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जिला स्तरीय गौशाला परियोजना समन्वय समिति की बैठक आयोजित
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हरदा | 12-फरवरी-2019
 
   कलेक्टर श्री एस. विश्वनाथन के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ श्री एच.एस. मीना ने कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय गौशाला परियोजना समन्वय समिति की बैठक आयोजित की। बैठक में उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें द्वारा बताया गया कि वर्तमान में जिले में कुल 15 गौशालाएँ पंजीकृत है। जिनमें से 9 गौशालाएँ क्रियाशील तथा 6 गौशालाएँ अक्रियाशील है। क्रियाशील गौशालाओं में से 3 गौशालाएँ राजमार्ग पर स्थित है। वर्तमान में क्रियाशील 09 गौशालाओं में पशुओं को रखने की क्षमता लगभग 1665 है, जिसके विरूद्ध वर्तमान में लगभग दो हजार पशु गौशालाओं में रखे गये है। वर्तमान में जिले के नगरीय क्षेत्र में तीन तथा ग्रामीण क्षेत्र में 17 कुल 20 कांजी हाउस है, जिनमें से मात्र 4 कांजी हाउस वर्तमान में संचालित है, जिनमें से प्रत्येक कांजी हाउस में लगभग 20-25 पशु प्रति कांजी हाउस रखे जा सकते है। उन्होने बताया कि नर्मदा सेवा मिशन में गौसवंर्धन बोर्ड से हंडिया एवं चिराखान में गौशालाओं की स्थापना की जाना है। इस हेतु बाईस-बाईस लाख रूपये का आवंटन प्राप्त हुआ है। जिला पंचायत सीईओ श्री एच.एस. मीना ने निर्देशित किया कि प्रस्तावित गौशालाओं के निर्माण हेतु ई आरईएस को निर्माण एजेन्सी नियुक्त किया जावे। सभी क्रियाशील गौशालाओं के पदाधिकारी अनुदान की राशी का उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होने कहा कि शासन का उद्देश्य है कि गौशालाएं आत्म निर्भर हो। शासन गौशालाओं के संचालन के लिये संवेदनशील है। आप इस ओर भी ध्यान दे कि पशुधन से आप क्या-क्या उत्पादन प्राप्त कर सकते है ताकि गौशाला की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके। आप देख ले कि आप इसे किस तरह और बेहतर कर सकते है। बैठक में श्री मीना ने गौशाला के पदाधिकारियों से गौशाला संचालन में आ रही समस्याओं एवं सुझावों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होने उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें को निर्देशित किया कि जिले में संचालित गौशालाओं के क्षेत्र एसडीएम एवं नगर पालिका को भी दे। ताकि वे अपने क्षेत्र की गौशालाओं में ही पशुधन को भेज सके।
   श्री मीना बैठक में बताया कि शासन की ओर से जिले में तीन गौशालाओं का आवंटन प्राप्त हुआ है। प्रत्येक विकासखण्ड में एक-एक गौशाला रहेगी। गौशालाओं के निर्माण में लगने वाली राशि मनरेगा, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, वन विभाग, चारागाह विकास योजना आदि की राशि तथा राज्य स्तर पर उपलब्ध पंचायत निधि एवं जिला/जनपद/ग्राम पंचायत में उपलब्ध निधि से किया जा सकेगा। ग्राम पंचायत गौशाला के निर्माण करने के साथ-साथ उसके संचालन के लिये भी उत्तरदायी होगी। ग्राम पंचायत अगर गौशाला का संचालन आजीविका मिशन के महिला स्वसहायता समूह या स्वयं सेवा संस्था के माध्यम से कराना चाहे तो वह समन्वय समिति को सूचित करेगी। उन्होने बताया कि गौशाला हेतु भूमि का चिन्हांकन किया जा चुका है।
      बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री एच.एस. मीना, उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें, जिले में संचालित अशासकीय गौशालाओं के प्रतिनिधि एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
 
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