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क्या युवा, क्या वृद्ध और क्या दिव्यांग लोकतंत्र के महापर्व पर सभी ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा (मतदान सुविधाओं की कहानियां)
कोई 1500 किमी दूर से तो कोई फ्रेक्चर होने के बावजूद आया मतदान करने मतदान केन्द्रों पर मिली सुविधाओं की खुले दिल से की तारीफ
उज्जैन | 19-मई-2019
 
   
    लोकसभा निर्वाचन-2019 के अन्तर्गत रविवार को उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र में मतदान सम्पन्न हुए। लोकतंत्र के इस महापर्व पर तरूण, वृद्धजन और दिव्यांगजनों ने पूरे जोशी, उमंग और उल्लास के साथ इसमें सहभागिता की और मतदान के अधिकार और कर्तव्य को पूरी निष्ठा के साथ निभाया।

      उज्जैन के नानाखेड़ा स्थित मॉडल उमावि में बनाये गये मतदान केन्द्र पर पहली बार लोकसभा चुनाव में मतदान करने के लिये आये 23 वर्षीय किंशुक परमार ने बताया कि वे अभी चैन्नई (तमिलनाडु) में रहकर एमए इंगलिश लिटरेचर के अन्तिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। वे केवल मतदान करने के लिये ही लगभग 1500 किलो मीटर से अधिक दूर यहां आये हैं। उनके कॉलेज की छुट्टियां खत्म हो गई थीं, लेकिन मतदान के प्रति अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए विशेष अनुमति लेकर मतदान करने के लिये यहां आये हैं। किंशुक मतदान को लेकर बहुत ही उत्साहित लग रहे थे। चैन्नई में उनके साथ पढ़ रहे उज्जैन के ही निवासी दूसरे दोस्तों को भी उन्होंने मतदान करने के लिये प्रेरित किया और वे सभी एकसाथ चैन्नई से यहां आये। किंशुक ने कहा कि मतदान केन्द्र पर बहुत अच्छे इंतजामात हैं।

      मतदान करने के बाद किंशुक को वाकई ऐसी अनुभूति हुई, जैसे उन्होंने अपने देश और समाज के लिये कुछ किया है। किंशुक ने कहा कि युवाओं को अपने मतदान के अधिकार का पूरा सदुपयोग करना चाहिये। पढ़ाई के प्रति गंभीर किंशुक अपने स्वास्थ्य और लोकतंत्र के प्रति भी उतने ही गंभीर हैं। ट्रेन के कई घंटे लम्बे सफर में थकने के बावजूद किंशुक प्रतिदिन की भांति रविवार 19 मई को सुबह 5 बजे उठे, व्यायाम किया, बेडमिंटन खेलने गये और फिर सबसे जरूरी काम मतदान भी किया।

      युवावर्ग के अनुभव सुनने के बाद मौका था अनुभवी वर्ग के लोगों के मतदान के अनुभव साझा करने का। 65 वर्षीय वृद्ध शान्तिबाई जो कि शहर के काला पत्थर इलाके में रहती हैं, बड़ी तत्परता से अपने आठ वर्षीय पोते के साथ मतदान करने के लिये आई थी। उनके बांये हाथ की हड्डी कुछ दिन पहले टूट गई थी, लेकिन मतदान का उत्साह उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था और हाथ की पीड़ा शायद जैसे घर में ही छूट गई थी। शान्तिबाई ने बताया कि डॉक्टर ने उन्हें कहा था कि फ्रेक्चर बहुत ही सीरियस है। ऐसी स्थिति में यदि जरूरी न हो तो बाहर मत निकलना, लेकिन आज मौका था हमारे लोकतंत्र के महायज्ञ में अपने हाथों से आहुति देने का, तो शान्तिबाई भला इसमें कैसे पीछे रह सकती थीं। यह काम तो सबसे ज्यादा जरूरी था।

      जैसे ही शान्तिबाई केन्द्र पहुंची, वहां मौजूद वॉलेंटियर्स ने तुरन्त आगे बढ़कर मतदान करने में उनकी सहायता की। वे शान्तिबाई का हाथ पकड़कर सावधानीपूर्वक उन्हें अन्दर ले गये और उनका मतदान कराया। शान्तिबाई ने बड़े इत्मीनान से मतदान किया। केन्द्र पर उपलब्ध ठण्डे पानी की टंकी से एक गिलास ठण्डा पानी पीया और यहां की व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए अपने घर की ओर रवाना हुईं।

      बड़नगर विधानसभा के मौलाना हायर सेकेण्डरी स्कूल में आदर्श मतदान केन्द्र बनाया गया था। इसमें आज एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों ने एकसाथ मतदान किया। मौलाना निवासी 70 वर्षीय कंचनबाई अपनी 43 वर्षीय बेटी मनोरमा पाटीदार और 19 वर्षीय बेटी की बेटी (नातीन) ललिता पाटीदार के साथ यहां मतदान करने के लिये आई थी। तीनों पीढ़ियों की महिलाओं की मतदान केन्द्र के बारे में यही राय थी कि यहां सभी को बहुत अच्छी सुविधाएं दी जा रही हैं।

      25 वर्षीय नीमा और उनके पति राकेश भी यहां मतदान करने के लिये आये थे। साथ में उनकी दो वर्ष की बालिका सोनम भी थी। घर में उसे अकेला नहीं छोड़ सकते थे, लेकिन मतदान केन्द्र पर बनाये गये झूलाघर में सोनम को बिलकुल घर जैसा माहौल, घर जैसा झूला और घर जैसे खिलौने मिले। सोनम खिलौनों से खेलने में व्यस्त हो गई और उधर उसके माता-पिता मतदान कर अपने कर्तव्य से निवृत्त हो गये। मतदान के बाद सोनम केन्द्र में लगे रंग-बिरंगे गुब्बारों को देखकर खुश हुई तो नीचे गिरे दो-तीन गुब्बारे अपने साथ घर ले गई। मतदान केन्द्र पर मौजूद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बहुत अच्छे से धात्री महिलाओं के बच्चों का ध्यान रखा और उन्हें कुछ पल के लिये भी अपनी मां की कमी नहीं खलने दी।

      उन्हेल के शासकीय बालक उमावि में पिंक पोलिंग बूथ बनाया गया था। यहां वोट देने के लिये आये 50 वर्षीय प्रसन्न कोलटकर और उनकी पत्नी 48 वर्षीय पूर्वा कोलटकर को मात्र कुछ ही मिनिट लगे मतदान करने में। उन्होंने बताया कि गर्मी के इस मौसम में तपती दोपहर में मतदान करने के लिये उनका घर से बाहर निकलने का मन बिलकुल भी नहीं था, क्या पता केन्द्र पर कैसी व्यवस्था हो, लेकिन यहां आने के बाद तो उन दोनों का मतदान करने के बाद भी घर जाने का मन नहीं कर रहा था। केन्द्र में मतदाताओं की सुविधा के लिये जगह-जगह कूलर और पंखे लगाये गये थे और ठण्डे पेयजल का भी पर्याप्त इंतजाम किया गया था। धूप से बचने के लिये केन्द्र के बाहर पूरे परिसर में टेन्ट लगवाये गये थे। साथ ही दिव्यांगजनों को लाने-ले जाने के लिये पर्याप्त संख्या में व्हील चेयर्स मौजूद थीं। यहां के सेक्टर आफिसर श्री कमलेश कुमार राठौर भी एक बार को स्वयं एक दिव्यांग मतदाता को व्हील चेयर पर मतदान करवाने के लिये ले गये।

वोट तो दे दिया, अब फेसबुक पर दोस्तों के साथ शेयर करेंगे

मतदान के बाद फर्स्ट टाईम वोटर्स ने ली सेल्फी

      उन्हेल के मतदान केन्द्र में इस बार 18 वर्ष के पहली बार मतदान कर रहे युवाओं (फर्स्ट टाईम वोटर्स) में मतदान को लेकर खासा जोश था। सभी ने एक स्वर में कहा कि वोट तो दे दिया अब फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर भी करेंगे। सभी युवाओं ने केन्द्र के बाहर मतदान करने के बाद सेल्फी ली। 18 वर्षीय अलविश उपाध्याय और उनकी हमउम्र चचेरी बहन प्रगति उपाध्याय जब मतदान करने के लिये पहुंचे तो केन्द्र पर फूलमाला पहनाकर उनका स्वागत किया गया। अलविश ने बताया कि वे लोकसेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद उनके पिता ने उन्हें प्रेरणा दी कि लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी सहभागिता करना भी देश की सेवा करना है, इसलिये मतदाता सूची में उन्होंने तुरन्त अपना नाम जुड़वाया और आज यहां मतदान करने के लिये आये हैं। मतदान करने के बाद उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है।

      प्रगति उपाध्याय ने बताया कि वे बदनावर में अपनी मौसी के यहां गर्मी की छुट्टियां बिताने गई थी, लेकिन मतदान करने के लिये केवल एक दिन के लिये वे यहां आई हैं। उनके ताऊजी कहते हैं कि मतदान सबसे बड़ा दान होता है, इसीलिये मतदान के महत्व को समझते हुए वे यहां आई हैं। केन्द्र में आकर प्रगति को वाकई ऐसा लगा जैसे वह एक बहुत बड़े पर्व की साक्षी बन रही हैं। एक अन्य फर्स्ट टाईम वोटर 19 वर्षीय शैली जायसवाल ने कहा कि घर के बुजुर्गों ने उन्हें हमेशा से यही सिखाया है कि राष्ट्रहित के लिये सभी को अपना मतदान जरूर करना चाहिये। परिणाम जो भी हो, देश और युवाओं का विकास होना चाहिये। इसीलिये ही हम सरकार चुनते हैं।

      अलविश और प्रगति के माता-पिता कृष्णगोपाल और प्रतिभा उपाध्याय के चेहरे पर स्वयं मतदान करने और अपने बच्चों के पहली बार मतदान करने की खुशी साफ झलक रही थी। मतदान कर बाहर निकले बच्चों को उनके माता-पिता ने खुशी में अपनी गोद में उठा लिया था।

उम्र के अन्तिम पड़ाव पर ईश्वर और लोकतंत्र दोनों में श्रद्धा है गंगाबाई की

      घट्टिया के आदर्श मतदान केन्द्र में वहीं के निवासी 45 वर्षीय बनेसिंह, अपनी 80 वर्षीय भाभी गंगाबाई के साथ मतदान करने के लिये पहुंचे थे। बनेसिंह ने बताया कि उनकी भाभी एक पैर से नि:शक्त हैं, परन्तु उम्र के इस दौर में भी ईश्वर और लोकतंत्र में गंगाबाई की गहरी आस्था है। बनेसिंह जब उन्हें लेकर मतदान करने के लिये पहुंचे तो गंगाबाई को तुरन्त व्हील चेयर पर बैठाकर प्राथमिकता देते हुए मतदान के लिये ले जाया गया। बनेसिंह ने भी मतदान किया। मतदान केन्द्र की सुविधाओं की प्रशंसा की और उसके बाद अपनी भाभी को लेकर घर की ओर रवाना हुए। बनेसिंह ने बताया कि उन्हें मतदान करने में कोई परेशानी नहीं हुई। दिव्यांगजनों के लिये जो सुविधा की गई हैं, उसके लिये गंगाबाई ने मतदानकर्मियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
(29 days ago)
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