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स्टार्टअप उद्योगों का स्मार्ट सिटी में योगदान कार्यशाला सम्पन्न
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सागर | 29-मई-2019
 
   
 
   सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड एवं स.रा. शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, सागर के तत्वाधान में ‘स्टार्टअप समस्याओं पर चर्चा एवं विचार’ विषय पर कार्यशाला का आयोजनकिया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता स्मार्ट सिटी लिमिटेड कम्पनी सागर के कार्यकारी निदेशक व नगर निगम कमिश्नर श्री अनुराग वर्मा द्वारा की गई।
    उन्होनें कहा कि स्टार्टअप एक नई कंपनी होती है, जिसको शुरू करने के बाद उसको डेवलप किया जाता है। आमतौर पर स्टार्टअप यानी नई कंपनी शुरू करने को कहा जाता है, जिसको कोई यूथ स्वंय या दो तीन लोगों के साथ मिलकर शुरू करता है। आमतौर पर उसको शुरू करने वाला व्यक्ति उसमें पूंजी लगाने के साथ कंपनी का संचालन भी करता है। यह कंपनी वैसे प्रोडक्ट्स या सर्विस को लांच करती है, जो कि मार्केट में उपलब्ध नहीं होता है। ऐसे प्रोडक्ट्स को लांच करने वाले यूथ अपने आइडिया लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं, जिसे वह अपने मेहनत के बल पर मार्केट में स्थापित भी करते हैं। इसे सरल शब्दों में हम कह सकते हैं कि स्टार्टअप आंन्त्रप्रेन्योर्स के लिए अपने कारोबार को एक नई कंपनी के रूप में शुरुआत करना है। कॉमनवेल्थ लोकल गवर्नमेंट फोरम, लंदन की एशिया क्षेत्र की परियोजना अधिकारी अनुया कुअल नें इस मौके पर प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाया और अपने अनुभवों को साझा करते हुए अन्य सफल उद्योगों के अनुभव भी  साझा किए। उन्होने यह  भी  बताया कि किस  तरह  से कॉमनवेल्थ लोकल गवर्नमेंट फोरम विभिन्न तरह  से स्टार्टप की  सहायता करता है। कॉमनवेल्थ लोकल गवर्नमेंट फोरम, लंदन के  ही श्री शहजाद खान नें कहा कि स्टार्टअप प्रारम्भ करने के  पूर्व अनुभवों का आदान प्रदान करना आवश्यक होता है ताकि नये उद्योगों को प्रारंभ करने में होने वाली परेशानियों से पूर्व में ही निराकरण किया जा सके। साथ ही इन्होनें इन्कूवेशन आईडिया पर बहुत जोर दिया।
    भोपाल से इन्कूवेशन मास्टर कंपनी के प्रेसीडेंट श्री चन्द्र कांत तिवारी नें नये स्टार्टअप को करने में क्या क्या परेशानिया आती हैं उस पर विस्तार से चर्चा की साथ ही सरकार द्वारा किये जाने वाले बुट स्टे्पिंग, एंजिल इनवेस्टमेंट  आदि के बारे में विस्तृत रूप से समझया गया। विशेष तौर पर एंजिल इकोनोमी की बारीकियों पर व्याख्यान केन्द्रित करते हुए प्रतिभागियों  को बताया गया कि किसी भी नये  उद्योग के प्रारंभ करने के पूर्व उस पर आने वाली लागत एवं भविष्य में उस से होने वाली आय के बीच में एक सामंजस्य स्थापित करना अनिवार्य है। उन्होनें सामान्य विजनिश और स्टार्टअप में अंतर बताया।
    यह भी बताया कि परम्परागत संचालित उद्योगों में गुणात्मक बृद्धि नहीं हो पाती है जबकि उन्ही उद्योगों को यदि नये प्रबंधकीय नवाचारों से प्रारंभ किया जाये तो शीघ्र ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। अधिकतर सहभागियों को स्टार्टअप और उद्यमिता के मध्य अंतर का ज्ञान नहीं है। इस कार्यशाला के बाद प्रतिभागियों में स्टार्टअप को प्रारंभ करने का ज्ञान दिया गया तथा यह भी समझाया गया कि जरूरी नहीं कि हर काम बड़े स्टार्टअप से प्रारंभ किया जाये, छोटे छोटे स्टार्टअप से प्रारंभ करते हुए एक नई दिशा बनाई जा सकती है।
    श्री राहुल राजपूत, मुख्य कार्यपलन अधिकारी,स्मार्ट सिटी लिमिटेड कम्पनी सागरनें  स्टार्टअप के नियमों के बादे में बताया कि  किसी कंपनी को स्टार्टअप कैटगरी में आने के लिए उसके प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पार्टनरशिप फर्म अथवा लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म के रूप में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। इसके अलावा स्टार्टअप के लिए  किसी कंपनी का गठन 5 साल से पुराना नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही कंपनी का टर्नओवर 25 करोड़ रुपए तक होना चाहिए। तभी वह कंपनी स्टार्टअप की कैटगरी में शामिल सकती है।
    इस  मौके पर  स.रा. शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वाय. पी. सिंह नें कहा कि स्टार्टअप के दायरे में वहीं कंपनी आएगी जिसका प्रोडक्ट या सर्विस नई तरह की हो, लेकिन यदि किसी प्रोडक्ट में बदलाव किया गया है तो उसका फायदा कस्टमर को मिल रहा है कि नहीं यह देखना जरूरी होगा। इसके अलावा इंडियन पेटेंड और टेड्रमार्क ऑफिस से किसी प्रोडक्ट को पेटेंट मिला हो। वहीं, अगर सरकार किस प्रोडक्ट को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक मदद दे रही हो, जिससे आम आदमी को लाभ होता हो।
    डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के प्रो. जी.एल. परताम्बेकर नें भी अपने अनुभवों को सभी के सामने रखा। बताया कि छात्रों द्वारा किस तरह से स्टार्टअप किया और क्या क्या परेशानिया आती हैं।
इस  मैके पर स्टार्टअप प्रारम्भ करने में  शासन द्वारा प्रदाय  दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में भी बताया गया  कि स्टार्टअप के लिए जारी एक्शन प्लान में सरकार ने कई अहम घोषणाएं की हैं, जिससे स्टार्टअप को बूस्ट मिलेगा और लाखों रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। स्टार्टअप को सरकार की तरफ से मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार हैः-
     पेटेंट एप्लीकेशन फीस में 80 पर्सेंट की छूट देगी सरकार।सरकार देशभर में 35 नए इन्क्यूबेशन सेंटर खोलेगी।3 साल तक स्टार्टअप का काई इंस्पेक्शन नहीं किया जाएगा।शेयर मार्केट वैल्यू से ऊपर के इन्वेस्टमेंट पर टैक्स में छूट देगी सरकार। प्रॉफिट होने पर भी 3 साल तक स्टार्टअप्स को इनकम टैक्स में छूट मिलेगी। देश के प्रमुख शहरों में पेटेंट के लिए कंसल्टेशन की फ्री व्यवस्था रहेगी। सार्वजनिक और सरकारी खरीद में स्टार्टअप को छूट मिल  रही  है।स्टार्टअप के लिए फास्ट एक्जिट पॉलिसी बनाई गई है।अपनी प्रॉपर्टी बेचकर स्टार्टअप में इन्वेस्ट करने वाले को कैपिटल गेन टैक्स की छूट मिलेगी।10 हजार करोड़ रुपए का फंड बनाया गया  है, जिसमें से प्रत्येक साल 2500 करोड़ रुपए का फंड स्टार्टअप्स को मिलेगा।स्टार्टअप के लिए चार साल तक 500 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का क्रेडिट गारंटी फंड सरकार बना रही  है।
    कार्यशाला में पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के श्री एस.एस. यादव, व्याख्याता नें भी अपने अनुभवों को साझा किया तथा कहा कि थोड़े से इनवेस्टमेंट से भी स्टार्टअप किया जा सकता है। कार्यशाला में संस्था के श्री एस.पी. बिजौरिया, श्यशवंत परते, श्री मुकेश शुंखवार एवं अन्य अधिकारीध्कर्मचारी उपस्थित रहें साथ  ही स्मार्ट सेटी लिमिटेड कम्पनी के  रजत  गुप्ता, आकांक्षा जुनेजा आदि उपस्थित थे। साथ ही कार्यशाला मे छात्र-छात्राओं में भी भाग लिया।
(27 days ago)
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