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गैलार्डिया (फूल) की खेती कर शषिकांत 5 हजार की लागत से कमा रहे 50 हजार "सफलता की कहानी"
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सागर | 12-जून-2019
 
   
  
  जिले के विकासखंड जैसीनगर के ग्राम चैनपुरा एवं मन्कयाई के कृषक परंपरागत खेती खेती से हटकर उद्यानिकी के अंतर्गत पुष्प खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। आधुनिक तौर-तरीकों के साथ ही यहां के किसान गैलार्डिया व गेंदा एवं डेजी फूल की खेती वर्ष भर करते हैं। वर्तमान ग्रीष्म काल में नवरंगा या गैलार्डिया की बहार है। विकासखंड के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी श्री आर के मिश्रा का कहना है, कि गैलार्डिया या नवरंगा फूल की खेती से यहां के किसान दो माह में ही आधा एकड़ क्षेत्र से एक लाख की फसल स्थानीय सागर मंडी में बेच लेते हैं। इसकी खेती में अधिक परिश्रम की आवश्यकता नहीं होती है। एक बार लगाने के बाद विशेष दवाई आदि की आवश्यकता भी नहीं होती है। इसमें 4-5 बार पानी देना पड़ता है।
    ग्राम चेनपुरा विकासखंड जैसीनगर के कृषक श्री शशिकांत पटेल ने बताया कि उन्होंने 1 एकड़ में नौरंगा या गैलार्डिया लगाया है। वर्तमान समय में प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल फूल का उत्पादन प्राप्त हो रहा है। फूलों की बिक्री से प्रतिदिन दो से ढाई हजार रुपए की आय हो रही है। इसी ग्राम के कृषक श्री देवी सिंह पिता जमुना पटेल ने बताया, कि उन्होंने 60 डेसिमल में गैलार्डिया या नौरंगा लगाया है, जिसमे बीज की कीमत सहित कुल लागत 4 हजार आई है। प्रतिदिन स्थानीय सागर मध्य प्रदेश की मंडी में एक से डेढ़ क्विंटल फूलों की बिक्री से प्रतिदिन दो से ढाई हजार रुपए की एवं 50 हजार की मासिक आय हो रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अखिल भारतीय गुलाब प्रदर्शनी में भी स्थानीय उद्यानिकी के अधिकारियों की प्रेरणा से पुरस्कार प्राप्त हुआ है। ग्राम चैनपुरा के ही कृषक श्री ज्ञान सिंह पिता हर प्रसाद पटेल ने बताया कि उन्होंने नवरंगा का आधा एकड़ में रोपण नवंबर में किया था। बीज की बोनी सितंबर 2019 में की, 45 दिन में पौध तैयार हुई, कुल लागत 5 हजार आई, खाद उर्वरक में डीएपी, पोटाश व सूक्ष्म पोषक तत्व का प्रयोग किया। जनवरी माह से फूलों की तुडाई प्रारंभ हुई। 6 माह की अवधि में एक से डेढ़ लाख रुपए शुद्ध आय प्राप्त हुई।
(38 days ago)
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