रीटमेंट शुरू किया गया है। अब तक दो हजार से अधिक नवजात शिशु इसका लाभ उठा चुके हैं। गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा हमीदिया अस्पताल में इसके लिये मंगलवार, गुरूवार और शनिवार को प्रातरू 9 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक ओपीडी संचालित की जा रही है। भोपाल के बाहर से आने वाले बच्चों की रोज जाँच की जा रही है। ओपीडी में भोपाल और आसपास के गाँव-शहरों के रेटिनोपैथी ऑफ प्री-मेच्योरिटी (आर.ओ.पी.) शिशु जाँच और उपचार के लिये आ रहे हैं।  विभागाध्यक्ष डॉ. कविता कुमार ने बताया कि रेटिनोपैथी ऑफ प्री-मेच्योरिटी अक्सर समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में पायी जाती है। जिन बच्चों का वजन 1500 ग्राम से कम है, गर्भावस्था 32 हफ्ते या उससे कम है अथवा बच्चे को जन्म के बाद अधिक मात्रा में आक्सीजन की आवश्यकता पड़ी हो, आर.ओ.पी. का शिकार होते हैं। आर.ओ.पी. पीडि़त बच्चे अंधत्व, भेंगापन, रेटीना डिटेचमेंट, ग्लूकोमा और निकट दृष्टिदोष का शिकार होते हैं। इससे उनकी जिंदगी ही दुखभरी और संघर्षमय हो जाती है। अब जन्म लेने के बाद ही शिशु की आँख का परीक्षण किया जाता है। डॉ. कविता कुमार ने कहा कि कई बार जन्म लेने के कुछ हफ्ते तक नेत्र दोष पकड़ में नहीं आता। इसलिये समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों का नेत्र परीक्षण जन्म के चौथे से छठे हफ्ते के बीच अवश्य करवाना चाहिये। पहले कुछ हफ्ते बच्चे की आँख की निगरानी की जाती है। यदि दवा या प्राकृतिक रूप से यह दोष नियंत्रित हो जाता है, तो लेजर ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता है।
    गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. अरुणा कुमार के निर्देश के तहत शासकीय अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों का नेत्र विशेषज्ञ द्वारा नेत्र परीक्षण किया जाता है। महाविद्यालय ने नेत्र विभाग के चिकित्सकों को आर.ओ.पी. पीडि़त बच्चों की जाँच और उपचार के लिये प्रशिक्षण देने के साथ सभी आवश्यक उपकरण भी प्रदान किये हैं।
    मुंगावली की किरण, विदिशा की गायत्री, राजगढ़ जिले की शिवानी, होशंगबाद जिले के ग्राम नीमसरिया की निर्मला अपने 14 दिन से 27 दिन के शिशुओं के साथ चेकअप कराने आई हैं। भोपाल में कोलार की एक माता अपने शिशु को पाँचवीं बार नेत्र जाँच के लिये लाई है। उसका कहना है कि मेरे बेटे का जन्म 7 माह में ही हो गया था, परन्तु डाक्टरों के सहयोग से अब यह सामान्य विकास की ओर है।
(9 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
जनवरीफरवरी 2019मार्च
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
28293031123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728123
45678910

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer