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खेतों में ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई किसानों के लिये वरदान-कलेक्टर नीरज कुमार सिंह
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दमोह | 08-मई-2019
 
 
   कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने जिले के किसान भाईयों से कहा है, खेतों में ग्रीष्मकालीन गहरी जुलाई किसानों के लिये वरदान है। मई-जून के माह में मिट्टी पलटने बाले हल जैसे मोल्ड़ बोर्ड प्लाऊ, टर्न रेस्ट प्लाऊ या रिवर्स विल मोल्ड़ बोर्ड प्लाऊ के द्रारा तीन बर्ष मे कम से कम एक बार 20 से.मी. से अधिक गहरी ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई अवश्य करनी चाहिए, क्योकि लगातार फसले उगाने से मृदा सख्त एवं कठोर हो जाने से जल धारण क्षमता एवं भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती जाती है तथा फसलों में विभिन्न प्रकार के रोग, कीट एवं बीमारियो एवं खरपतवारों की समस्या दिन प्रति दिन बढ़ती जाती है, जिससे फसलोत्पादन मे कमी एवं लगातार जल स्तर मे गिरावट देखी जा रही है। इन सभी समस्याओ से निजात पाने के लियें आवश्यक है, अपने खेतों में ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई की जाये।
ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करने के लाभ
   उन्होंने कहा है खेतों में गहरी जुताई करने से भूमि की ऊपरी कठोर परत टूट जाती है, जिससे मृदा में बर्षा जल धीरे-धीरे रिस-रिस कर जमीन के अंदर चला जाता है तथा वर्षा जल का रुकाव जमीन में अत्यधिक होने के कारण मृदा में जल भरण क्षमता एवं जल स्तर में वृद्धि होती है, मृदा की भौतिक संरचना में सुधार होता है, मृदा में हवा का आवागवन बढ़ जाता है एवं सूक्ष्म जीवों की संख्या में भी वृद्धि हो जाती है, तथा  जैविक पदार्थो का विघटन सर्वाधिक होता है, जिससे भूमि कि उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। मृदा मे बर्षा जल के सोखने की क्षमता बढ़ जाती है जिससे वायुमण्डल की नाइट्रोजन जल में धुल कर म्रदा में चली जाती है जिससे म्रदा की उर्वरा शक्ति में वृद्धि हो जाती है। जमीन के अंदर छिपे हुए कीटों के अंडे, प्युपा आदि जमीन के ऊपर आ जाते है और तेज धूप के कारण मर जाते है।
   उन्होंने कहा खरपतवारों के बीज एवं रोग फैलाने वाली कवक, बेक्टीरिया एवं वायरस भी तेज धूप के कारण मर जाते है जिससे अगली फसल में रोग, कीट एवं खरपतवारों की समस्या कम होती है। ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई खेत के ढ़ाल की विपरीत दिशा में करने से मृदा एवं जल कटाव में कमी एवं वर्षा जल बहकर नुकसान हो जाने से भी बच जाता है। ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करने से फसल उत्पादन में 10-20% तक की वृद्धि हो जाती है।
 
(42 days ago)
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