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किसान भाईयों को सोयाबीन के लिए उपयोगी सलाह
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खण्डवा | 11-जून-2019
 
   उप संचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने किसान भाईयों को सलाह दी है कि उत्पादन में स्थिरता की दृष्टि से 2 से 3 वर्ष में एक बार खेत की गहरी जुताई करना लाभप्रद होता है। अतः जिन किसान भाईयों ने खेत की गहरी जुताई नहीं की है वे कृपया अवश्य करें। उसके बाद बख्खर व कल्टीवेटर एवं पाटा चलाकर खेत को तैयार करें। उन्होंने किसानों भाईयों से कहा कि उपलब्धता अनुसार अपने खेत में 10 मीटर के अंतराल पर सब-सॉयलर चलाएं जिससे मिट्टी की कठोर परत को तोड़ने से जल अवशोषण व नमी का संचार अधिक समय तक बना रहे। खेत की अंतिम बखरनी से पूर्व अनुशंसित की खाद 10 टन प्रति हेक्टेयर या मुर्गी की खाद 2.5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से डालकर खेत में फैला दें।
    उप संचालक कृषि श्री गुप्ता ने कहा कि अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित सोयाबीन किस्मों में से उपयुक्त किस्म का चयन कर बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उपलब्ध सोयाबीन बीज का अंकुरण परीक्षण न्यूनतम 70 प्रतिशत सुनिश्चित करें। बोनी के समय आवश्यक आदान जैसे उर्वरक, खरपतवारनाशक, फफूंदनाशक, जैविक कल्चर आदि का क्रय कर उपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि पीला मोजेक बीमारी की रोकथाम के लिए अनुशंसित कीटनाशक थायोमिथाक्सम 30 एफ.एस. 10 मि.ली. प्रति किलो ग्राम बीज या इमिडाक्लोप्रिड 48 एफ.एस. 1.2 मि.ली. प्रति किलोग्राम बीज से बीज उपचार करने के लिए क्रय व उपलब्धता सुनिश्चित करें। किसान भाई वर्षा के आगमन पश्चात सोयाबीन की बोनी हेतु मध्य जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह का उपयुक्त समय है। नियमित मानसून के पश्चात लगभग 4 इंच वर्षा होने के बाद ही बुवाई करना उचित होता है। मानसून पूर्व वर्षा के आधार पर बोनी करने से सूखे का लंबा अंतराल रहने पर फसल को नुकसान हो सकता है।
(39 days ago)
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