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सरकार अस्पतालों में होने चाहिए अधिक से अधिक प्रसव
कोई स्वास्थ्य सेवाओं के लिये पैसा मांगे तो उसे निलम्बित करें, स्वास्थ्य मंत्री श्री तुलसी सिलावट ने संभागीय समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
उज्जैन | 12-फरवरी-2019
 
 
  शासन संस्थागत प्रसव पर अत्यधिक जोर दे रहा है। अस्पतालों में प्रसव होने से माता और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसके साथ ही यह भी प्रयास किए जाएं कि अधिक से अधिक प्रसव सरकारी अस्पतालों में हों। सरकार प्रत्येक प्रसव पर 16 हजार रूपये देती है। इसके विपरीत निजी नर्सिंग होम्स में प्रसव के लिए स्वयं खर्च करना होता है, जो कि गरीब व्यक्ति के लिए मुश्किल होता है। अत: स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रयास करे कि अधिक से अधिक प्रसव सरकारी अस्पतालों में हों तथा मरीजों को अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त हो सके।
   स्वास्थ्य मंत्री श्री तुलसी सिलावट ने आज मंगलवार को अपने उज्जैन प्रवास के दौरान मेला कार्यालय में सम्पन्न स्वास्थ्य विभाग की संभागीय समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए। बैठक में स्वास्थ्य आयुक्त श्री नितेश व्यास, संभागायुक्त उज्जैन श्री अजीत कुमार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक श्री निशांत बरवड़े सहित संभाग के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारीगण, सम्बन्धित संभागीय अधिकारी आदि उपस्थित थे।
रिक्त पदों को तुरन्त भरें
   मंत्री श्री सिलावट ने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में रिक्त पड़े चिकित्सकों आदि के पदों को तुरन्त भरा जाए। साथ ही रिक्त पदों को विभाग की वेब साइट पर दर्शाया जाए। संचालक श्री बरवड़े ने बताया कि विभाग की वेब साइट पर प्रति सोमवार रिक्त पदों की प्रविष्टि कर दी जाए, प्रत्येक बुधवार को वॉकइन इंटरव्यू के माध्यम से पदों की भर्ती की व्यवस्था की जा रही है। मंत्री ने ये भी निर्देश दिए कि प्रतिनियुक्ति पर गए चिकित्सकों को तुरन्त विभाग में वापस बुलाया जाए।
खून की कमी न हो
   स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि माताओं एवं किशोरी बालिकाओं में खून की कमी होना अत्यन्त घातक होता है। अत: उनके नियमित चैकअप हों तथा उन्हें आयरन, फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएं। स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी के लिए सेक्टर स्तर पर स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं।
निजी नर्सिंग होम का निरीक्षण करें
   बैठक में यह भी बिन्दु आया कि निजी नर्सिंग होम्स मरीजों से प्रसव आदि के लिए काफी फीस लेते हैं तथा उन्हें अच्छी सुविधाएं भी प्राप्त नहीं होती हैं। साथ ही वे सीजेरियन प्रसव पर ज्यादा जोर देते हैं, जिसमें उन्हें अधिक फायदा होता है। इस पर मंत्री श्री सिलावट ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य अधिकारी निजी नर्सिंग होम्स का निरीक्षण करें।
रास्ते में मौत होना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण
   जननी एक्सप्रेस सेवा की समीक्षा के दौरान यह बिन्दु सामने आया कि संभाग में प्रसव के लिए अस्पताल ले जाते समय कई गर्भवती महिलाओं की मृत्यु के प्रकरण आए हैं। देवास जिले में ये प्रकरण सर्वाधिक 7 हैं। इस पर मंत्री द्वारा नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए गए कि प्रकरणों में कारणों की समीक्षा करें तथा दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई करें। यह स्थिति अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। यह भी बिन्दु सामने आया कि प्रसूति सहायता की राशि का एक-एक माह तक भुगतान नहीं किया जाता है। इस पर मंत्रीजी ने सख्त निर्देश दिए कि प्रकरणों को निराकृत कर उन्हें सूचित करें। स्वास्थ्य आयुक्त ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में गड़बड़ी के लिए एएनएम एवं आशा के साथ ही संस्था प्रभारी के विरूद्ध भी कार्रवाई करें। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के लिए देवास जिले के सीएमएचओ को हटाने के भी निर्देश दिए गए।
अस्पतालों का ध्यान रखें, यहां गरीब आते हैं
   स्वास्थ्य मंत्री ने संभागायुक्त श्री अजीत कुमार से कहा कि वे संभाग के सभी जिलों में अस्पतालों की व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि यहां गरीब लोग इलाज कराने आते हैं। संभागायुक्त ने मंत्रीजी को आश्वस्त कराया कि वे प्रतिमाह स्वास्थ्य विभाग की जिलेवार विस्तृत समीक्षा कर स्वास्थ्य सेवाओं में उज्जैन संभाग के जिलों को अग्रणी बनाएंगे।
कम डायलिसिस क्यों?
   संभाग के जिलों के शासकीय अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा की समीक्षा में पाया गया कि उज्जैन में 5 डायलिसिस मशीन हैं, जबकि उनका लाभ केवल 76 मरीजों को ही मिल रहा है। इस पर मंत्रीजी ने पूछा कि यह डायलिसिस सुविधा मरीजों को कम क्यों मिल रही है?  इसमें सुधार लाया जाए। समीक्षा में रतलाम जिले का कार्य उत्कृष्ट पाया गया, जहां 12 मशीनों से 7 हजार मरीजों को डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रदेश में मातृ-शिशु स्वास्थ्य मानकों में सुधार लाया जाए
   स्वास्थ्य आयुक्त श्री नितेश व्यास ने निर्देश दिए कि संभाग के सभी जिलों में मातृ-शिशु एवं पोषण मानकों में सुधार लाया जाए। इसके लिए निरन्तर कार्य किया जाए। वर्तमान में प्रदेश के मानक देश के मानकों से खराब हैं। इसके लिए यह आवश्यक है कि प्रसव अस्पतालों में ही हों तथा वहां उत्तम स्वास्थ्य सुविधा हो।
गरीब आपको ईश्वर के रूप में देखते हैं
   मंत्री श्री तुलसी सिलावट ने सभी चिकित्सकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि गरीब आपको ईश्वर के रूप में देखते हैं। आप उन्हें अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर उनके विश्वास की रक्षा करें। साथ ही अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन करें। उन्होंने चेताया कि कोई भी स्वास्थ्य केन्द्र बन्द नहीं मिलना चाहिए तथा वहां अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं होनी चाहिएं। लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पतालों में यदि कोई भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मरीजों से पैसे मांगता है तो उसे तुरन्त निलम्बित कर दिया जाएगा।
सभी से स्थान पर जाकर मिले
   बैठक के प्रारम्भ में जब अधिकारियों ने मंत्री श्री सिलावट को अपना परिचय देना प्रारम्भ किया तब उन्होंने कहा कि “अभी बैठक प्रारम्भ करते हैं, बाद में मैं स्वयं आपके स्थान पर आकर आपसे परिचय प्राप्त करूंगा। आप सभी के सहयोग से ही हम प्रदेश में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएं दिला पाएंगे।” बैठक के अन्त में श्री सिलावट अपने स्थान से उठकर प्रत्येक अधिकारी के पास गए तथा उनसे हाथ मिलाकर परिचय प्राप्त किया।
(9 days ago)
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