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डेंगू जानलेवा भी हो सकता है: डॉ. हेमन्त गौतम
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दतिया | 15-मई-2019
 
   किसी ने सच ही लिखा है कि, ‘सावधानियों का कितना ही जोड़ा जाये मेला, सभी झमेला छोड़ इक दिन उड़ता हंस अकेला’, ‘हंस उड़ा तो फिर पिंजड़े की कीमत खो जाती है, इसी जगह पर दीवाली की होली हो जाती है। यह शास्वत सत्य है, कि जो जन्मा है, वो मृत्यु को प्राप्त होगा। जो आया है, वो जाएगा। किंतु मानवीय भूल, मानवीय गलतियों, मानवीय सावधानियों के कारण किसी का काल के गाल में समा जाना दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
    राष्ट्रीय डेंगू दिवस प्रति वर्ष 16 मई को मनाया जाता है। डेंगू बुखार मच्छरों के काटने से फैलने वाली प्रमुख बीमारियों में से एक है। हर साल डेंगू बुखार के 50 लाख से एक करोड़ मामले सामने आते हैं, जिनमें से लगभग पांच लाख मामले बुखार के कारण दिमाग की नस फट जाने और कोमा के होते हैं।
    बरसात में होने वाली बीमारियों में से डेंगू भी एक है और डेंगू का वायरस एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। ऐसे मौसम में जलजमाव के कारण मच्छरों की संख्या में वृद्धि हो जाती है। डेंगू बुखार एक कीट जनित संक्रामक रोग है। इसका ईलाज अत्यंत आसान हैं, किंतु ईलाज में देरी के कारण यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। बरसात के मौसम की नमी डेंगू के फैलने के लिए माकूल मौसम होता है। अगर आपको या आपके पड़ोसी को डेंगू बुखार हो जाता है, तो तुरंत इससे बचने के उपाय अपनायें। सबसे पहले रक्तचाप की जांच करायें और अपने घर के आसपास मच्छरों से सुरक्षा के इंतजाम करें। प्रत्येक टंकी, बर्तन, कूलर, छत पर रखे कबाड़ के वर्तनों, टायर-ट्यूब के पानी में मच्छर के लार्वा का परीक्षण करें। पानी में किसी भी प्रकार का कीड़ा मच्छर का लार्वा अथवा प्यूपा ही हो सकता है। जो आगे चलकर मच्छर बनता है। उसे नष्ट करना डेंगू से बचाव का प्रमुख कार्य है। जिस क्षेत्र में डेंगू का मरीज मिलता है। उसी क्षेत्र में अगामी सत्र में 10 गुनी संख्या में डेंगू के मरीज मिलने की आंशका बढ़ जाती है। क्योंकि जब एक मच्छर मादा मच्छर से संसर्ग करता है तो डेन वायरस अण्डों के जरिये अन्य मच्छरों में पहुंच जाता है। इस प्रक्रिया को ट्रांसओवेरियन ट्रांसमिशन कहा जाता है। चूंकि यह मादा मच्छर अधिक संख्या में अण्डे देती है इसलिए डेंगू को तेजी से फैलने में मदद मिलती है। सच्चाई यह है कि अपने पूरे जीवनकाल में सिर्फ एक बार संसर्ग बनाने वाली हर मादा मच्छर तकरीबन 200 से 500 अंडे तक देती है। यह बात आपके रोंगटे खड़े कर सकती है कि जब 200 से 500 अंडे देने वाली सिर्फ एक मादा मच्छर अपने जीवन में सिर्फ एक बार संबंध बनाती है। जबकि नर मच्छर एक से अधिक बार संबंध बनाता है। जिसके बाद इनकी संख्या का हिसाब लगाना मुश्किल है। इसके लिए खुद से बचाव ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
    वैज्ञानिकों ने हाल ही में डेंगू से संबंधित एक नए जीन की खोज की है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस जीन के आधार पर इस लाइलाज बीमारी की दवा विकसित की जा सकेगी।
नोवार्टिस इंस्टीट्यूट फार ट्रापिकल डिजीजिस और जीनोम इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक अनुसंधान दल ने ‘माइक्रो ऐरे’ तकनीक के आधार पर मानव शरीर में इन जीनों पर नजर रखी। दल ने इस बात की पड़ताल की है कि यह जीन डेंगू के वायरस से सामना होने पर क्या प्रतिक्रिया देता है और इसी आधार पर इनकी पहचान संभव हुई।
    जानकारी के अभाव में हर साल हजारों लोग इसकी चपेट में आते हैं। इसी वजह से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया। इसका उद्देश्य डेंगू के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना और डेंगू की रोकथाम के लिए पहल करना है। डेंगू मच्छर के काटने से फैलने वाला एक वायरल रोग है। डेंगू हैमरहेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम को सीवियर या डेंगू माना जाता है। इस तरह के डेंगू का अगर सही समय पर इलाज न किया जाए, तो मरीज की जान भी जा सकती है। पेट में अत्याधिक दर्द, सांस तेज चलने लगना, जल्दी-जल्दी उल्टी होना, उल्टी के साथ खून आना, शरीर में पानी भरने लगना, मसूड़ों और नाक से खून निकलने लगना, लिवर में सूजन हो जाना, प्लेटलेट्स का बहुत तेजी से गिरना, सुस्ती और बेचौनी होना डेंगू रोग में जीवन के लिए खतरे की घंटी है। सीवियर डेंगू के इन लक्षणों के दिखाई देने पर जितनी जल्दी हो सके चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
    ठंड के साथ अचानक तेज बुखार होना, सरदर्द, गले में दर्द, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना, अत्यधिक कमजोरी महसूस होना और भूख कम लगना, शरीर पर ददोरे पड़ना डेंगू बुखार के प्रमुख लक्षण हैं।
   डेंगू के सामान्य बुखार की स्थिति में पैरासिटामाल की गोली देकर प्रारंभिक ईलाज दिया जा सकता है। शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित रखने का हर संभव प्रयास करें और इसके लिए आप फलों का जूस भी ले सकते हैं। संतरे के जूस के सेवन से पाचनतंत्र ठीक रहता है और प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। तुलसी और अदरक से बनी हरी चाय के सेवन से मरीज को अच्छा महसूस होगा और इसके स्वास्थ्य में लाभ भी मिलेगा। 3 दिन से अधिक समय तक बुखार रहने पर चिकित्सक से संपर्क जरूर करें। डेंगू से बचने के लिए जरूरी है मच्छरों से बचना जिनसे ‘डेंगू वायरस’ फैलता है। अपने घर, बच्चों के स्कूल और आफिस की साफ-सफाई पर भी नजर रखें। याद रखें इलाज से बेहतर है रोग की रोकथाम।
(63 days ago)
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